Category: International

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की चर्चा: सत्य का आईना या संस्था की गरिमा पर प्रहार?

– डॉ. प्रियंका सौरभ न्यायपालिका भारत के लोकतंत्र का संरक्षक स्तंभ है, जो संविधान की रक्षा करता है और नागरिकों को न्याय का आश्वासन देता है। लेकिन हाल ही में…

विदेश भेजने की होड़ और बदलती मानसिकता

( क्या सचमुच भारत में अवसर कम हैं या हम एक भ्रम में जी रहे हैं?) – डॉ. प्रियंका सौरभ पिछले कुछ वर्षों में भारतीय समाज में एक नई प्रवृत्ति…

विधायकों के टेलीफोन भत्ते: फिजूलखर्ची या जनसंपर्क की अनिवार्यता?

(जब 300–400 रुपये में अनलिमिटेड कॉल और डेटा संभव, तो जनप्रतिनिधियों के लिए इतना बड़ा भत्ता क्यों?) -डॉ. सत्यवान सौरभ लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली सुविधाएं हमेशा चर्चा…

*कुरुक्षेत्र की धरती से SKM ने किया ट्रेड डील के विरोध का ऐलान, देशभर में करेंगे महापंचायतें*

*9 मार्च को दिल्ली में किसान मजदूर लगाएंगे सदन* *10 मार्च से लेकर 13 अप्रैल तक देश भर में किए जाएंगे महापंचायत* *राकेश टिकट एप्सटीन फाइल पर दी प्रतिक्रिया, बोले-…

क्लिक के दलदल में फँसा समाज: गालियों से ग्रोथ, शोर से शोहरत

(जहाँ सच सन्नाटा है, तमाशा उत्सव है — क्लिक की संस्कृति में खोता हुआ समाज और डिजिटल मंच पर किनारे पड़ा विवेक) डॉ. सत्यवान सौरभ डिजिटल दुनिया कभी ज्ञान, संवाद…

दौलत की फाइलें, भरोसे के सवाल

(अधिकारियों की संपत्ति के खुलासे ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर नई बहस छेड़ी) – डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा के आईपीएस अधिकारियों की संपत्ति का विवरण सार्वजनिक होने के बाद एक…

आकर्षक विज्ञापन, चमकदार पैकेजिंग और भ्रामक दावे

(बदलते पोषण परिदृश्य में सूचित विकल्प का अधिकार) – डॉ. सत्यवान सौरभ भारत का पोषण परिदृश्य तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। लंबे समय तक सार्वजनिक नीति का…

शादी की बदलती तस्वीर: दिखावे, अहंकार और टूटते रिश्ते

– डॉ० प्रियंका सौरभ भारतीय समाज में शादी केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं रही है, बल्कि इसे हमेशा से परिवार, समाज और संस्कारों से जुड़ी एक पवित्र संस्था माना…

चिप्स की जंग में भारत की एंट्री

(सेमीकंडक्टर सहयोग और बदलती वैश्विक रणनीति) डॉ. प्रियंका सौरभ भारत और अमेरिका के बीच सेमीकंडक्टर तथा उन्नत तकनीकी सहयोग को लेकर हुआ हालिया करार केवल एक द्विपक्षीय समझौता नहीं है,…

रफ्तार की कीमत: सड़क पर बुझता युवाओं का भविष्य

सड़क हादसे केवल दुर्घटनाएँ नहीं, बल्कि हमारी लापरवाही और गैर-जिम्मेदार सोच का परिणाम हैं। तेज़ रफ्तार, नशे में ड्राइविंग और मोबाइल का इस्तेमाल युवाओं की ज़िंदगी निगल रहा है। नियमों…