कुरुक्षेत्र, 14 मई। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, मुख्यालय माउंट आबू राजस्थान की शिपिंग, एवियशन एंड टूरिज्म विंग के अभियान के अंतर्गत ज्ञान अमृत मासिक पत्रिका के सह-संपादक राजयोगी बीके संतोष भाई, बीके मेघा बहन, बीके मनसा बहन, मुंबई से बीके प्रशांति दीदी तथा अंबाला से बीके शैली दीदी का कुरुक्षेत्र स्थित विश्व शांति धाम सेवा केंद्र पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया।
सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन ने सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि अनुभवी राजयोगी आत्माओं का सान्निध्य समाज में आध्यात्मिक जागृति और सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनता है। इस अवसर पर बीके राधा, बीके लता, बीके पुष्पा, बीके प्रियंका बहन तथा बीके डॉ. आर.डी. शर्मा ने पटका पहनाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राजयोगी बीके संतोष भाई ने वरिष्ठ राजयोगी प्रवक्ता एवं आध्यात्मिक लेखक पूज्य जगदीश भाई की 25वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके तपस्वी और सेवामय जीवन को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि जगदीश भाई केवल एक महान वक्ता या लेखक ही नहीं, बल्कि त्याग, सादगी और अनुशासन की साकार प्रतिमूर्ति थे। उन्हें “इकोनॉमी का अवतार” कहा जाता था। ब्रह्माकुमारीज का अधिकांश आध्यात्मिक साहित्य उनके अथक परिश्रम और लेखनी का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि यज्ञ सेवा के प्रति उनका समर्पण अंतिम सांस तक बना रहा। जीवन के अंतिम दिनों में भी बीमारी की अवस्था में बिस्तर पर रहते हुए उन्होंने एक पुस्तक लिखकर सेवा और पुरुषार्थ का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका सम्पूर्ण जीवन हर आत्मा को सेवा, समर्पण और तपस्या की प्रेरणा देता रहेगा।
बीके संतोष भाई ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि खुशी बाहरी वस्तुओं और परिस्थितियों पर आधारित होती है, इसलिए वह अस्थायी है, जबकि आनंद आत्मा की आंतरिक स्थिति है, जो केवल राजयोग के अभ्यास से प्राप्त होता है। जब मनुष्य स्वयं से जुड़ता है और अंतरात्मा की आवाज सुनता है, तभी वास्तविक शांति और आनंद का अनुभव करता है।
उन्होंने सकारात्मक सोच की शक्ति को समझाते हुए कहा कि हमारे विचारों की तरंगें पांचों तत्वों में फैलकर वातावरण को प्रभावित करती हैं। एक नकारात्मक विचार अनेक नकारात्मक विचारों को जन्म देता है, जबकि एक सकारात्मक संकल्प जीवन की दिशा बदल सकता है। उन्होंने कहा कि जैसे चुंबक का अपना चुंबकीय क्षेत्र होता है, वैसे ही हमारे विचार भी एक शक्तिशाली आभामंडल का निर्माण करते हैं। इसलिए हर परिस्थिति में सकारात्मक और श्रेष्ठ चिंतन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रतिदिन सुबह उठते ही और रात को सोने से पूर्व “मैं श्रेष्ठ आत्मा हूं”, “मैं भाग्यशाली हूं”, “मैं महान हूं” जैसे श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास करें। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है, मन शक्तिशाली बनता है और जीवन खुशियों से भर जाता है।
कार्यक्रम के अंत में सकारात्मक गीतों पर सभी भाई-बहनों को योगयुक्त एक्सरसाइज कराई गई, जिससे पूरा वातावरण उमंग, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया। उपस्थित सभी लोगों ने एक मिनट मौन रखकर पूज्य जगदीश भाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम ने सभी के भीतर आत्मिक जागृति, सकारात्मक सोच और राजयोग के प्रति नई प्रेरणा का संचार किया।
जगदीश भाई जी का तपस्वी एवं सेवामय जीवन सदैव मानवता को सादगी, समर्पण और श्रेष्ठ चिंतन की राह दिखाता रहेगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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