बारात, संस्कार और बदलता समाज
— डॉ. प्रियंका सौरभ एक समय था जब बारात का आना केवल एक परिवार का दूसरे परिवार तक पहुँचना नहीं, बल्कि पूरे गाँव का उत्सव माना जाता था। घर-आँगन सजते…
— डॉ. प्रियंका सौरभ एक समय था जब बारात का आना केवल एक परिवार का दूसरे परिवार तक पहुँचना नहीं, बल्कि पूरे गाँव का उत्सव माना जाता था। घर-आँगन सजते…
हीटवेव की मार से हरियाणा–पंजाब की खेती और किसानों की आय दोनों संकट में — डॉ. सत्यवान सौरभ जलवायु परिवर्तन के इस निर्णायक दौर में चरम गर्मी अब केवल एक…
-डॉ. प्रियंका सौरभ भारत में उच्च शिक्षा का तीव्र विस्तार अवसरों के साथ-साथ गंभीर चुनौतियाँ भी लेकर आया है। एक ओर विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और निजी शिक्षण संस्थानों की संख्या तेजी…
— डॉ. प्रियंका सौरभ वॉशिंगटन के प्रतिष्ठित वॉशिंगटन हिल्टन में शनिवार रात हुई गोलीबारी ने पूरी दुनिया को एक बार फिर चौंका दिया। यह केवल एक सुरक्षा संबंधी घटना नहीं…
-डॉ. प्रियंका सौरभ भारत की सांस्कृतिक संरचना में त्योहारों का स्थान केवल आनंद और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज की ऐतिहासिक स्मृति, आर्थिक संरचना, प्रकृति के साथ…
– डॉ. प्रियंका सौरभ देश में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ, तो इसे “ऐतिहासिक” बताया गया, संसद में तालियां बजीं और महिला सशक्तिकरण के नए युग की घोषणा…
आस्था के नाम पर फैलते छल से बचकर ही सुरक्षित रहेगी किसान की मेहनत – डॉ. सत्यवान सौरभ उत्तर भारत के गाँवों में गेहूँ की कटाई केवल एक मौसम नहीं,…
— डॉ. प्रियंका सौरभ आज के समय में अगर कोई सबसे तेज़ी से फैलने वाली चीज़ है, तो वह है—“बकवास”। फर्क बस इतना है कि अब यह बकवास चाय की…
(हर भावना का प्रदर्शन, हर रिश्ते का प्रचार, और हर मौके का राजनीतिक/सामाजिक इस्तेमाल।) — डॉ. सत्यवान सौरभ मकान का मुहूर्त हो या दुकान का उद्घाटन, शादी-ब्याह की खुशियाँ हों…
(डॉक्टर की चुप्पी टूटी तो सामने आया सिस्टम का काला चेहरा) — डॉ. सत्यवान सौरभ हाल ही में सामने आई एक युवा डॉक्टर की कहानी ने पूरे समाज को झकझोर…