अंबाला शहर। भाजपा ने चुनाव में भले ही 16 वार्डों में जीत दर्ज कर शहर की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाई हो, लेकिन नतीजों की परतें खोलें तो कई दिलचस्प राजनीतिक संदेश भी सामने आए हैं।
किसी पार्षद का वोट बैंक पहले से मजबूत हुआ, तो किसी की जीत का अंतर सिमट गया। इस बार सदन में 13 नए चेहरे शामिल हुए हैं जिनमें से भाजपा के नौ और कांग्रेस के तीन व एक आजाद प्रत्याशी शामिल है।
वार्ड-17 से भाजपा के गुरप्रीत सिंह साहनी ने ऐसा रिकार्ड बनाया, जिसने शहर की सियासत में नई लकीर खींच दी। साल 2020 के चुनाव में वार्ड-17 से उनकी पत्नी अमनदीप कौर ने 1772 वोट से जीत दर्ज की थी, जो उस समय दूसरी सबसे बड़ी जीत मानी गई थी।
बाकी किसी भाजपा पार्षद को इतने कुल वोट भी हासिल नहीं हुए। इस तरह कुल 7 पार्षदों की निगम में वापसी हो गई है। इनमें एक पार्षद रही अमनप्रीत कौर के पति गुरप्रीत साहनी भी हैं।
इनकी जीत का अंतर घटा
दूसरी ओर कई पुराने चेहरे इस बार पिछली चमक बरकरार नहीं रख सके। वार्ड तीन से मनीष आनंद पिछली बार 907 वोट से जीते थे, लेकिन इस बार उनकी जीत का अंतर घटकर 597 रह गया।
वार्ड पांच से राजेश मेहता की जीत का अंतर भी 1780 से घटकर 1007 पर आ गया। वार्ड-13 में शोभा पुनिया 2020 में 448 वोट से जीती थीं, लेकिन इस बार उन्हें मात्र 23 वोट से जीत मिली, जो सबसे कांटे का मुकाबला रहा।
इन्होंने स्थापित किए नए आयाम
कई पार्षदों ने अपने जनाधार को मजबूत भी किया। वार्ड छह से अर्चना छिब्बर ने पिछली बार 834 वोट से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार उन्होंने करीब दोगुने से ज्यादा अंतर यानी 1986 वोट से जीत हासिल की।
वार्ड सात से मोनिका मल ने भी 182 वोट की मामूली जीत को इस बार 1490 वोट की बड़ी बढ़त में बदल दिया। वार्ड 18 से हितेश जैन, जो पिछली बार 228 वोट से जीते थे, इस बार 1421 वोट के बड़े अंतर से विजयी रहे।
