Category: National

ससुराल से दूरी और पति पर पकड़ क्यों? (विवाह में सियासत बंद करो, साझेदारी का समय आ गया) 

– डॉ. प्रियंका सौरभ शादी कोई सत्ता-संघर्ष नहीं, बल्कि दो व्यक्तियों के बीच भरोसे, सम्मान और जिम्मेदारी का रिश्ता है। लेकिन हमारे समाज में कई बार विवाह को साझेदारी के…

ममता का किला ढहा, भगवा लहर का उदय – बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, राजनीतिक मायने और विपक्ष का संकट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी ने 165+ सीटें जीतकर TMC के 15 वर्षीय शासन को उखाड़ फेंका। एंटी-इनकंबेंसी, घुसपैठ, भ्रष्टाचार और CAA ने मातुआ वोट एकजुट किया। ममता…

बारात, संस्कार और बदलता समाज

— डॉ. प्रियंका सौरभ एक समय था जब बारात का आना केवल एक परिवार का दूसरे परिवार तक पहुँचना नहीं, बल्कि पूरे गाँव का उत्सव माना जाता था। घर-आँगन सजते…

उबलती धरती, डगमगाती थाली, संकट में किसान

हीटवेव की मार से हरियाणा–पंजाब की खेती और किसानों की आय दोनों संकट में — डॉ. सत्यवान सौरभ जलवायु परिवर्तन के इस निर्णायक दौर में चरम गर्मी अब केवल एक…

उच्च शिक्षा में ‘मार्केट फॉर लेमन्स’

-डॉ. प्रियंका सौरभ भारत में उच्च शिक्षा का तीव्र विस्तार अवसरों के साथ-साथ गंभीर चुनौतियाँ भी लेकर आया है। एक ओर विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और निजी शिक्षण संस्थानों की संख्या तेजी…

वॉशिंगटन हिल्टन: इतिहास की पुनरावृत्ति या अमेरिकी लोकतंत्र की कमजोरी?

— डॉ. प्रियंका सौरभ वॉशिंगटन के प्रतिष्ठित वॉशिंगटन हिल्टन में शनिवार रात हुई गोलीबारी ने पूरी दुनिया को एक बार फिर चौंका दिया। यह केवल एक सुरक्षा संबंधी घटना नहीं…

त्योहारों पर ‘कल्चरल अटैक’ ( परंपरा, बाज़ार और बदलती पहचान) 

-डॉ. प्रियंका सौरभ भारत की सांस्कृतिक संरचना में त्योहारों का स्थान केवल आनंद और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज की ऐतिहासिक स्मृति, आर्थिक संरचना, प्रकृति के साथ…

नारी शक्ति या सत्ता का नया मुखौटा?  (आरक्षण, नैतिकता और राजनीति का असली सवाल) 

– डॉ. प्रियंका सौरभ देश में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ, तो इसे “ऐतिहासिक” बताया गया, संसद में तालियां बजीं और महिला सशक्तिकरण के नए युग की घोषणा…

झोली वाले बाबाओं से सावधानी ज़रूरी

आस्था के नाम पर फैलते छल से बचकर ही सुरक्षित रहेगी किसान की मेहनत – डॉ. सत्यवान सौरभ उत्तर भारत के गाँवों में गेहूँ की कटाई केवल एक मौसम नहीं,…

रील, व्लॉग और बकवास (बकवास की ब्रॉडकास्ट में दिशाहीन होती युवा पीढ़ी)

— डॉ. प्रियंका सौरभ आज के समय में अगर कोई सबसे तेज़ी से फैलने वाली चीज़ है, तो वह है—“बकवास”। फर्क बस इतना है कि अब यह बकवास चाय की…