परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरतः प्रो. राजेन्द्र कुमार अनायत
शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक नहीं, चरित्रवान एवं सक्षम विद्यार्थी तैयार करनाः प्रो. विजय कुमार
केयू में जन परीक्षा संवाद आयोजित
परीक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण, पारदर्शी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर हुआ मंथन
कुरुक्षेत्र, 18 सितंबर।  
परीक्षा केवल विद्यार्थियों को पास या फेल करने की प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह पता लगाने का माध्यम होनी चाहिए कि विद्यार्थी ने वास्तव में कितना सीखा और निर्धारित लर्निंग आउटकम्स को किस स्तर तक प्राप्त किया है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल परीक्षा के अंतिम परिणाम पर ध्यान देने के बजाय पूरी प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है। यह उद्गार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी, परीक्षा शाखा एवं भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को सीनेट हॉल में जन परीक्षा संवाद विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए। इससे पहले वंदेमातरम, भारतीय शिक्षण मंडल के ध्येय श्लोक तथा दीप प्रज्जवल के साथ कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला में परीक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण, पारदर्शी, विश्वसनीय, समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।  आईक्यूएसी सेल के निदेशक प्रो. तेजेन्द्र शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत को आगे ले जाने का मार्ग शिक्षा और शिक्षण व्यवस्था से होकर गुजरता है।
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने एसेसमेंट और एवोल्यूशन के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि एवोल्यूशन मुख्य रूप से निर्णय देने की प्रक्रिया है, जबकि एसेसमेंट एक निरंतर और सुधारात्मक प्रक्रिया है।  उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में वर्तमान में लगभग 30 प्रतिशत आंतरिक और 70 प्रतिशत बाहरी मूल्यांकन की व्यवस्था है तथा इसे धीरे-धीरे 50-50 के अनुपात की ओर ले जाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाहरी परीक्षा अधिकतर निर्णयात्मक होती है, जबकि आंतरिक मूल्यांकन को अधिक सुधारात्मक और सीखने की प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सीबीसीएस और आउटकम बेस्ड एजुकेशन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं। प्रत्येक पाठ्यक्रम के कोर्स आउटकम और कोर्स लर्निंग आउटकम्स निर्धारित किए जाते हैं, लेकिन वास्तविक चुनौती यह है कि प्रश्नपत्र के माध्यम से इन व्नजबवउमे का सही आकलन हो। प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने ब्लूम टैक्सानामी का उल्लेख करते हुए कहा कि सीखने के विभिन्न स्तरों में रिमेम्बर, अंडरस्टेंड, एनालायज, एवेल्यूएट और क्रिएट जैसी क्षमताएं शामिल हैं। प्रश्नपत्र निर्माण इन्हीं स्तरों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। परीक्षा सुरक्षा और जवाबदेही पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में एकेडमिक आडिट की व्यवस्था तो होती है, लेकिन परीक्षा शाखा की पूरी प्रक्रिया का नियमित प्रोसेस आडिट भी होना चाहिए। उन्होंने पुराने परीक्षा मामलों का उदाहरण देते हुए बताया कि कई वर्ष बाद किसी अनियमितता की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है। संबंधित अधिकारी या कर्मचारी उपलब्ध नहीं होते और यह पता लगाना भी कठिन हो जाता है कि किसी विशेष समय पर कौन व्यक्ति किस जिम्मेदारी पर था। प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि परीक्षा सुधार सरकार, विश्वविद्यालय, शिक्षक, परीक्षा अधिकारियों और विद्यार्थियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रक्रिया, तकनीक, प्रशिक्षण, सुरक्षा और जवाबदेही में समन्वित सुधार से अधिक प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित परीक्षा व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि देश में उच्च शिक्षा के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षाएं केवल विद्यार्थियों के भविष्य का निर्धारण करने वाली परीक्षाएं नहीं हैं, बल्कि इनकी विश्वसनीयता और पारदर्शिता का सीधा संबंध देश की शैक्षिक व्यवस्था, सामाजिक गतिशीलता और मानव संसाधन की गुणवत्ता से है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की सेंध पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है।
प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि आज देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का एक बड़ा हिस्सा कोचिंग संस्कृति के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है। कोटा की कोचिंग व्यवस्था इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए वर्षों तक कठिन प्रतिस्पर्धा की तैयारी करते हैं। ऐसे में यह विचार करना आवश्यक है कि वर्तमान परीक्षा प्रणाली विद्यार्थियों और देश की शिक्षा व्यवस्था को किस दिशा में ले जा रही है। उन्होंने कहा कि चर्चा का केंद्र केवल विश्वविद्यालयों की सामान्य परीक्षाएं नहीं हैं, बल्कि वे प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं हैं, जो भारतीय विद्यार्थियों के भविष्य और उच्च शिक्षण संस्थानों में उनके प्रवेश का मार्ग तय करती हैं। इस संदर्भ में दुनिया के अन्य देशों की परीक्षा प्रणालियों का अध्ययन भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने चीन और दक्षिण कोरिया की प्रवेश परीक्षा व्यवस्थाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि दोनों देशों ने विद्यालयी शिक्षा के साथ-साथ विश्वविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया को भी अत्यंत गंभीरता से विकसित किया है। प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि वास्तविक प्रतिस्पर्धा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों (ट्रिपल आईटी) तथा अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश को लेकर है। आईआईटीं, एनआईटीं और ट्रिपल आईटी में सीमित सीटें उपलब्ध हैं। ऐसे में लाखों विद्यार्थियों के बीच सीमित संख्या में प्रतिष्ठित सीटों के लिए होने वाली प्रतिस्पर्धा परीक्षा व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव पैदा करती है। उन्होंने कहा कि देश में प्रवेश परीक्षाओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली को केवल प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह एक व्यापक राष्ट्रीय व्यवस्था है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को उनके परिश्रम और योग्यता के आधार पर अवसर उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखने की आवश्यकता है। यदि परीक्षा प्रक्रिया विश्वसनीय होगी तो विद्यार्थियों का विश्वास मजबूत होगा और उच्च शिक्षा में अवसरों का वितरण भी अधिक पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।

विशिष्ट अतिथि चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी, सिरसा तथा गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी हिसार के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा, अंक और प्रमाणपत्र प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्रवान, सक्षम, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना होना चाहिए। विद्यार्थियों पर बढ़ते परीक्षा एवं अंकों के दबाव के मूल कारणों पर गंभीरता से विचार करते हुए शिक्षा व्यवस्था में मानवीय मूल्यों, कौशल और चरित्र निर्माण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
प्रो. विजय कुमार ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए फाइव-सी करेक्टर (चरित्र), क्रिएटिविटी (रचनात्मकता), कम्पीटेंस (क्षमता), कम्पेशन (करुणा) और कानशियसनेस (चेतना) पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, नए विचार रखने और स्वतंत्र चिंतन के अवसर मिलने चाहिए। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ संवेदनशीलता और कर्तव्यबोध भी विकसित करे। उन्होंने शिक्षकों से कक्षा को केवल पाठ्यक्रम पूरा करने का माध्यम न बनाकर ऐसा सीखने का अनुभव देने का आह्वान किया, जिससे विद्यार्थी उत्साहपूर्वक कक्षा में आएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। अंक और प्रमाणपत्र शिक्षा के साधन हैं, अंतिम लक्ष्य नहीं; अंतिम लक्ष्य चरित्रवान, रचनात्मक, सक्षम, संवेदनशील और जिम्मेदार विद्यार्थी तैयार करना है।
भारतीय शिक्षण मंडल के क्षेत्रीय मंत्री गणपति तेती ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से भारत को महान और विकसित राष्ट्र बनाना है। शिक्षा व्यवस्था में भारतीयता की पुनर्स्थापना, भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम एवं परीक्षा प्रणाली से जोड़ना तथा विद्यार्थियों की अंतर्निहित क्षमताओं को सामने लाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को लेकर भारतीय शिक्षण मंडल लंबे समय से कार्य कर रहा है। मंच का संचालन डॉ. निधि माथुर ने किया। परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम समय पर उपलब्ध कराना, मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा पुनर्मूल्यांकन एवं अपील की व्यवस्था को स्पष्ट और निष्पक्ष बनाना आवश्यक है।
इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. शिवालिक यादव, डॉ. कृष्ण कांत, डॉ. विजय कुमार, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. कृष्णा देवी, प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, प्राचार्या प्रो. रीटा, प्रो. अनिता दुआ, प्रो. सिद्धार्थ भारद्वाज, डॉ. दीप्ति ग्रोवर, प्रो. महावीर रंगा, प्रो. जीपी दुबे, डॉ. हुकम सिंह, डॉ. यशपाल सिंगला, प्रो. कुलदीप सिंह, डॉ. राजन शर्मा, डॉ. प्रिया शर्मा, डॉ. निधि बगरिया, डॉ. महेश कुमार, सहित डीन, निदेशक, शिक्षक, विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्या, शोधार्थी व विद्यार्थी मौजूद रहे।
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जन परीक्षा संवाद में पांच विषयगत सत्रों में हुआ गहन मंथन

जन परीक्षा संवाद के दौरान परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के लिए गठित पांच विषयगत समूहों में गहन मंथन हुआ। मूल्यांकन एवं परीक्षा’, विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली एवं परीक्षा बोर्ड, प्रौद्योगिकी एवं भविष्य की परीक्षा प्रणाली, समावेशी परीक्षा तथा परीक्षा कल्याण एवं विद्यार्थी अनुभव विषयों पर विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने विचार-विमर्श किया। विभिन्न सत्रों में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय, तकनीक-सक्षम, समावेशी, विद्यार्थी-केंद्रित एवं सुगम बनाने के उपायों पर चर्चा की गई।

कुवि कुलगुरु ने किया आइडिया आफ भारत पुस्तक का विमोचन
कुरुक्षेत्र, 18 सितम्बर।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने शुक्रवार को आइडिया ऑफ भारत पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक की लेखिका विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की प्रोफेसर डॉ. कुसुम लता तथा सह-लेखिका शोधार्थी सुमन देवी हैं। यह पुस्तक बी.ए. पार्ट-1, प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप तैयार की गई है।
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि भारत की पहचान केवल एक भौगोलिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से विकसित समृद्ध ज्ञान, संस्कृति, परंपरा और चिंतन की विरासत के रूप में है। विद्यार्थियों को इस विरासत से परिचित कराना वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ‘आइडिया ऑफ भारत’ विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा को व्यापक दृष्टिकोण से समझने में सहायक होगी। उन्होंने पुस्तक की लेखिका डॉ. कुसुम लता एवं सह-लेखिका सुमन देवी को इस अकादमिक प्रयास के लिए शुभकामनाएं दीं।
पुस्तक की लेखिका प्रो. कुसुम लता ने बताया कि पुस्तक में भारतीय समय एवं अंतरिक्ष की अवधारणा, प्राचीन भारतीय साहित्य एवं शिक्षा व्यवस्था, धर्म-दर्शन, कला एवं संस्कृति, ‘वसुधैव कुटुम्बकम, शासन एवं ग्राम स्वराज, विज्ञान, पर्यावरण, स्वास्थ्य चेतना, आयुर्वेद, योग, अर्थव्यवस्था, कृषि, उद्योग, व्यापार एवं समुद्री वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही प्राचीन भारत के राजनीतिक स्वरूप, कला-केंद्रों, जनपदों और समुद्री व्यापार से संबंधित मानचित्रों को भी पुस्तक में स्थान दिया गया है। पुस्तक का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतवर्ष की अवधारणा तथा उसकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप रेखाओं से परिचित कराने के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जिज्ञासा विकसित करना है।
इस अवसर पर डीन ऑफ कालेजिज प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रो. पूनम कुमारी, प्रो. अनिता दुआ, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, प्रो. अनुपमा चौहान मौजूद थे।

खेल विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यमः प्रो. दिनेश कुमार राणा
महिला वॉलीबॉल इंटर कॉलेज चैम्पियनशिप में आर्य पीजी कॉलेज पानीपत बना चैम्पियन
गवर्नमेंट कॉलेज पंचकूला को हराकर जीता खिताब, डीएवी महिला कॉलेज करनाल रहा तीसरे स्थान पर
कुरुक्षेत्र, 18 सितंबर।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित महिला वॉलीबॉल इंटर कॉलेज चैंपियनशिप का सफलतापूर्वक समापन हुआ। रोमांचक एवं कांटे के मुकाबलों के बाद आर्य पीजी कॉलेज, पानीपत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गवर्नमेंट कॉलेज, पंचकूला को पराजित कर चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया।
प्रतियोगिता में गवर्नमेंट कॉलेज, पंचकूला ने दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि डीएवी महिला कॉलेज, करनाल तीसरे तथा बीएआर जनता कॉलेज, कौल चौथे स्थान पर रहा।
इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के खेल निदेशक प्रो. दिनेश राणा ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल केवल जीत और हार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को विश्वविद्यालय की खेल गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से विश्वविद्यालय एवं प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।
प्रो. दिनेश राणा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ खेलों के क्षेत्र में भी बेहतर अवसर एवं सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। नियमित खेल गतिविधियों से विद्यार्थियों की शारीरिक दक्षता के साथ-साथ मानसिक मजबूती और सकारात्मक सोच का भी विकास होता है।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन तथा कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल के कुशल प्रबंधन में विश्वविद्यालय में खेल गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि प्रतिभावान खिलाड़ियों को उचित मंच उपलब्ध करवाकर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए आवश्यक वातावरण प्रदान किया जाए।
प्रतियोगिता के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग कोच राजेश कुमार राजौंद, कबड्डी कोच संदीप, कुश्ती कोच रमेश कुमार, हॉकी कोच मोनिका, प्रतियोगिता आयोजक एवं वॉलीबॉल कोच राजेश कुमार तथा सहायक स्टाफ सदस्य प्रदीप बनवाला सहित अन्य अधिकारी एवं खेल प्रशिक्षक उपस्थित रहे।

केयू एसएम के विद्यार्थियों ने याकुल्ट डैनोन इंडिया का किया औद्योगिक भ्रमण
कुरुक्षेत्र, 18 सितंबर।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (यूएसएम) के प्रशिक्षण, इंटर्नशिप एवं प्लेसमेंट (टीआईपी) प्रकोष्ठ द्वारा विद्यार्थियों के लिए याकुल्ट डैनोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सोनीपत का औद्योगिक भ्रमण आयोजित किया गया। भ्रमण में 94 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
यूएसएम के चेयरपर्सन प्रो. अनिल मित्तल ने कहा कि ऐसे औद्योगिक भ्रमण विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हैं और उन्हें उद्योग की कार्यप्रणाली तथा अपेक्षाओं से परिचित कराते हैं।
विद्यार्थियों ने विनिर्माण एवं उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, भंडारण, आपूर्ति शृंखला तथा वितरण व्यवस्था की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। उन्होंने उत्पादन के विभिन्न चरणों का अवलोकन करते हुए स्वच्छता, गुणवत्ता मानकों और परिचालन दक्षता के महत्व को समझा। इस दौरान कक्षा में पढ़ाए गए उत्पादन प्रबंधन, परिचालन प्रबंधन, गुणवत्ता प्रबंधन एवं आपूर्ति शृंखला प्रबंधन जैसे विषयों को वास्तविक औद्योगिक परिवेश से जोड़ने का अवसर मिला।
भ्रमण का समन्वय डॉ. विवेक कुमार, समन्वयक, टीआईपी प्रकोष्ठ ने किया। इस अवसर पर डॉ. उत्कर्ष मंगल, मनीषा एवं श्रुति भी उपस्थित रहे।

पुस्तकालय की सेवाओं का अधिकतम लाभ उठाएं नवविद्यार्थीः डॉ. चेतन शर्मा
केयू पुस्तकालय में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम
कुरुक्षेत्र, 18 सितंबर।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में जवाहरलाल नेहरू पुस्तकालय द्वारा सावित्रीबाई फुले ब्लॉक में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए पांच दिवसीय अभिविन्यास कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम 18 से 25 सितंबर तक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चलेगा।
पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. चेतन शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकालय में उपलब्ध प्रिंट एवं ई-संसाधनों, ऑनलाइन डेटाबेस, पुस्तकों की खोज एवं निर्गमन प्रक्रिया, डिजिटल पुस्तकालय, अध्ययन कक्ष तथा शोध सहायता सुविधाओं से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से नवविद्यार्थी पुस्तकालय की सेवाओं एवं संसाधनों का अपनी शैक्षणिक यात्रा में अधिकतम उपयोग कर सकेंगे।
कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षण विभागों के विद्यार्थियों को पुस्तकालय की कार्यप्रणाली, संसाधनों एवं सेवाओं की जानकारी दी गई। इस अवसर पर सुखराज सिंह, तकनीकी सहायक तथा डॉ. अनिल कुमार सहित पुस्तकालय कर्मचारी उपस्थित रहे।

शोध नैतिकता, अकादमिक सत्यनिष्ठा और भारतीय ज्ञान प्रणाली पर हुआ मंथन
अभिमुखीकरण कार्यक्रम का आठवाँ एवं अंतिम दिन सम्पन्न
कुरुक्षेत्र, 18 सितंबर।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा आचार्य रघुवीर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबाला कैंट के सहयोग से आयोजित 37वें आठ दिवसीय ऑनलाइन एनईपी अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का आठवाँ एवं अंतिम दिन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
प्रथम सत्र में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जोगिंदर सकलानी ने शोध नैतिकता, अकादमिक सत्यनिष्ठा, प्लेज़रिज्म, संदर्भ एवं उद्धरण, प्रकाशन नैतिकता तथा शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग पर प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में लंगट सिंह कॉलेज, मुजफ्फरपुर के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव कुमार झा ने ’भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा, तक्षशिला, नालंदा एवं विक्रमशिला जैसे प्राचीन ज्ञान केंद्रों तथा वर्तमान उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न सत्रों, संवादात्मक चर्चाओं एवं प्रश्नोत्तर गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की। शोध नैतिकता, एनईपी और भारतीय ज्ञान प्रणाली पर केंद्रित अंतिम दिवस के सत्रों के साथ आठ दिवसीय कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।

टैको बेल में केयू के टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट के 14 विद्यार्थियों का चयन
कुरुक्षेत्र, 18 सितंबर।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट विभाग के 14 विद्यार्थियों का चयन प्रतिष्ठित हॉस्पिटैलिटी एवं क्विक सर्विस रेस्टोरेंट कंपनी टैको बेल में हुआ है। यह चयन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, ज्योतिसर, कुरुक्षेत्र में आयोजित प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से हुआ।
विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहिंदर चंद ने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत तथा विभाग द्वारा प्रदान किए जा रहे इंडस्ट्री-ओरिएंटेड प्रशिक्षण का परिणाम है।
चयनित विद्यार्थियों में अंशिका, सुरभि, वैभव, शुभम, विवेक सहित अन्य विद्यार्थी शामिल हैं। विद्यार्थियों ने चयन प्रक्रिया के दौरान अपनी शैक्षणिक योग्यता, संचार कौशल, हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री से संबंधित ज्ञान एवं व्यावसायिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
चयन प्रक्रिया में विद्यार्थियों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता, हॉस्पिटैलिटी ज्ञान, संचार कौशल एवं व्यावसायिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया। विभाग विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंडस्ट्री एक्सपोजर एवं प्लेसमेंट की तैयारी भी कराता है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

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