Category: National

नीट से शुरू, राजनीति पर खत्म!

— डॉ. प्रियंका सौरभ लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यहाँ जनता को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है। यही अधिकार लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखता है।…

चेंजिंग रूम में हिडन कैमरे (तकनीक के दुरुपयोग पर कठोर रोक की ज़रूरत) 

– डॉ. प्रियंका सौरभ हर सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने नागरिकों की गरिमा, निजता और सुरक्षा को कितना महत्व देता है। विशेषकर महिलाओं…

न्याय के मंदिर की गरिमा और नागरिक मर्यादा

– डॉ. सत्यवान सौरभ भारतीय लोकतंत्र की संपूर्ण संरचना चार प्रमुख स्तंभों—विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया—पर आधारित है। इनमें न्यायपालिका वह संस्था है, जिसके समक्ष प्रत्येक नागरिक अंतिम उम्मीद…

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में भारत का पहला एआई  एनाबलिड़ प्लेसमेंट  प्लेटफॉर्म और  जॉब फेयर 2026 हुआ लॉन्च

उच्च शिक्षा संस्थानों में रोजगारोन्मुखी नवाचार का नया मॉडल बनेगा केयू का एआई जॉब फेयरः प्रो. सोमनाथ सचदेवा कुरुक्षेत्र, 9 जुलाई।  कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूआईईटी के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल…

जब कमाई रिश्तों से बड़ी हो जाए

– डॉ. प्रियंका सौरभ भारतीय समाज में परिवार केवल रक्त संबंधों का समूह नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग, साझेदारी और पारस्परिक उत्तरदायित्व की एक जीवंत संस्था रहा है। इस संस्था की…

रेवाड़ी के बावल स्थित कृषि महाविद्यालय में खेती बचाओ कार्यक्रम का समापन। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिरकत की। कई करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण कर कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

एंकर :: रेवाड़ी जिले के बावल कस्बे में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के हितों को…

पानी की लड़ाई में क्यों घुला जातिवाद?

पानी की मांग जायज़ है, लेकिन किसी अधिकारी का मूल्यांकन उसकी जाति से नहीं, उसके कार्यों से होना चाहिए – डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा के हांसी क्षेत्र के चैनत गाँव…

आयुष विश्वविद्यालय में पंचकर्म उपचार से व्हीलचेयर छोड़ पैरों पर खड़ा हुआ अंबाला का सतपाल    

-न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम के  कारण चप्पल तक नहीं पहन सकता था, दूसरों पर हो गया था निर्भर    कुरुक्षेत्र। असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण जिंदगी नर्क जैसी हो गई थी। हालात…

कोचिंग संस्कृति के चौराहे पर शिक्षा

(शिक्षा नहीं, ब्रांड बिक रहे हैं।) – डॉ. प्रियंका सौरभ भारत में शिक्षा को सदियों से ज्ञान, संस्कार और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम माना गया है। शिक्षक को समाज में…

संपत्ति की भूख और बिखरते रिश्ते (परिवार, लालच और बदलते समाज की त्रासदी)

– डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा की धरती को लंबे समय तक पारिवारिक प्रेम, भाईचारे और संयुक्त परिवारों की संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है। गांवों की चौपालों में रिश्तों…