Category: National

शुल्क की आहट और यूपीआई का भविष्य

— डॉ. प्रियंका सौरभ अंततः अमेरिकी दबाव ने असर दिखाया—यह निष्कर्ष आकर्षक जरूर है, लेकिन 14 सितंबर की वित्त मंत्रालय की अधिसूचना को समझने के लिए थोड़ी सावधानी जरूरी है।…

ग्यारह मौतें, ग्यारह सवाल: आखिर जागता कब है शासन?

[नकली बोतल, असली मौत और सोया हुआ सिस्टम] [जहर बेचने वाले ही दोषी नहीं, रोकने वाले भी सवालों में] मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब ने अब तक ग्यारह जिंदगियां निगल लीं।…

ईओएस-05: भारत की आकाश में आंख

ईओएस-05 का प्रक्षेपण भारत द्वारा सतत पृथ्वी अवलोकन के क्षेत्र में उठाया गया पहला कदम है। – डॉ. प्रियंका सौरभ पृथ्वी अवलोकन उपग्रह अब शासन व्यवस्था, आपदा राहत, कृषि क्षेत्र,…

शिक्षक : भविष्य की दिशा और शिक्षा का नया स्वरूप 

( शिक्षक दिवस विशेष ) तकनीक के युग में शिक्षक : ज्ञान ही नहीं, जीवन-दृष्टि के भी निर्माता  डॉ. सत्यवान सौरभ शिक्षा का स्वरूप आज जिस तीव्र गति से बदल…

शहरी बाढ़: बारिश का संकट या नियोजन की विफलता?

– डॉ. प्रियंका सौरभ भारत के शहर हर मानसून में एक ही कहानी दोहराते दिखाई देते हैं—कुछ घंटों की तेज बारिश, सड़कों पर जमा पानी, जाम में फँसी गाड़ियाँ, डूबते…

सरकारी स्कूल सोशल मीडिया के लिए मंच नहीं हैं।

जवाबदेही के लिए अधिकार की आवश्यकता होती है, सिर्फ कैमरे की नहीं। — डॉ. सत्यवान सौरभ आजकल सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का नज़रिया एक चलन बनता जा रहा है,…

महिला खाप पंचायत: परंपरा और परिवर्तन का नया अध्याय

रामराय से उठी नई आवाज, सामाजिक बदलाव की अगुवाई करेंगी महिलाएं हरियाणा के जींद जिले के रामराय गांव में रविवार, 23 अगस्त 2026 को नौगामा खाप के ऐतिहासिक चबूतरे पर…

मानसून का कहर या शासन का कुप्रबंधन?

भारत में मानसून केवल एक मौसम नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और कृषि की जीवन रेखा है। जुलाई के मौजूदा हालात पर नजर डालें, तो यह जीवन रेखा आम नागरिक…

नीट से शुरू, राजनीति पर खत्म!

— डॉ. प्रियंका सौरभ लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यहाँ जनता को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है। यही अधिकार लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखता है।…