डॉ. राजेश वधवा/कुरूक्षेत्र।

ब्रह्मसरोवर पर आयोजित बैसाखी महोत्सव 2026 के हरियाणा पैवेलियन में ‘विरासत’ सांस्कृतिक प्रदर्शनी सभी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बनी। दो दिन तक चली इस प्रदर्शनी का अवलोकन हजारों पर्यटकों ने किया। विरासत सांस्कृतिक प्रदर्शनी हरियाणवी लोक सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से अपनी अलग छाप छोड़ रही है। यह जानकारी विरासत दि हेरिटेज विलेज कुरुक्षेत्र के संयोजक अभिनव ने दी।
उन्होंने बताया कि यहां पर बनाए गए सेल्फी प्वाइंट्स पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचाओ इवेंट ने पर्यटकों को अपनी ओर सबसे ज्यादा आकर्षित किया। यहां पर दिखाये गये चारपाई पर बैठे बुजुर्ग और हुक्के के साथ सबसे ज्यादा सेल्फी ली गई इसके साथ ही हरियाणा की चक्की, 100 साल पुरानी बैलगाड़ी, पहियों के साथ भी पर्यटकों ने फोटो खींचकर कैमरे में कैद किये।
अभिनव ने बताया कि यहां पर खेतीबाड़ी के औजार जेली और टांगली, अनाज बीजणे के लिए प्रयोग किए जाने वाल ओरणे, ऊंट पर बैठने के लिय प्रयोग की जाने वाली कूच्ची व कूंऐ से पानी निकालने के लिए प्रयोग किए जाने वाले डोल भी पर्यटकों को अपनी ओर लुभाते रहे। यहां पर हरियाणा के लोक परिधान के प्रतीक के रूप में हरियाणवी दाम्मण, चुनरी, खारा, घागरा, इंडी व बीजणे सभी को प्रदर्शित किया गया है। इतना ही नहीं यहां पर हरियाणवी लोक परंपरा में प्रयोग किए जाने वाले असंख्य पुराने बर्तनों ने पर्यटकों को खूब लुभाया। इसके साथ ही यहां पर कुएं में सामान निकालने के लिए प्रयोग किए जाने वाले कांटे एवं बिलाई भी लोगों को खूब पसंद आए। इसके साथ ही विरासत सांस्कृतिक प्रदर्शनी में हरियाणा की लोककलात्मक विषय-वस्तुओं पीढ़ा-चारपाई, चरखा, रेज्जा रंगने के ब्लॉक, कुम्हार द्वारा चाक पर बनाये गए बर्तन, पुराने तालों को जिस तरीके से सहेजा गया है वह भी पर्यटकों को अपनी ओर फोटो खींचने के लिए आकर्षित कर रहे हैं।
विरासत के संयोजक अभिनव ने बताया कि दरी बनाने की परंपरा, हरियाणा की बुणाई कला, फुलझड़ी कला, हरियाणवी गुड्डे-गुडिय़ा भी पर्यटकों को खूब भाई। इसके साथ ही मुढ़ा बनाने की परंपरा को भी इस लोक सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से हरियाणा की संस्कृति का खूब प्रचार-प्रसार हुआ। हरियाणा के पर्यटन एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित की गई इस प्रदर्शनी के लिए विरासत की ओर से हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी एवं कुरुक्षेत्र के जिला उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा (आईएएस), अतिरिक्त उपायुक्त विवेक आर्य तथा लोक संपर्क विभाग के डीपीआरओ डॉ. नरेन्द्र सिंह का आभार व्यक्त किया।

ओएसडी मुख्यमंत्री एवं उपायुक्त ने किया विरासत प्रदर्शनी का अवलोकन
बैसाखी मेले के अवसर पर विरासत द्वारा लगाई सांस्कृतिक प्रदर्शनी का अवलोकन हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के ओएसडी डॉ. प्रभलीन एवं जिला उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा (आईएएस) ने किया। उन्होंने कहा कि विरासत प्रदर्शनी के माध्यम से हरियाणा के गांवों की सांस्कृतिक झलक देखने को मिलती है। इस प्रदर्शनी में हरियाणा के ग्रामीण काम-धन्धों को प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी बैसाखी समारोह में पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से गांव की जो झलक प्रस्तुत की गई है वह सभी ग्रामीणों के लिए आकर्षण बनी है। इस अवसर पर दोनों ही मेहमानों को हरियाणा की पगड़ी बांधकर उनका सम्मान किया गया तथा विरासत की ओर से हरियाणा की लोककला का प्रतीक सांझी स्मृति चिह्न भेंट किया गया।

सेल्फी प्वाईंटस बने पर्यटकों की पहली पसंद
विरासत सांस्कृतिक प्रदर्शनी में हरियाणवी स्टाईल के सेल्फ प्वाईंटस सभी के मन को भा रहे हैं। बच्चे हों या बूढ़े, जवान हो या महिलाएं सभी हरियाणवी सेल्फी प्वाईंटस के साथ सेल्फी लेकर गर्व की अनुभूति कर रहे हैं। सौ साल पुरानी बैलड़ी, पचास साल पुराने रेहडू, 52 गज एवं 80 कली का दाम्मण,पनघट से पानी लाती महिला, हुक्के के साथ बैठे हुए दादा-पोता की जोड़ी, ओखल में मूसल से अनाज कूटती हुई महिलाएं, दूध बिलोती हुई महिला, अनाज से चक्की पीसती हुई महिलाएं तथा लोक पारंपरिक चित्तण-मांडणों के साथ बने हुए हरियाणवी दरवाजे सभी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। दो दिन तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में हजारों लोगों ने सेल्फी लेकर हरियाणवी संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया है।

सौ साल पुरानी बैलडी के साथ पर्यटकों ने खिंचवाये फोटो
बैसाखी मेले पर आयोजित की विरासत सांस्कृतिक प्रदर्शनी में 100 साल पुरानी बैलडी पर्यटकों की पहली पसंद बनी हुई। परिवहन के साधनों में बैलडी अत्यंत प्राचीन है। इसके अंदर दो पारंपरिक पहिये लकड़ी से बने हुए हैं। साईडों में लगे हुए बांक बैलडी की शोभा को बढ़ा रहे हैं। बैलड़ी में आगे दो बैल जोतने की परंपरा रही है। वर्तमान में यह बैलड़ी सैल्फी के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। गांव के बुजुर्गों के लिए यह अत्यन्त रूचिकर साबित हो रही है। गांव के अनेक लोग बैलड़ी पर फोटो खिंचवाकर अतीत की यादें ताजा कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि लोकजीवन में बैलड़ी की परंपरा एवं प्रचलन अब बंद हो चुका है। इसीलिए बैसाखी के मेले में 100 साल पुरानी बैलड़ी आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।

हरियाणवी पगड़ी के रंग बैसाखी के संग
विरासत सांस्कृतिक प्रदर्शनी में हरियाणवी पगड़ी के अलग-अलग स्वरूप पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचाओ स्टॉल के माध्यम से हरियाणवी पगड़ी को खूब लोकप्रियता मिल रही है। खादर, बांगर, बागड़, बृज, मेवात, अहीरवाल के साथ-साथ सिक्ख पगड़ी भी बैसाखी उत्सव में पर्यटकों के मन को मोह रही है। पगड़ी की परंपरा का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। इसी परंपरा को मध्य नजर रखते हुए हरियाणा की पगड़ी के अलग-अलग स्वरूप पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। छोटे बच्चे हरियाणवी पगड़ी बंधवाकर सेल्फी लेने के अवसर चूक नहीं रहे हैं। इस दृष्टि से बैसाखी उत्सव में हरियाणवी पगड़ी के रंग बैसाखी के संग खूब देखने को मिले।

100 साल से अधिक पुराने ताले बता रहे हैं इतिहास
विरासत सांस्कृतिक प्रदर्शनी में 100 साल से अधिक पुराने ताले जहां एक ओर अपनी विविधता को दर्शा रहे हैं वहीं पर दूसरी ओर अपने सांस्कृतिक इतिहास को भी बता रहे हैं। सिकलीगर जाती के लोगों का इतिहास ताले बनाने का रहा है। विरासत प्रदर्शनी में अनेक प्रकार के ताले जिनमें कमानी वाले ताले, अलीगढ़ी ताले, मुगली ताले जिनका संबंध मुगल काल से है, न्यौल ताले, हथकड़ी ताले सभी अपनी विविधता के चलते पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। यहां पर सिकलीगर कैंची को राहते हुए भी लोगों का अपनी ओर ध्यान खींच रहा है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

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