Category: International

आईएएस-एचसीएस की सफलता: प्रतिभा की परीक्षा या संसाधनों की ताकत?

– डॉ. सत्यवान सौरभ भारतीय समाज में आईएएस और एचसीएस जैसी प्रशासनिक सेवाओं में चयन को प्रतिभा, परिश्रम, अनुशासन और मेधा की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। इन सेवाओं…

वन्यजीव संरक्षण: प्रकृति के साथ भविष्य की सुरक्षा

– डॉ. प्रियंका सौरभ वन्यजीव किसी देश की प्राकृतिक संपदा भर नहीं होते, बल्कि वे उसके पारिस्थितिक तंत्र की जीवंत कड़ियाँ हैं। जंगल, घासभूमि, आर्द्रभूमि, नदियाँ और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र…

एससी/एसटी एक्ट 1989: सामाजिक न्याय और दुरुपयोग की बहस

— डॉ. सत्यवान सौरभ भारत में सामाजिक न्याय की बहस जितनी पुरानी है, उतनी ही संवेदनशील भी। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध भेदभाव, सामाजिक अपमान और हिंसा की…

शुल्क की आहट और यूपीआई का भविष्य

— डॉ. प्रियंका सौरभ अंततः अमेरिकी दबाव ने असर दिखाया—यह निष्कर्ष आकर्षक जरूर है, लेकिन 14 सितंबर की वित्त मंत्रालय की अधिसूचना को समझने के लिए थोड़ी सावधानी जरूरी है।…

ईओएस-05: भारत की आकाश में आंख

ईओएस-05 का प्रक्षेपण भारत द्वारा सतत पृथ्वी अवलोकन के क्षेत्र में उठाया गया पहला कदम है। – डॉ. प्रियंका सौरभ पृथ्वी अवलोकन उपग्रह अब शासन व्यवस्था, आपदा राहत, कृषि क्षेत्र,…

महिला खाप पंचायत: परंपरा और परिवर्तन का नया अध्याय

रामराय से उठी नई आवाज, सामाजिक बदलाव की अगुवाई करेंगी महिलाएं हरियाणा के जींद जिले के रामराय गांव में रविवार, 23 अगस्त 2026 को नौगामा खाप के ऐतिहासिक चबूतरे पर…

नीट से शुरू, राजनीति पर खत्म!

— डॉ. प्रियंका सौरभ लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यहाँ जनता को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है। यही अधिकार लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखता है।…

चेंजिंग रूम में हिडन कैमरे (तकनीक के दुरुपयोग पर कठोर रोक की ज़रूरत) 

– डॉ. प्रियंका सौरभ हर सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने नागरिकों की गरिमा, निजता और सुरक्षा को कितना महत्व देता है। विशेषकर महिलाओं…

न्याय के मंदिर की गरिमा और नागरिक मर्यादा

– डॉ. सत्यवान सौरभ भारतीय लोकतंत्र की संपूर्ण संरचना चार प्रमुख स्तंभों—विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया—पर आधारित है। इनमें न्यायपालिका वह संस्था है, जिसके समक्ष प्रत्येक नागरिक अंतिम उम्मीद…

जब कमाई रिश्तों से बड़ी हो जाए

– डॉ. प्रियंका सौरभ भारतीय समाज में परिवार केवल रक्त संबंधों का समूह नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग, साझेदारी और पारस्परिक उत्तरदायित्व की एक जीवंत संस्था रहा है। इस संस्था की…