चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पिछले करीब एक साल से बंद पड़े श्रमिक पोर्टल को खोल दिया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी तथा मजदूर संगठनों के बीच हाल ही में हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है। श्रम विभाग में सामने आए करीब 1500 करोड़ रुपये के वर्कस्लिप घोटाले के बाद इस पोर्टल को बंद किया गया था।
आरोप था कि फर्जी लाभार्थियों के नाम पर बड़ी राशि निकाली गई थी। इसके बाद श्रम मंत्री अनिल विज के आदेश पर श्रम विभाग ने व्यापक जांच शुरू की और पोर्टल को बंद कर दिया था। जांच लंबी चलने के कारण वास्तविक श्रमिकों को भी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। श्रमिक संगठनों ने कई बार सरकार और श्रम मंत्री के समक्ष यह मुद्दा उठाया था।
श्रमिकों के लिए चलाई जा रहीं कुल 33 योजनाएं
हरियाणा सरकार द्वारा श्रमिकों के लिए कुल 33 योजनाएं चलाई जा रही हैं। पोर्टल बंद होने के कारण इन योजनाओं के लाभ से वास्तविक पात्र वंचित हो रहे थे। पोर्टल बंद रहने का सबसे अधिक असर श्रमिक परिवारों के बच्चों पर पड़ा।
उन्हें छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। इसके अलावा, कई पात्र मजदूर भी विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रह गए।
बताते हैं कि वर्कस्लिप घोटाले की वर्षभर चली जांच में बड़ी संख्या में अपात्र एवं फर्जी रजिस्ट्रेशन सामने आए हैं। जांच के बाद केवल पात्र श्रमिकों को ही मान्य माना गया है और उन्हें श्रम विभाग की ओर से मैसेज भेजे गए हैं।
प्रदेशभर में लाखों श्रमिकों के भवन निर्माण श्रमिक पंजीकरण निरस्त किए गए हैं। केवल वास्तविक पात्र श्रमिक ही योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण (रिन्यूअल) नए नियमों और कड़े सत्यापन मानकों के तहत ही किए जाएंगे।
ये मिलेंगे फायदे
इस पोर्टल पर पंजीकरण के माध्यम से हरियाणा सरकार द्वारा श्रमिक की मृत्यु पर 2 लाख से 5 लाख रुपए तक सहायता राशि देने के अलावा, बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 8 हजार से 51 हजार रुपए तक पुरस्कार, कालेज छात्राओं को स्कूटी खरीदने के लिए 51 हजार रुपए, साइकिल खरीदने के लिए 5 हजार रुपए, औजार खरीदने के लिए 8 हजार रुपए, बेटियों के विवाह के लिए 1.01 लाख रुपए की सहायता प्रदान करने का प्रविधान है।
