आस्था का बाज़ारीकरण: वीआईपी दर्शन और आम श्रद्धालु की उपेक्षा पर एक गंभीर सवाल
(वीआईपी दर्शन के बढ़ते चलन में आम श्रद्धालु कहाँ खड़ा है?) – डॉ. सत्यवान सौरभ भारत जैसे देश में, जहाँ धर्म और आस्था केवल व्यक्तिगत विश्वास का विषय नहीं बल्कि…
(वीआईपी दर्शन के बढ़ते चलन में आम श्रद्धालु कहाँ खड़ा है?) – डॉ. सत्यवान सौरभ भारत जैसे देश में, जहाँ धर्म और आस्था केवल व्यक्तिगत विश्वास का विषय नहीं बल्कि…
(सड़क पर ठेला हटता है, लेकिन शोरूम का सामान क्यों नहीं?कार्रवाई वहीं तेज़, जहाँ विरोध की आवाज़ कमजोर हो। फुटपाथ वाले अपराधी, लेकिन पार्किंग निगलते कॉम्प्लेक्स बेदाग़।) डॉ. सत्यवान सौरभ…
(चार प्रमुख विश्वविद्यालयों में वित्तीय घोटाले, भर्ती अनियमितताएं और सत्ता के दुरुपयोग ने शिक्षा व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल) – डॉ. सत्यवान सौरभ हरियाणा के उच्च शिक्षा क्षेत्र में…
(जब जांच एजेंसी बन जाए राजनीति का केंद्र बिंदु) -डॉ. प्रियंका सौरभ भारत के संघीय ढांचे में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का राज्य क्षेत्राधिकार एक ऐसा संवेदनशील और बहुपरतीय मुद्दा…
(किताबों के नाम पर कमीशन—शिक्षा या व्यापार?) — डॉ. सत्यवान सौरभ शिक्षा को सदैव समाज की आत्मा, विकास का आधार और समान अवसरों का सेतु माना गया है। यह केवल…
पढ़ी-लिखी और स्वतंत्र होने के बावजूद कई महिलाएं शोषण का शिकार हो रही हैं। इस विचारधारा के अनुसार इसका एक कारण उनकी भावनात्मक प्रवृत्ति मानी जाती है, जिसका कुछ लोग…
(एक दशक में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद, प्राइवेट 51 हजार खुले़, स्कूल जाने योग्य हर पांचवां बच्चा स्कूल से बाहर) — डॉ. सत्यवान सौरभ भारत की शिक्षा व्यवस्था आज…
(सम्मान की आड़ में बढ़ता दिखावा, और संघर्षरत प्रतिभाओं की अनदेखी—क्या ये समारोह प्रेरणा हैं या केवल प्रभाव दिखाने का मंच?) — डॉ. सत्यवान सौरभ देशभर में IAS और IPS…
सोशल मीडिया पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने अबरार अहमद के पुराने पोस्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि उन्होंने भारत से जुड़े सैन्य घटनाक्रमों पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं। इसके…
(जब शिक्षक ही असमंजस और भय के माहौल में होंगे, तो शिक्षा व्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।) – डॉ. सत्यवान सौरभ हाल के दिनों में विद्यालय में…