नी लक्ष्मीबाई भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अद्वितीय नायिका थीं। उनका सबसे बड़ा योगदान 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों की दमनकारी हड़प नीति का विरोध करना और मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी का नारा देकर मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति देना था।
रानी लक्ष्मीबाई की कहानी प्रेरणा, साहस और देशभक्ति की मिसाल है। यह विचार रानी विचार रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ मातृभूमि शिक्षा मंदिर  के विद्यार्थियों द्वारा रानी लक्ष्मीबाई के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ।
मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा
रानी लक्ष्मीबाई वास्तविक अर्थ में आदर्श वीरांगना थीं।  रानी लक्ष्मीबाई का जीवन साहस और बलिदान का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने न केवल झांसी के लिए, बल्कि संपूर्ण भारत की आज़ादी की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रेरणा से पुरुषों को भी अपने अधिकार और देश के प्रति अपनी स्वतंत्रता के साथ संघर्ष करने की प्रेरणा मिली। उनकी लड़ाई केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ ही नहीं थी, बल्कि यह स्पष्ट संदेश था कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों के समकक्ष हैं। रानी लक्ष्मीबाई ने यह सिद्ध किया कि नारी केवल घरेलू कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि युद्ध के मैदान में भी अपने अद्वितीय साहस के साथ इतिहास रचा जा सकता है। रानी लक्ष्मीबाई 1857 की राज्यक्रान्ति की द्वितीय शहीद वीरांगना थीं। उन्होंने सिर्फ 29 वर्ष की उम्र में अंग्रेज साम्राज्य की सेना से युद्ध किया और रणभूमि में वीरगति को प्राप्त हुईं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान वन्देमातरम से हुआ। कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के सदस्य, विद्यार्थी आदि उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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