पिहोवा 19 जून।   उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ मनीष वत्स ने कहा कि 19 जून शुक्रवार को पिहोवा ब्लॉक के गांव बटटेडी में भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वनस्पति संरक्षण सलाहकार डॉ. जे. पी. सिंह के निर्देशानुसार क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र फरीदाबाद द्वारा जिला कृषि विभाग के सहयोग से खेत बचाओ अभियान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 100 से अधिक किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
डॉ मनीष वत्स ने कहा कि सरकार द्वारा कार्यक्रम में कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने मुख्य बिंदु पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बायो-पेस्टीसाइड  किसानों को जैविक नियंत्रण को बढ़ावा देने के लिए बायो-पेस्टीसाइड ट्राइकोडर्मा का मुफ्त वितरण किया गया। विशेषज्ञों ने इसके उपयोग की विधि बताते हुए कहा कि यह एक मित्र फंगस है जो फसल की जड़ों को हानिकारक फंगस और बीमारियों से बचाता है। इसका उपयोग बीज उपचार, पौध उपचार और मिट्टी के उपचार में अवश्य करे। उर्वरकों और कीटनाशकों का संतुलित उपयोग किसानों को रासायनिक खादों के साथ-साथ रासायनिक कीटनाशकों के भी विवेकपूर्ण और सीमित इस्तेमाल के बारे में विशेष रूप से जागरूक किया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि अनावश्यक और अत्यधिक कीटनाशकों के छिडक़ाव से मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं और पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य को भारी नुकसान होता है। इसलिए जरूरत पडऩे पर ही सही मात्रा में इनका उपयोग करें। धान की सीधी बिजाई अभियान के दौरान किसानों को पानी की बचत और कम लागत के लिए धान की सीधी बिजाई तकनीक अपनाने की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने इसके सही तरीकों और लाभों के बारे में किसानों को जागरूक किया।
उन्होंने बौने रोग के बारे बचाव सुझाव पैडी (धान) की फसल में पिछले साल आए खतरनाक बौने रोग बौना रोग पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इस वायरस जनित रोग और इसे फैलाने वाले कीटों जैसे वाइट बैक्ड प्लांट हॉपर से फसल को बचाने के लिए शुरुआती स्तर पर ही कड़े कदम उठाना बेहद जरूरी है। बीज उपचार इसी बौने रोग तथा अन्य फंगस व कीट जनित बीमारियों से फसल को सुरक्षित रखने के लिए बिजाई से पहले अनिवार्य रूप से बीज उपचार करने की सलाह दी गई।
उन्होंने किसानों को प्रेरित किया गया कि वे कम से कम 1 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती की शुरुआत अवश्य करें, जिससे उनके परिवार को शुद्ध और रसायन मुक्त खाद्यान्न मिल सके। एग्री स्टैक आईडी डिजिटल कृषि से जुडऩे के लिए सभी किसानों को अपनी एग्री स्टैक आईडी बनवाने और इसके फायदों के बारे में बताया गया।    उन्होंने कहा कि पेस्टीसाइड के इस्तेमाल और कीटनाशकों के सुरक्षित रख-रखाव व भंडारण के तरीके सिखाए गए। इस अवसर पर खंड कृषि अधिकारी डॉ.अनिल कुमार,डॉ. सुरेश, डॉ.लक्ष्मी कांत, डॉ के.पी. शर्मा ,सभी सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी,आत्मा योजना के अधिकारी, पूर्व सरपंच मामराज,गुरदेव,कृष्ण और भारी संख्या में स्थानीय किसान भाई मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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