कुरुक्षेत्र 16 अक्टूबर। उपायुक्त राजेश जोगपाल ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन स्कीम के तहत किसानों को अनेको कृषि उपकरण उपलब्ध करवाये गए है, जिससे धान अवशेषों का प्रबंधन किया जा सकता है। इन कृषि यंत्रों मे मुख्य रूप से 2414 सुपर सीडर और 268 स्ट्रा बेलर अब तक अनुदान पर किसानों को उपलब्ध करवाये जा चुके है।
उपायुक्त राजेश जोगपाल बुधवार को उपायुक्त कार्यालय में पराली आधारित उद्योगों के प्रतिनिधियों   की एक बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसान स्ट्रा बेलर से पराली के बंडल बनाकर ईंधन के रूप में उद्योगों को बेच सकते है अथवा सुपर सीडर के माध्यम से पराली को अपने खेतों में ही मिलाकर भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि कर सकते है। दोनों ही तरह के पराली प्रबंधन करने की एवज में 1000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी कृषि विभाग द्वारा किसानों की प्रदान की जाती है। गत वर्ष 20 हजार से अधिक किसानों को लगभग 17 करोड़ 40 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में उनके बैंक खातों में वितरित किए जा चुके है।
उन्होंने कहा कि जिला कुरुक्षेत्र में 3 लाख से अधिक एकड़ भूमि में धान की खेती होती है और 50 प्रतिशत से अधिक धान की कटाई कार्य जोरो पर चल रहा है, अधिकतर किसान धान की कटाई कम्बाईन हारवेस्टर से करवाते है, जिसके फलस्वरूप धान के अवशेष खेत में ही रह जाते है। इन अवशेषों में यदि हम आग लगा देते है तो वातावरण बुरी तरह दूषित होता है और जमीन की उपजाऊ शक्ति भी क्षीण होती है। उन्होंने किसानों से अपील की जाती है कि अपने गांव, शहर, प्रदेश एवं देश के पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए और अपनी कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाये रखने के लिए पराली प्रबंधन में अपना सहयोग देकर लाभान्वित हो।
उन्होंने कहा कि पराली एकत्रित करने वाले एग्रीगेटर के लिए पराली स्टॉक का बीमा करवाने का प्रावधान बीमा कम्पनी द्वारा किया जाए। डिलोटी इंडिया कम्पनी द्वारा सुरक्षित पराली स्टोरेज प्रणाली विकसित करके  उद्योगों   व एग्रीगेटर को प्रक्षिशित किया जाए। उन्होंने कहा कि डिलोटी इंडिया कम्पनी द्वारा पराली को ईंधन के रूप में प्रयोग करने की साथ-साथ ऐसी तकनीक पर कार्य किया जाए। जिससे प्रणाली के प्रयोग से कार्डबोर्ड, टोकरी जैसी रोजमर्रा की वस्तुएं तैयार की जा सके और पॉलयट प्रोजेक्ट के तौर पर एक ऐसा उद्योग जिला कुरुक्षेत्र में लगाया जाए ताकि पराली की मांग को बढ़ाया जा सके।
उन्होंने कहा कि उद्योगों में पारंपरिक ईंधन वाले बॉयलर की बजाय पराली आधारित बॉयलर की स्थापना पर ध्यान दिया जाए और इसके लिये उद्योगों को अनुदान प्रदान किया जाये ताकि पराली की मांग बढ़ाई जा सके जिससे पराली के भाव में स्थिरता लाई जा सके। एग्रीगेटर/किसानों द्वारा पराली स्टोरेज के स्थानो पर 15000 लीटर क्षमता का वाटर टैंक व ट्रैक्टर चालित पम्प रखे जाए ताकि पराली स्टॉक में आग लगने की स्थिति में तुरंत काबू पाया जा सके। इसके लिये टैंक व पंम्प की खरीद पर अनुदान प्रदान किया जाए। उपायुक्त ने आए हुए प्रतिनिधियों से कहा कि वे पराली खरीद का लाभकारी मूल्य तय करें ताकि बेलर मालिकों को बेल बनाकर सप्लाई करने में कोई नुकसान न हो अपितु कुछ लाभ अर्जित कर सकें और इस प्रकार सभी मिलकर पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे सकें।
इस अवसर पर डीडीए डा. कर्मचंद ने बताया कि जिला कुरुक्षेत्र में धान की पराली में आग लगाने को रोकने के लिये अधिकारियों को कड़े निर्देश दिये हुए है कि वे किसान के खेतों में जाकर उन्हे आग लगाने से रोके। जिला कुरुक्षेत्र में अभी तक 87 किसानों का चालान किया गया है और जुर्माने के रूप में दो लाख बीस हजार रुपये की राशि वसूल की गई है।  इस अवसर पर सैन्सन्ज पेपर मिलर्स, हिन्द समाचार पॉवर प्लान्ट, बाजवा एग्रो वेस्ट, गोया एग्रो इंडस्ट्रीज, ईन्सा पेपर्स बोर्ड, सन्धू फयूलस ब्रीकेटस आदि के प्रतिनिधियों मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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