करनाल, 10 जून।  चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि विज्ञान केन्द्र उचानी द्वारा कृषि विभाग के सहयोग से बुधवार को ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत ‘फसलों में उर्वरकों का संतुलित प्रयोग’ विषय पर असंध ब्लॉक के गांव कबूलपुर खेड़ा एवं फफड़ाना में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक खेती तथा किसानो को आमदनी बढ़ाने की तरकीब बताना था।

केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय तथा कृषि विज्ञान केंद्र उचानी के संदेशों एवं विचारों को किसानों तक पहुंचाने के लिए किसानों की समूह बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र उचानी से डॉ. विजय कुमार कौशिक, जिला विस्तार विशेषज्ञ (फार्म प्रबंधन), तथा केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई), करनाल के वैज्ञानिक तथा कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. विजय कुमार कौशिक ने किसानों को फसलों में उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक प्रयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित मात्रा में ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से उत्पादन में अपेक्षित वृद्धि नहीं होती, जबकि खेती की लागत निश्चित रूप से बढ़ जाती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम करने तथा जैविक एवं प्राकृतिक उपायों के माध्यम से भूमि की उर्वरा शक्ति एवं स्वास्थ्य को बनाए रखने का आह्वान किया।

डॉ. कौशिक ने बताया कि अधिक मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे दीर्घकाल में उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है। उन्होंने किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए पारंपरिक खेती के साथ-साथ कृषि आधारित उद्यमों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डेयरी फार्मिंग, मछली पालन, झींगा पालन, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन तथा कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन जैसे व्यवसायों को अपनाकर किसान अपनी आय में कई गुना वृद्धि कर सकते हैं।

उन्होंने धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) तकनीक के लाभों पर भी प्रकाश डाला तथा किसानों को जल संरक्षण, श्रम लागत में कमी और समय की बचत के लिए इस तकनीक को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि धान की सीधी बिजाई में खरपतवार नियंत्रण का अगर ध्यान रख लिया जाता हैं तो फिर कोई समस्या नहीं आती हैं ।

सीएसएसआरआई से आए वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी तथा उर्वरकों के सीमित एवं संतुलित उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने पर बल दिया। कृषि विभाग से प्रोग्राम आयोजक रवि राणा ए टी एम ने भी  प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए भी किसानों को प्रेरित किया और विभाग की स्कीम के बारे में बताया। किसानों ने विशेषज्ञों के साथ कृषि से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की तथा संतुलित उर्वरक प्रयोग, प्राकृतिक खेती एवं आधुनिक कृषि तकनीकों से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका वैज्ञानिकों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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