कुरुक्षेत्र, 10 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र (एमएमटीटीसी) द्वारा यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के सहयोग से आयोजित चार सप्ताहीय संकाय अभिविन्यास कार्यक्रम के सातवें दिन चार महत्वपूर्ण अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम में संविधान, पर्यावरणीय कानून, केस-आधारित शिक्षण तथा शोध वित्तपोषण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
केरल विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के प्रो. (डॉ.) पी. एन. हरिकुमार ने भारतीय संविधान की मूल विशेषताओं एवं पर्यावरणीय कानून विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। उन्होंने मौलिक अधिकारों, नीति-निर्देशक तत्वों, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अजय सोल्खे ने केस-आधारित शिक्षण तथा शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध वित्तपोषण अवसरों पर जानकारी देते हुए कहा कि यह शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक एवं आलोचनात्मक चिंतन को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध विभिन्न शोध अनुदान योजनाओं और परियोजना वित्तपोषण के अवसरों की भी जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. गीतांजली चौधरी ने किया। सभी सत्र ज्ञानवर्धक एवं संवादात्मक रहे तथा प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। अंत में आयोजन समिति ने सभी संसाधन व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
केरल विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के प्रो. (डॉ.) पी. एन. हरिकुमार ने भारतीय संविधान की मूल विशेषताओं एवं पर्यावरणीय कानून विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। उन्होंने मौलिक अधिकारों, नीति-निर्देशक तत्वों, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अजय सोल्खे ने केस-आधारित शिक्षण तथा शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध वित्तपोषण अवसरों पर जानकारी देते हुए कहा कि यह शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक एवं आलोचनात्मक चिंतन को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध विभिन्न शोध अनुदान योजनाओं और परियोजना वित्तपोषण के अवसरों की भी जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. गीतांजली चौधरी ने किया। सभी सत्र ज्ञानवर्धक एवं संवादात्मक रहे तथा प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। अंत में आयोजन समिति ने सभी संसाधन व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
