गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में आदि गुरु शंकराचार्य का प्रत्यक्ष आगमन हुआ था। उनकी स्मृति में श्री आदि शंकराचार्य मंदिर आज भी स्थित है। गीता जन्मस्थली में बना श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को गीतोपदेश देते हुए रथ श्री कांची कामकोटि के तत्कालीन जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया है।
सनातन धर्म मानव सभ्यता की उन वायरल परंपराओं में से एक है, जिसने न केवल समय की कसौटी पर स्वयं को सिद्ध किया है, बल्कि प्रतीक युग में मानव जीवन को नई दिशा प्रदान की है। यह उदगार श्री कांची कामकोटि के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती ने नई दिल्ली स्थित श्री कांची कामकोटि पीठम सांस्कृतिक केंद्र में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र से एक शिष्टाचार भेंट में व्यक्त किए। स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती ने कहा आधुनिक विश्व में जब मानव समाज तकनीकी उन्नति, मानसिक तनाव, सामाजिक विघटन, नैतिक संकट और पर्यावरणीय असंतुलन का सामना कर रहा है, तब सनातन धर्म का समग्र जीवन दर्शन पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है। सनातन धर्म मनुष्य को केवल ईश्वर केंद्रित नहीं बनाता बल्कि आत्म केंद्रित, कर्तव्य निष्ट और समाजोपयोगी बनता है। आज आवश्यकता है संपूर्ण देश एकजुट होकर भारत राष्ट्र को सब प्रकार से सशक्त करते हुए एक विकसित भारत का निर्माण करें। डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कांची कामकोटि पीठम् भारत की सनातन चेतना का जीवंत केंद्र है। युगों से यह पीठ वेद, उपनिषद, शास्त्र, धर्म, संस्कृति और राष्ट्र धर्म के संरक्षण का दिव्य दायित्व का अद्भुत निर्वहन कर रही है। आज भी उसकी यह ज्योति सम्पूर्ण विश्व को भारतीय अध्यात्म का मार्ग दिखा रही है।कांची कामकोटि पीठ का धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र से बहुत ही आत्मीय,आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध है। शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती विभिन्न विजय यात्राओं के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में भारतीय सभ्यता, वेदों और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार करते रहे हैं। श्री कांची कामकोटि के जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती राष्ट्र के गौरव है। शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती जी को मातृभूमि सेवा मिशन परिवार की ओर से डॉ.श्रीप्रकाश मिश्र ने स्मृति चिन्ह भेंट किया।आशीर्वाद प्रसाद स्वरूप शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती ने मठ का साहित्य आदि भेंट किया।डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने गीता जयंती – 2026 के लिए शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती जी को मातृभूमि सेवा मिशन परिवार की ओर से नियंत्रित किया।
सनातन धर्म मानव सभ्यता की उन वायरल परंपराओं में से एक है, जिसने न केवल समय की कसौटी पर स्वयं को सिद्ध किया है, बल्कि प्रतीक युग में मानव जीवन को नई दिशा प्रदान की है। यह उदगार श्री कांची कामकोटि के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती ने नई दिल्ली स्थित श्री कांची कामकोटि पीठम सांस्कृतिक केंद्र में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र से एक शिष्टाचार भेंट में व्यक्त किए। स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती ने कहा आधुनिक विश्व में जब मानव समाज तकनीकी उन्नति, मानसिक तनाव, सामाजिक विघटन, नैतिक संकट और पर्यावरणीय असंतुलन का सामना कर रहा है, तब सनातन धर्म का समग्र जीवन दर्शन पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है। सनातन धर्म मनुष्य को केवल ईश्वर केंद्रित नहीं बनाता बल्कि आत्म केंद्रित, कर्तव्य निष्ट और समाजोपयोगी बनता है। आज आवश्यकता है संपूर्ण देश एकजुट होकर भारत राष्ट्र को सब प्रकार से सशक्त करते हुए एक विकसित भारत का निर्माण करें। डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कांची कामकोटि पीठम् भारत की सनातन चेतना का जीवंत केंद्र है। युगों से यह पीठ वेद, उपनिषद, शास्त्र, धर्म, संस्कृति और राष्ट्र धर्म के संरक्षण का दिव्य दायित्व का अद्भुत निर्वहन कर रही है। आज भी उसकी यह ज्योति सम्पूर्ण विश्व को भारतीय अध्यात्म का मार्ग दिखा रही है।कांची कामकोटि पीठ का धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र से बहुत ही आत्मीय,आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध है। शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती विभिन्न विजय यात्राओं के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में भारतीय सभ्यता, वेदों और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार करते रहे हैं। श्री कांची कामकोटि के जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती राष्ट्र के गौरव है। शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती जी को मातृभूमि सेवा मिशन परिवार की ओर से डॉ.श्रीप्रकाश मिश्र ने स्मृति चिन्ह भेंट किया।आशीर्वाद प्रसाद स्वरूप शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती ने मठ का साहित्य आदि भेंट किया।डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने गीता जयंती – 2026 के लिए शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती जी को मातृभूमि सेवा मिशन परिवार की ओर से नियंत्रित किया।
