सोनिका वधवा
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के पावन ब्रह्मसरोवर तट पर स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी (तिरुपति बालाजी) मंदिर में 24 जून से 4 जुलाई तक आयोजित होने वाले श्रीवारी वार्षिक ब्रह्मोत्सव-2026 को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। दक्षिण भारतीय वैदिक परंपराओं और सनातन संस्कृति के इस प्रतिष्ठित धार्मिक महोत्सव में देशभर से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है तथा श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
मंदिर प्रशासन द्वारा परिसर में रंग-रोगन, विद्युत सज्जा, साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा, पार्किंग और दर्शन व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। ब्रह्मोत्सव के दौरान पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण का विशेष संगम देखने को मिलेगा।
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*11 दिनों तक चलेंगे धार्मिक अनुष्ठान और दिव्य वाहन सेवाएं*
ब्रह्मोत्सव का शुभारंभ 24 जून को अंकुरार्पणम् से होगा, जो किसी भी वैदिक महोत्सव की मंगल शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद 25 जून को ध्वजारोहणम् के साथ ब्रह्मोत्सव का विधिवत आरंभ होगा। ध्वजारोहण के साथ ही मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों, वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ-अनुष्ठानों और भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी की विभिन्न दिव्य वाहन सेवाओं का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
उत्सव के दौरान भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी विभिन्न अलंकृत वाहनों पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इन दिव्य वाहन सेवाओं का विशेष महत्व माना जाता है और श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ इनमें भाग लेते हैं।
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*प्रमुख आकर्षण रहेंगे कल्याणोत्सवम्, गरुड़ वाहनम् और रथोत्सवम्*
ब्रह्मोत्सव के दौरान कई विशेष धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
29 जून को कल्याणोत्सवम् का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भगवान और देवी के दिव्य विवाह उत्सव का आयोजन होगा। इसी दिन होने वाला गरुड़ वाहनम् ब्रह्मोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण और भव्य कार्यक्रम माना जाता है। मान्यता है कि इस दिव्य दर्शन से श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है।
इसके अलावा 2 जुलाई को रथोत्सवम् आयोजित होगा, जिसमें भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी भव्य रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र रहता है।
3 जुलाई को चक्र स्नानम् का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पवित्र वैदिक विधि-विधान के साथ भगवान के सुदर्शन चक्र का अभिषेक एवं स्नान कराया जाएगा। वहीं 4 जुलाई को पुष्पयागम् के साथ ब्रह्मोत्सव का समापन होगा। इस अवसर पर भगवान को विभिन्न प्रकार के सुगंधित एवं रंग-बिरंगे पुष्प अर्पित किए जाएंगे।
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सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराओं का जीवंत उत्सव
मंदिर के स्वामी स्वामी हर्ष जी महाराज ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में ब्रह्मोत्सव में भाग लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि श्रीवारी वार्षिक ब्रह्मोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, वैदिक परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उत्सव है। इस महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी की कृपा प्राप्त करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और धार्मिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मोत्सव के दौरान होने वाले सभी अनुष्ठान वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न होंगे और श्रद्धालुओं को दिव्य एवं आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा।
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भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेगा ब्रह्मसरोवर
मंदिर प्रशासन के अनुसार ब्रह्मोत्सव की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और आयोजन को सफल बनाने के लिए विभिन्न समितियां लगातार कार्य कर रही हैं। सुरक्षा, यातायात, पार्किंग और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर के तट पर आयोजित होने वाला यह भव्य धार्मिक महोत्सव एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। 24 जून से 4 जुलाई तक चलने वाले इस आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आएगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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