उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी पत्र भेजा गया है, जिसमें देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए खुले एवं अनुपयोगी बोरवेलों को बंद करने संबंधी एक समान राष्ट्रीय गाइडलाइन जारी करने का अनुरोध किया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी बच्चे की जान इस प्रकार की लापरवाही से न जाए।
एडवोकेट वासु रंजन ने कहा कि केवल प्रशासनिक निर्देश पर्याप्त नहीं हैं। जो खेत मालिक या भूमि स्वामी खुले और असुरक्षित बोरवेल छोड़ देते हैं, उनके विरुद्ध भी आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसी लापरवाही सीधे तौर पर लोगों के जीवन को खतरे में डालती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी खुले बोरवेल के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि निरवैर की मौत पूरे देश के लिए एक चेतावनी है और अब समय आ गया है कि खुले बोरवेलों के मुद्दे पर केवल संवेदनाएं व्यक्त करने के बजाय प्रभावी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यदि निर्धारित अवधि में आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो जनहित और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
