चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने नशे के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेज करते हुए राज्य के सात जिलों में 13 नई फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई हैं। यह फास्ट ट्रैक कोर्ट फरीदाबाद, गुरुग्राम, पंचकूला, रोहतक व यमुनानगर में एक-एक होगी, जबकि सिरसा जिले में छह फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई गई हैं। फतेहाबाद जिले में दो फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है।

संबंधित जिलों में अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालयों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में बदला गया है और इन न्यायालायों के न्यायाधीश इन फास्ट ट्रैक कोर्ट के विशेष न्यायाधीश होंगे। जिन जिलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन हुआ है, वहां नशे की तस्करी से जुड़े केसों की त्वरित सुनवाई संभव हो सकेगी और इस कारोबार में संलिप्त तस्करों को समय से कड़ी सजा मिल पाएगी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर यह फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की गई है। न्याय प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सिरसा जिले में सबसे अधिक छह अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीशों की अदालतों को अन्य स्थापित अधिकारी एवं मनोभावी फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय के रूप में अधिसूचित किया गया है। इन अदालतों में मुख्य रूप से नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी।

हरियाणा सरकार ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब राज्य में नशा तस्करी और मादक पदार्थों के मामलों में लगातार कार्रवाई हो रही है तथा अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। नई अदालतों के गठन से इन मामलों के त्वरित निपटारे, दोषियों को शीघ्र सजा और पीड़ितों को जल्द न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

हरियाणा सरकार का यह कदम केवल न्यायिक व्यवस्था का विस्तार नहीं, बल्कि नशा मुक्त हरियाणा अभियान को कानूनी मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। यदि इन अदालतों में मामलों का समयबद्ध निपटारा होता है तो नशा तस्करी के खिलाफ राज्य की लड़ाई को बड़ा बल मिल सकता है।

हरियाणा में नशे की क्या है स्थिति

हरियाणा भौगोलिक रूप से पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से जुड़ा है, जिसके कारण यह नशा तस्करों के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट रूट भी माना जाता है। राज्य सरकार और पुलिस के लगातार अभियानों के बावजूद नशे का नेटवर्क चुनौती बना हुआ है।

उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 3,738 एफआइआर दर्ज की गईं और 6,801 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो पिछले वर्षों की तुलना में रिकॉर्ड कार्रवाई मानी गई। वर्ष 2020 से 2025 के बीच राज्य में 20,519 एनडीपीएस के मामले दर्ज हुए और 35,207 गिरफ्तारियां हुईं।

राज्य के 3,445 गांव और 774 वार्ड नशा मुक्त

हरियाणा सरकार का दावा है कि प्रदेश के 3,445 गांवों और 774 वार्डों को नशा मुक्त घोषित किया जा चुका है तथा नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार के लिए 161 नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। नई अदालतें खुलने से राज्य के गांवों और वार्डों को नशामुक्त घोषित करने के अभियान में मदद मिलेगी।

नशा मुक्त हरियाणा अभियान के तहत राज्य सरकार बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। इनमें एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन प्रमुख रूप से शामिल है। पंचकूला में सात राज्यों के सहयोग से अंतरराज्यीय सचिवालय की स्थापना पहले ही की जा चुकी है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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