सोनिका वधवा
कुरुक्षेत्र। श्री बालाजी आरोग्यम हॉस्पिटल द्वारा सैनी समाज भवन, कुरुक्षेत्र में आयोजित “पेन-फ्री वॉक इनिशिएटिव” का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य घुटना प्रत्यारोपण यानि नी रिप्लेसमेंट को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना तथा उनके मन में मौजूद डर और शंकाओं को दूर करना था। सैनी समाज भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 250 लोगों ने भाग लेकर इसका लाभ उठाया।
कार्यक्रम में डायरेक्टर डॉक्टर अनुराग कौशल, हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजुल गोयल तथा फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर कनक ने भाग लेकर लोगों को रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए।
इस दौरान डॉ. राजुल गोयल ने बताया कि वे जॉन्सन एंड जॉन्सन के फोर्थ जेनरेशन एडवांस रोबोटिक सिस्टम का उपयोग करते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वेलीसिम रोबोटिक-असिस्टेड सॉल्यूशन घुटने के रिप्लेसमेंट के लिए एक आधुनिक तकनीक है, जो सर्जरी में उच्च सटीकता सुनिश्चित करती है। जिससे कोमल ऊतकों को कम नुकसान होता है, रिकवरी तेज़ होती है और परिणाम बेहतर मिलते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि इस तकनीक में उपयोग होने वाले इम्प्लांट की औसत आयु लगभग 25 वर्षों तक मानी जाती है तथा वे 3000 से अधिक सफल घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी कर चुके हैं।
उन्होंने लोगों को रोबोटिक एवं मैनुअल घुटना प्रत्यारोपण में अंतर के बारे में भी जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि रोबोटिक तकनीक पारंपरिक यानि मैनुअल सर्जरी की तुलना में अधिक सटीक और प्रभावी होती है।
रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट के प्रमुख लाभों में बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में उच्च सटीकता, हड्डियों की बेहतर अलाइनमेंट, कम कटाई और कम रक्तस्राव, कोमल ऊतकों को कम नुकसान, तेज़ रिकवरी और कम दर्द जैसे लाभ शामिल हैं जिससे मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौटता है। साथ ही इम्प्लांट की लंबी उम्र होती है।
वहीं मैनुअल नी रिप्लेसमेंट के बारे में उन्होंने बताया कि ये सर्जरी डॉक्टर के अनुभव पर निर्भर होती है जिसमें अलाइनमेंट में थोड़ा अंतर संभव रहता है। साथ ही रिकवरी में अधिक समय लग सकता है।
गौरतलब है कि इस आयोजन की विशेषता यह रही कि इसमें वे मरीज भी शामिल हुए, जो पहले ही रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण करवा चुके हैं। उन्होंने अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि सर्जरी के बाद वे अब बिना दर्द के सामान्य जीवन जी पा रहे हैं।
इसके अलावा जिन लोगों को घुटनों में दर्द है और जो सर्जरी को लेकर असमंजस में थे, उन्हें डॉक्टरों एवं ऑपरेशन करवा चुके मरीजों से सीधे संवाद का अवसर मिला, जिससे उनकी शंकाएं दूर हुईं और उन्हें सही निर्णय लेने में सहायता मिली।
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक क्षण तब रहा, जब ऑपरेशन करवा चुके सभी मरीजों ने मिलकर “पेन-फ्री वॉक” की और यह संदेश दिया कि सही उपचार के बाद दर्द-रहित जीवन संभव है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के लिए ऑर्थोपेडिक कंसल्टेशन, फिजियोथेरेपी परामर्श, डाइटिशियन की सलाह, हल्का एवं स्वास्थ्यवर्धक भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई।
डॉक्टरों ने बताया कि आधुनिक रोबोटिक तकनीक से घुटना प्रत्यारोपण अब अधिक सुरक्षित, सटीक एवं प्रभावी हो गया है, जिससे मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।
आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को बेहतर एवं सक्रिय जीवन की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
