Category: National

हम पहुँच वाले लोग हैं, हमारा दुख भी वीआईपी है

(हर भावना का प्रदर्शन, हर रिश्ते का प्रचार, और हर मौके का राजनीतिक/सामाजिक इस्तेमाल।) — डॉ. सत्यवान सौरभ मकान का मुहूर्त हो या दुकान का उद्घाटन, शादी-ब्याह की खुशियाँ हों…

इलाज या कारोबार? सफेद कोट के पीछे का सच

(डॉक्टर की चुप्पी टूटी तो सामने आया सिस्टम का काला चेहरा) — डॉ. सत्यवान सौरभ हाल ही में सामने आई एक युवा डॉक्टर की कहानी ने पूरे समाज को झकझोर…

बुढ़ापे की जकड़न नहीं है पार्किंसंस : डॉ.ममगाईं

कहा: मोहम्मद अली पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश इससे रहे हैं पीड़ित,सही इलाज से मुमकिन है सामान्य जीवन कुरुक्षेत्र, 10 अप्रैल।    अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति जॉर्ज एच.डब्लयू बुश, कैथोलिक चर्च के पोप…

आस्था का बाज़ारीकरण: वीआईपी दर्शन और आम श्रद्धालु की उपेक्षा पर एक गंभीर सवाल

(वीआईपी दर्शन के बढ़ते चलन में आम श्रद्धालु कहाँ खड़ा है?) – डॉ. सत्यवान सौरभ भारत जैसे देश में, जहाँ धर्म और आस्था केवल व्यक्तिगत विश्वास का विषय नहीं बल्कि…

झोपड़ी पर बुलडोज़र, लेकिन मॉल पर खामोशी क्यों?

(सड़क पर ठेला हटता है, लेकिन शोरूम का सामान क्यों नहीं?कार्रवाई वहीं तेज़, जहाँ विरोध की आवाज़ कमजोर हो। फुटपाथ वाले अपराधी, लेकिन पार्किंग निगलते कॉम्प्लेक्स बेदाग़।) डॉ. सत्यवान सौरभ…

हरियाणा के विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार का काला सच

(चार प्रमुख विश्वविद्यालयों में वित्तीय घोटाले, भर्ती अनियमितताएं और सत्ता के दुरुपयोग ने शिक्षा व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल) – डॉ. सत्यवान सौरभ हरियाणा के उच्च शिक्षा क्षेत्र में…

सीबीआई की सीमाएं और सवाल

(जब जांच एजेंसी बन जाए राजनीति का केंद्र बिंदु) -डॉ. प्रियंका सौरभ भारत के संघीय ढांचे में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का राज्य क्षेत्राधिकार एक ऐसा संवेदनशील और बहुपरतीय मुद्दा…

 कमीशन लेकर किताबें बेच रहे प्राइवेट स्कूल

(किताबों के नाम पर कमीशन—शिक्षा या व्यापार?) — डॉ. सत्यवान सौरभ शिक्षा को सदैव समाज की आत्मा, विकास का आधार और समान अवसरों का सेतु माना गया है। यह केवल…

(शोषण या स्वेच्छा) महिलाओं की सुरक्षा का असली रास्ता क्या है?

पढ़ी-लिखी और स्वतंत्र होने के बावजूद कई महिलाएं शोषण का शिकार हो रही हैं। इस विचारधारा के अनुसार इसका एक कारण उनकी भावनात्मक प्रवृत्ति मानी जाती है, जिसका कुछ लोग…

निजीकरण का बोलबाला: सरकारी स्कूलों पर गहराता संकट

(एक दशक में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद, प्राइवेट 51 हजार खुले़, स्कूल जाने योग्य हर पांचवां बच्चा स्कूल से बाहर) — डॉ. सत्यवान सौरभ भारत की शिक्षा व्यवस्था आज…