कुरुक्षेत्र। असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण जिंदगी नर्क जैसी हो गई थी। हालात ऐसे थे कि चलना-फिरना तो दूर, चप्पल तक पहनना मुश्किल हो गया था। बेटा और पत्नी व्हीलचेयर पर बैठाकर उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते थे। अपनी ऐसी बेबसी और दूसरों पर निर्भरता को देखकर आंखों से आंसू नहीं रुकते थे। ऐसे कठिन समय में अंतिम उम्मीद लेकर वह श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक अस्पताल में पंचकर्म विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजा सिंगला के पास उपचार के लिए पहुंचे। आज उन्हें स्वयं विश्वास नहीं हो रहा कि जो व्यक्ति कभी व्हीलचेयर पर निर्भर था, वह अब सामान्य जीवन की ओर लौट चुका है।
यह आपबीती अंबाला जिले के गांव खोजकीपुर निवासी 62 वर्षीय सतपाल की है। सतपाल ने बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पहले उन्हें कमर में दर्द की शिकायत शुरू हुई थी। धीरे-धीरे दर्द दाईं टांग तक पहुंच गया और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उनका चलना-फिरना बंद हो गया। असहनीय पीड़ा के कारण वे बिस्तर से उठ भी नहीं पा रहे थे। उन्होंने कई स्थानों पर उपचार कराया, लेकिन कोई आराम नहीं हुआ।
सतपाल के अनुसार, परिजन उन्हें 2 अप्रैल को व्हीलचेयर पर बैठाकर श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां प्रो. डॉ. राजा सिंगला की देखरेख में उन्हें पंचकर्म चिकित्सा के लिए 28 दिनों तक भर्ती रखा गया। उपचार शुरू होने के लगभग 10 दिन बाद ही उन्हें सुधार महसूस होने लगा और वे अपने पैरों पर खड़े होने लगे। इसके बाद एक जून को उन्हें पंचकर्म चिकित्सा के दूसरे चरण के लिए पुनः भर्ती किया गया। वर्तमान में उनकी स्थिति में काफी सुधार है और वे बिना सहारे के अच्छी तरह चल-फिर रहे हैं।
आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला ने बताया कि सतपाल न्यूरोलॉजिकल समस्या के कारण लगभग अपाहिज हो चुका था। दोनों पैरों में अत्यधिक सुन्नपन और कमजोरी के कारण वह दूसरों पर निर्भर था। जांच में नसों और मांसपेशियों के बीच समुचित तालमेल नहीं मिला। इसके अलावा डी-7 से डी-11 स्तर तक डिस्क प्रोट्रूजन तथा एल-3 से एल-5 स्तर तक नर्व कंप्रेशन पाया गया, जिससे कमर के नीचे का हिस्सा प्रभावित हो गया था। इसी कारण मरीज को कमर और पैरों में लगातार दर्द के साथ चलने-फिरने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
पंचकर्म से पैरों का सुन्नपन हुआ खत्म: डॉ. सिंगला
चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. राजा सिंगला ने बताया कि श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक अस्पताल में कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान एवं कुलसचिव डॉ. कृष्ण कांत गुप्ता के मार्गदर्शन में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। अस्पताल में ऑटोइम्यून विकारों, मस्कुलोस्केलेटल, न्यूरोमस्कुलर, अस्थि एवं जोड़ रोगों सहित विभिन्न जटिल बीमारियों का आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार किया जा रहा है। उनकी सोमवार और वीरवार को कमरा नंबर-29 में ओपीडी होती है। उन्होंने बताया कि रोगी को पहले चरण में 28 दिन तक तेल धारा, कटि बस्ती और मात्रा बस्ति सहित विभिन्न पंचकर्म प्रक्रियाओं एवं आयुर्वेदिक औषधियां दी गई। मरीज में धीरे-धीरे सुधार दिखाई दिया और बिना किसी सहारे खुद चलने-फिरने लगा। एक माह के अंतराल के बाद मरीज को पुनः भर्ती कर पंचकर्म चिकित्सा का दूसरा चरण दिया गया। जिसके पश्चात रोगी खुद को 70 प्रतिशत तक स्वस्थ महसूस कर रहा है। पैरों का सुन्नपन काफी हद तक समाप्त हो चुका है तथा शरीर में पहले की तुलना में पर्याप्त शक्ति एवं स्फूर्ति महसूस कर रहा है। रोगी ने आयुष विश्वविद्यालय के साथ-साथ डॉ. राजा सिंगला और उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया है।
