पंचकूला। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े बैंक खातों में 590 करोड़ के घोटाले में हरियाणा सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। विकास एवं पंचायत विभाग के सुपरिंटेंडेंट नरेश भुवानी को बर्खास्त कर दिया है। नरेश पर सरकारी फंड की हेराफेरी, फर्जी बैंक खातों के जरिए पैसे के ट्रांसफर और निजी संपत्ति बनाने के आरोप हैं।

विकास एवं पंचायत विभाग ने 11 फरवरी को जांच समिति गठित की गई थी। इस समिति ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में संचालित खातों की जांच की, जिसमें कई गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आईं।

जांच में खुलासा हुआ कि नरेश कुमार ने अन्य आरोपितों और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर “स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स” नाम की एक फर्जी कंपनी बनाई थी। इस कंपनी का इस्तेमाल सरकारी धन को अवैध तरीके से ट्रांसफर करने के लिए किया गया। कंपनी के खातों से करोड़ों रुपये विभिन्न खातों में भेजे गए।
जांच एजेंसियों के अनुसार, नरेश कुमार ने अपने व्यक्तिगत बैंक खातों और अपनी बेटी के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई। इन पैसों का उपयोग उन्होंने निजी संपत्ति खरीदने में किया, जिसमें एक लग्जरी वाहन और मोहाली में मकान शामिल है।

रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें अलग-अलग तारीखों पर कुल करीब 6.45 करोड़ रुपये बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए मिले, जबकि कई बार नकद राशि भी ली गई। इसके अलावा आरोप है कि उन्हें जनवरी में एक फॉर्च्यूनर कार भी रिश्वत के रूप में दी गई।

जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खोले गए और सरकारी धन को वैध दिखाने के लिए कई परतों में लेन-देन किया गया। नरेश कुमार को 6 अप्रैल को मोहाली स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के दौरान उन्होंने बैंक खातों के संचालन और लेन-देन की जानकारी होने की बात स्वीकार की।

जांच में यह भी सामने आया कि वह इस पूरे नेटवर्क में अहम कड़ी के रूप में काम कर रहे थे और बैंक अधिकारियों व अन्य आरोपितों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दे रहे थे।

सरकार का मानना है कि इस मामले में नियमित विभागीय जांच कर पाना संभव नहीं है, क्योंकि भुवानी के अन्य आरोपितों और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। साथ ही, डिजिटल और दस्तावेजी सबूतों के साथ छेड़छाड़ की भी संभावना जताई गई है। फिलहाल मामला सीबीआई को सौंप दिया गया है और जांच जारी है।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए नरेश कुमार को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया है। यह बर्खास्तगी भविष्य में सरकारी नौकरी के लिए भी अयोग्यता मानी जाएगी।

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