करनाल, 13 जुलाई। जिला कांग्रेस कमेटी (शहरी) करनाल के जिला अध्यक्ष पराग गाबा ने स्मार्ट सिटी के नाम पर करनाल की बदहाल व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि शहर की चमक केवल सरकारी विज्ञापनों और होर्डिंग्स तक सीमित है, जबकि ज़मीनी हकीकत जनता के दर्द, परेशानियों और टूटते भरोसे की कहानी बयां कर रही है।
पराग गाबा ने कहा कि यदि करनाल वास्तव में स्मार्ट सिटी है, तो सबसे पहले सरकार यह बताए कि अस्पतालों में इलाज क्यों नहीं, सड़कों पर सुरक्षा क्यों नहीं और बारिश के दिनों में शहर झील में क्यों बदल जाता है? उन्होंने कहा कि हाल ही में कल्पना चावला राजकीय अस्पताल में बिजली गुल होने के कारण एक गर्भवती महिला की डिलीवरी के दौरान गंभीर अव्यवस्था पैदा हो गई। ऑपरेशन की पूरी तैयारी होने के बावजूद बिजली न होने से चिकित्सकीय प्रक्रिया प्रभावित हुई। प्रसूता और उसके परिजनों को भारी मानसिक पीड़ा, भय और असहायता का सामना करना पड़ा। जिस पल एक परिवार अपने घर में नई खुशियों के आगमन की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचा था, उसी पल उन्हें व्यवस्था की लापरवाही और अव्यवस्था का दर्द झेलना पड़ा। किसी भी मां को अपने जीवन के सबसे संवेदनशील क्षण में ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़े, यह किसी भी सभ्य समाज और संवेदनशील सरकार के लिए बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। यह घटना प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
उन्होंने कहा कि पहली ही बारिश ने स्मार्ट सिटी के दावों की पूरी सच्चाई सामने ला दी। रेलवे रोड पर दुकानों में पानी भर गया, सेक्टर-13 जैसे पॉश इलाकों में जलभराव हो गया, सड़कें धंस रही हैं, नाले और सीवर उफान पर हैं। करनाल में निर्माणाधीन फ्लाईओवर का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। अधूरे निर्माण के कारण आसपास की सड़कें टूटी पड़ी हैं, हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है और रोज़ हजारों लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। जनता रोज़ परेशान है, लेकिन सरकार को केवल अपने दावे दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि शहर में रोजगार के अवसर लगातार घट रहे हैं, युवा निराश हैं, व्यापारी परेशान हैं और आम परिवार हर दिन नई मुश्किलों से जूझ रहा है। सरकार के पास इन समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि केवल प्रचार और दिखावे की राजनीति है।
पराग गाबा ने कहा कि अब सरकार 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर कार्रवाई कर उन्हें जब्त करने की बात कर रही है। सवाल यह है कि क्या सरकार ने कभी उस मध्यमवर्गीय परिवार की मजबूरी समझने की कोशिश की है, जिसने वर्षों की मेहनत, त्याग और बचत के बाद एक गाड़ी खरीदी? यदि गाड़ी पूरी तरह फिट है, प्रदूषण मानकों पर खरी उतरती है और सुरक्षित चल सकती है, तो केवल उसकी उम्र के आधार पर उसे सड़क से हटाना किस न्याय का हिस्सा है? सरकार को गाड़ियों की उम्र नहीं, उनकी फिटनेस के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। आम आदमी हर दस-पंद्रह साल में नई गाड़ी खरीदने की क्षमता नहीं रखता। जनता को राहत देने की बजाय उसकी जेब पर बोझ डालना किसी भी जनहितैषी सरकार की पहचान नहीं हो सकती।
पराग गाबा ने सरकार से सवाल किया कि जब अस्पतालों में बिजली नहीं, बारिश में शहर डूब जाता है, सड़कें टूटी हुई हैं, सीवर व्यवस्था चरमराई हुई है, निर्माण कार्य वर्षों तक अधूरे पड़े हैं, युवाओं के पास रोजगार नहीं है और अब मध्यम वर्ग की गाड़ियों पर भी संकट खड़ा किया जा रहा है, तो आखिर करनाल को स्मार्ट सिटी कहने का आधार क्या है?
उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी का मतलब जनता पर नए-नए नियम थोपना नहीं, बल्कि जनता का जीवन सुरक्षित, सम्मानजनक और सुविधाजनक बनाना होता है। जब एक गर्भवती मां अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षण में भी व्यवस्था पर भरोसा न कर सके, जब बारिश की कुछ बूंदें पूरे शहर की बदहाली उजागर कर दें, जब युवा रोजगार के लिए भटकता रहे और मेहनत की कमाई से खरीदी गई गाड़ी भी आम आदमी के लिए बोझ बना दी जाए, तब विकास के दावे जनता के घावों पर मरहम नहीं, बल्कि नमक छिड़कने जैसे लगते हैं।
अंत में पराग गाबा ने कहा कि करनाल की जनता अब भाषण नहीं, जवाब चाहती है। जनता को विज्ञापनों का नहीं, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, मजबूत सड़कों, समय पर पूरे होने वाले विकास कार्यों, रोजगार और सम्मानजनक जीवन का अधिकार चाहिए। कांग्रेस आम जनता की आवाज़ बनकर हर उस मुद्दे को मजबूती से उठाती रहेगी, जो लोगों के जीवन, अधिकार और सम्मान से जुड़ा है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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