ऑर्गनाइजेशन फॉर सोशल एंड कल्चरल अवेयरनेस (ओस्का) के तत्वावधान में किड्स प्लेनेट पब्लिक स्कूल, सेक्टर-3, कुरुक्षेत्र में “रबाब रिसाइटल” का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा का संरक्षण एवं संवर्धन करने के साथ-साथ संगीत के माध्यम से मानसिक शांति, सांस्कृतिक चेतना एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों का प्रसार करना था।
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध रबाब वादक गुरसिमर सिंह ने रबाब पर विभिन्न शास्त्रीय रागों एवं पारंपरिक धुनों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर पूरे सभागार को संगीतमय एवं आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति में भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई, मधुरता और भावाभिव्यक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। रबाब की मधुर स्वर लहरियों ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं उपस्थित संगीत प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। साथ ही सनमदीप तथा रमन ने तबले की सुमधुर संगत से श्रोताओं का मन मोह लिया। श्रोताओं ने कार्यक्रम को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने वाला एक अविस्मरणीय अनुभव बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय की प्राचार्या सुनीता रानी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना भी है। भारतीय शास्त्रीय संगीत विद्यार्थियों में एकाग्रता, अनुशासन, संवेदनशीलता एवं सांस्कृतिक चेतना का विकास करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनमें सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
विद्यालय के निदेशक परमिंदर सिंह बाठ ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी सांस्कृतिक धरोहर की आत्मा है। रबाब जैसे प्राचीन वाद्ययंत्रों से विद्यार्थियों का परिचय कराना अत्यंत आवश्यक है, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांगीतिक परंपराओं को समझे, अपनाए और आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि संगीत व्यक्ति के व्यक्तित्व को संवेदनशील, अनुशासित एवं रचनात्मक बनाता है।
वाइस प्रिंसिपल लविना बग्गा ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षिक एवं सामाजिक दबाव के बीच संगीत मानसिक तनाव को कम करने का प्रभावी माध्यम है। इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं तथा उन्हें संतुलित एवं स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
ऑर्गनाइजेशन फॉर सोशल एंड कल्चरल अवेयरनेस (ओस्का) के संस्थापक डॉ. चंद्रपाल पूनिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल भाँगर, राष्ट्रीय ऑब्जर्वर डॉ. नेहा अग्रवाल तथा संयुक्त सचिव राजिंदर मीरवाल ने संयुक्त रूप से कहा कि आज के समय में तनाव अनेक शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं का प्रमुख कारण बन चुका है। ऐसे में संगीत आधारित जन-जागरूकता कार्यक्रम लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति, मानसिक संतुलन एवं व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम है। ऐसे कार्यक्रम समाज को स्वस्थ, संस्कारित एवं सकारात्मक दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर ओस्का संस्था में इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थी रमन तंवर, समर, यशपाल, भावेश सिंह, जानिश, अमरदीप सिंह एवं प्रिशा सहित विद्यालय के शिक्षक गण श्वेता, जशन, आंचल, भव्या, मोनिका एवं अंजू, गणमान्य अतिथि, विद्यार्थी एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। अंत में आयोजकों ने ओस्का, सभी अतिथियों, कलाकारों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी भारतीय संगीत, संस्कृति एवं मानवीय मूल्यों के संवर्धन हेतु ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।
