Category: Dharam-Adhyatam

रक्तदान महादान, रक्तदान करने से शरीर में एक नई ऊर्जा का होता है संचार : नेहा सिंह

उपायुक्त नेहा सिंह व कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने गीता ज्ञान संस्थानम् में किया रक्तदान शिविर का उदघाटन —- जीओ गीता युवा मंच व श्रीकृष्ण कृपा परिवार द्वारा गीता मनीषी…

रेवाड़ी में निर्माणधीन काली माता मंदिर में हुआ चमत्कार, खुदाई में निकली माता की मूर्ति, मंदिर कमेटी ने प्राण प्रतिष्ठा कर लगाया भंडारा

रेवाड़ी में निर्माणधीन काली माता मंदिर में हुआ चमत्कार, खुदाई में निकली माता की मूर्ति, मंदिर कमेटी ने प्राण प्रतिष्ठा कर लगाया भंडारा। रेवती जी की नगरी व बलराम जी…

भारत पूरे विश्व में अलग एवं विशेष राष्ट्र है जहां शिक्षा भी वेदों व संस्कारों से मिलती है : आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी

शिक्षा से सामाजिक परिवर्तन एवं राष्ट्र का विकास संभव है : सांसद नवीन जिंदल डीएसबी इंटरनैशनल पब्लिक स्कूल के लोकार्पण समारोह में शामिल हुए आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी एवं सांसद…

कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर पहली बार भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान दत्तात्रेय जी महाराज की अमृत कथा 8 से…

सोनिका वधवा कुरूक्षेत्र। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर पहली बार भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान दत्तात्रेय जी महाराज की अमृत कथा होने जा रही है। अवसर है प्राचीन…

काम्यकेश्वर तीर्थ में श्रद्धालुओं ने लगाई श्रद्धा की डुबकी विश्वशांति यज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धालुओं ने डाली आहुतियां

काम्यकेश्वर तीर्थ में श्रद्धालुओं ने लगाई श्रद्धा की डुबकी विश्वशांति यज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धालुओं ने डाली आहुतियां काम्यकेश्वर तीर्थ पर शुक्ल पक्ष रविवारीय सप्तमी के दिन पूजन…

श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी की प्रेरणा से काम्यकेश्वर तीर्थ पर कल लगेगा शुक्ला सप्तमी मेला

काम्यकेश्वर तीर्थ पर शुक्ल सप्तमी पर स्नान करने से होती है मोक्ष की प्राप्ति कुरुक्षेत्र, 2 मई : श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी की प्रेरणा से तीर्थों की…

मंत्रोच्चारण के साथ जग ज्योति दरबार में भीषण गर्मी के बीच महंत राजेंद्र पुरी ने शुरू की राष्ट्रहित की कामना से पंच धूणी कठोर अग्नि तपस्या

करीब दो दशकों से भीषण गर्मी में हर वर्ष आग की धूणी (ढेरों) के बीच कठोर अग्नि तपस्या करते हैं महंत राजेंद्र पुरी कुरुक्षेत्र, 1 मई : हर वर्ष की…

पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों में निहित है विश्व कल्याण और शांति का मार्ग:मैथ्यू हितकारी

पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों में निहित है विश्व कल्याण और शांति का मार्ग:मैथ्यू हितकारी ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया संसदीय क्षेत्र के सांसद मैथ्यू हितकारी ने किया गीता स्थली ज्योतिसर और…

श्रीमद्भगवद् गीता एवं भरतमुनि नाट्यशास्त्र को यूनेस्को द्वारा मान्यता मिलना भारतीय ज्ञान परंपरा का सम्मान

यूनेस्को  की पहल से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की विश्व में बढ़ेगी पहचान 19 अप्रैल: श्रीमद्भगवद् गीता एवं भरतमुनि नाट्यशास्त्र को यूनेस्को की 74 डॉक्यूमेंट्री हेरिटेज कलैक्शन में शामिल करना वास्तव में भारतीय ज्ञान परंपरा का सम्मान है। यह उद्गार संस्कृति प्रेमी एवं लोक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक प्रो. महासिंह पूनिया ने यूनेस्को द्वारा पांडुलिपियों की पंजीकृत सूची में भारतीय ज्ञान परंपरा के दोनों ग्रन्थों को शामिल करने के पश्चात कहे। उन्होंने कहा कि गीता एक ऐसा ग्रन्थ है जिस का विश्व की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। भरतमुनि नाट्यशास्त्र सांस्कृतिक दृष्टि से भारतीय परंपरा एवं सांस्कृतिक इतिहास का का एक ऐसा ग्रन्थ है जिस को विद्वानों ने पांचवे वेद की संज्ञा दी है। समस्त भारतवासियों के लिए यह गौरवमयी उपलब्धि है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया यह प्रयास वैश्विक स्तर पर गीता एवं नाट्यशास्त्र की गरिमा को नई पहचान देगा। यह पहचान हर उस भारतीय की है जो भारत की ज्ञान परंपरा पर गर्व एवं गौरव महसूस करता है। इस उपलब्धि पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि श्रीमद्भगवद् गीता के 18 अध्यायों में जीवन का सार है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा के अनुसार गीता का स्थान वही है जो उपनिषद एवं धर्मसूत्रों का है। उपनिषदों को जहां गायं कहा गया है वहीं पर गीता को उसके दुग्धरूपी सार की संज्ञा प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि उपनिषदों की जो अध्यात्म विद्या थी उसी को गीता में प्रस्तुत कर पूरे विश्व को एक ऐसा ग्रन्थ मिला है जो सब के लिए अनुकरणीय है। डॉ. पूनिया ने बताया कि भरतमुनि का नाट्यशास्त्र जो प्रदर्शन कलाओं पर एक प्राचीन ग्रन्थ है। यह ग्रन्थ 36 अध्यायों में विभाजित है। इस ग्रन्थ में नाटक के अभिनय, रस, संगीत और मंचन पर विस्तार से चर्चा की गई है। लोकजीवन में इसे पांचवे वेद की संज्ञा भी दी गई है। दोनों ही ग्रन्थों का यूनेस्को की पांडुलिपि ग्रन्थ सूची में शामिल होना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का अवसर है। उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय द्वारा की गई यह पहल आने वाले दिनों में भारतीय सांस्कृतिक एवं ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित करेगी।

शिवलिंग पर बेल पत्र अर्पित करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती : शास्त्री

दुखभंजन मंदिर में शिव भक्तों ने की पूजा अर्चना कुरुक्षेत्र। प्रसिद्ध दु:खभंजन मंदिर में सोमवार को हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। शिव भक्तों ने सबकी सुख-शांति के लिए पूर्ण…