सीबीआई की सीमाएं और सवाल
(जब जांच एजेंसी बन जाए राजनीति का केंद्र बिंदु) -डॉ. प्रियंका सौरभ भारत के संघीय ढांचे में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का राज्य क्षेत्राधिकार एक ऐसा संवेदनशील और बहुपरतीय मुद्दा…
(जब जांच एजेंसी बन जाए राजनीति का केंद्र बिंदु) -डॉ. प्रियंका सौरभ भारत के संघीय ढांचे में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का राज्य क्षेत्राधिकार एक ऐसा संवेदनशील और बहुपरतीय मुद्दा…
(किताबों के नाम पर कमीशन—शिक्षा या व्यापार?) — डॉ. सत्यवान सौरभ शिक्षा को सदैव समाज की आत्मा, विकास का आधार और समान अवसरों का सेतु माना गया है। यह केवल…
पढ़ी-लिखी और स्वतंत्र होने के बावजूद कई महिलाएं शोषण का शिकार हो रही हैं। इस विचारधारा के अनुसार इसका एक कारण उनकी भावनात्मक प्रवृत्ति मानी जाती है, जिसका कुछ लोग…
(एक दशक में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद, प्राइवेट 51 हजार खुले़, स्कूल जाने योग्य हर पांचवां बच्चा स्कूल से बाहर) — डॉ. सत्यवान सौरभ भारत की शिक्षा व्यवस्था आज…
(सम्मान की आड़ में बढ़ता दिखावा, और संघर्षरत प्रतिभाओं की अनदेखी—क्या ये समारोह प्रेरणा हैं या केवल प्रभाव दिखाने का मंच?) — डॉ. सत्यवान सौरभ देशभर में IAS और IPS…
सोशल मीडिया पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने अबरार अहमद के पुराने पोस्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि उन्होंने भारत से जुड़े सैन्य घटनाक्रमों पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं। इसके…
(जब शिक्षक ही असमंजस और भय के माहौल में होंगे, तो शिक्षा व्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।) – डॉ. सत्यवान सौरभ हाल के दिनों में विद्यालय में…
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज व राजस्थान की विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने किया 2 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का गीता पूजन के साथ शुभारंभ,गीता सद्भावना यात्रा का किया आयोजन…
(बदलती जीवनशैली, पोषण पैटर्न और सामाजिक व्यवहार के संदर्भ में कारणों का विश्लेषण तथा समाज पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव) डॉ. सत्यवान सौरभ भारत लंबे समय तक कुपोषण और अल्पपोषण की…
(मानव गरिमा और न्याय का संतुलन) – डॉ. सत्यवान सौरभ भारत की न्याय व्यवस्था केवल कानून की व्याख्या करने वाली संस्था भर नहीं है, बल्कि वह समाज के नैतिक मूल्यों…