साइबर राहगिरी के तहत साइबर थाना पुलिस ने विधार्थियों को किया जागरूक।
पुलिस महानिदेशक हरियाणा के आदेशानुसार हरियाणा पुलिस द्वारा आमजन को जागरुक करके के लिए जिला पुलिस द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। पुलिस अधीक्षक श्री चन्द्र मोहन के कुशल मार्ग-दर्शन में जिला पुलिस आमजन को साईबर अपराध के बारे जागरुक कर रही है। बुधवार को साइबर राहगिरी के तहत साइबर थाना की टीम ने सैक्टर-13 सीनियर सिटिजन फोरम में बुजुर्गों और आमजन को साईबर अपराधों के प्रति जागरुक किया।
जानकारी देते हुए पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि बुधवार को साइबर थाना कुरुक्षेत्र की टीम ने सैक्टर-13 सीनियर सिटिजन फोरम में बुजुर्गों और आमजन को साईबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। संबोधित करते हुए साइबर थाना के पीएसआई हरीश कुमार ने कहा कि बताया कि साईबर ठगों के निशाने पर हर वह आदमी है, जो किसी भी डिजिटल माध्यम से जुड़ा है। फिर चाहे वह इंटरनेट मीडिया हो या फिर इंटरनेट बैंकिंग। बदलते वक्त के साथ साईबर ठगों ने अपने पैंतरे भी बदले हैं। वर्तमान में साइबर ठग पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर, फर्जी अधिकारी बनकर या मानसिक दबाव बनाकर स्वयं उससे ओटीपी सांझा करवा लेते हैं। साइबर अपराधी विशेषकर 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को अपने जाल में फंसाते हैं। आमजन विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को साइबर ठगी से बचाने के लिए डबल ओटीपी प्रणाली कारगार साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि हरियाणा पुलिस द्वारा अभेद्य ऐप के साथ डबल ओटीपी प्रणाली लागू की है। यह प्रणाली ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी घटनाओं में सुरक्षा प्रदान करती है। जब साइबर ठग वरिष्ठ नागरिक पर दबाव बनाता है, तो दूसरा ओटीपी परिजन के पास जाने से परिवार को तुरंत अलर्ट मिल जाता है और धोखाधड़ी रुक जाती है। उन्होंने बताया कि अभेद्य एप’ और डबल ओटीपी प्रणाली आमजन के लिए सुरक्षा, विश्वास और जागरूकता का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है तथा आमजन के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में उभरकर सामने आया है।
पीएसआई हरीश कुमार ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि कोई भी एजेंसी फोन पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। यदि मोबाइल पर डिजिटल अरेस्ट के नाम से कोई कॉल आए तो घबराएं नहीं, तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या www.cybercrime.gov.in पर संपर्क करें। वरिष्ठ नागरिक ‘अभेद्य’ ऐप का उपयोग करें तथा डबल ओटीपी के लिए अपने विश्वसनीय संपर्क को नामित करवाएं।
कैसे काम करती है डबल ओटीपी प्रणाली
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पहला ओटीपी वरिष्ठ नागरिक के मोबाइल पर आता है। दूसरा ओटीपी/पुष्टि कॉल उनके द्वारा नामित विश्वसनीय परिजन/मित्र के पास जाता है। लेन-देन तभी पूरा होगा जब दोनों स्तर पर सत्यापन हो जाए। इस तरह यह डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं को रोकने में सहायक है ।
