गीता जयंती अनूठा धार्मिक-आध्यात्मिक-सामाजिक संगम – स्वामी सक्षम गिरी

रोहतक कला परिषद निदेशक गजेंद्र फौगाट ने किया सबका आभार

करनाल 20 नवंबर। करनाल क्षेत्र में गीता जयंती महोत्सव की कड़ी में आज ऐतिहासिक डाचर व जलमाणा तीर्थ में भव्यता और आस्था के साथ गीता जयंती उत्सव  मनाया गया। पूरा तीर्थ स्थल शंखनाद, भजन-कीर्तन और लोक संगीत की ध्वनि से गूंज उठा। श्रद्धालुओं, ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों से आए आगंतुकों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस पावन आयोजन में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने कृष्ण रास, कान्हा गुजरिया, मनमोहक भजन तथा हरियाणवी लोक रंग की विविध प्रस्तुतियाँ देकर माहौल को कृष्ण भक्ति से सराबोर कर दिया। मंच पर उतरी हर प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। लोगों ने तालियों और जयकारों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
गजेंद्र फौगाट ने सबका स्वागत व आभार व्यक्त करते हुए बताया कि प्रदेश की हरियाणा सरकार मुख्यमंत्री नायब सैनी के कुशल मार्गदर्शन में गीता जयंती के सफल संचालन कर रही है।उन्होंने कहा कि करनाल के सांसद व केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल तो मां गीता के प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं। वे अपने साथ हमेशा गीता रखते हैं जो उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा व मार्गदर्शक है।
इस मौके पर डाचर के दक्षेश्वर तीर्थ के संचालक सक्षमगिरी जी महाराज ने कहा कि गीता जयंती जैसे आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान,मूल्य और परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बनते हैं। उन्होंने ग्रामीणों के उत्साह और सहभागिता को भी सराहा। भगवान श्रीकृष्ण की मोक्षदायिनी गीता की जयंती के पावन अवसर पर ब्रह्मसरोवर तट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के मंच से सकारात्मकता, कर्मयोग और आत्मविश्वास का संदेश पूरे देश में फैला।
सक्षम गिरी जी महाराज ने ग्रमीण बच्चों व श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आगे कहा कि गीता कोई युद्ध-ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और आधुनिक युग की सबसे बड़ी थेरेपी है। “यह वही पवित्र भूमि है जहाँ श्रीकृष्ण ने अर्जुन का हाथ थामकर कहा था – खुद को खुद ही उठाओ। आज पूरा विश्व तनाव, अवसाद और अनिश्चितता से जूझ रहा है, ऐसे में गीता ही एकमात्र सहारा है जो हमें डर के आगे जीतना सिखाती है,”उन्होंने युवाओं से आह्वान किया, गीता कहती है – ‘क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ’। तुम्हारे भीतर वो शक्ति पहले से मौजूद है जो दुनिया बदल सकती है। बस उसे पहचानो और कर्म में जुट जाओ।”माता-पिता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “बच्चे सुनते नहीं – यह शिकायत बंद करो। गीता कहती है – श्रद्धा से ही ज्ञान मिलता है। अपने बच्चों को श्रद्धा और प्रेम से देखो, वे खुद-ब-खुद तुम्हारे पास आएँगे।”समाज में फैली नकारात्मकता पर चिंता जताते हुए गीता का सबसे सुंदर सूत्र सुनाया – “योगस्थः कुरु कर्माणि संगं त्यक्त्वा…” अर्थात आसक्ति छोड़कर, प्रेम से कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
उन्होंने कहा, “जिंदगी का सारा तनाव फल की चिंता से ही पैदा होता है। इसे छोड़ दो, जिंदगी खुद-ब-खुद हल्की और खुशहाल हो जाएगी।” उन्होंने कहा कि “आज से हम एक-एक व्यक्ति को गीता का एक श्लोक जरूर सिखाएँगे। किसी को ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’ बताएँगे, किसी को ‘यदा यदा हि धर्मस्य’ सुनाएँगे और किसी को बस इतना कहेंगे – चिंता मत कर, तेरे साथ वो कन्हैया खड़ा है।” 48 कोस परिक्रमा की कुरुक्षेत्र की इस पावन भूमि से उन्होंने कहा कि, “हम अब सिर्फ गीता नहीं पढ़ेंगे, गीता बनकर जीएँगे। हम नफरत नहीं, प्रेम बाँटेंगे। हम डरेंगे नहीं, डटकर मुकाबला करेंगे। क्योंकि गीता ने सिखाया है – यह आत्मा न शस्त्रों से कटती है, न आग से जलती है। हम अजर-अमर हैं। गीता जयंती महोत्सव में यह संदेश स्पष्ट हो गया कि गीता आज भी जीवंत है, प्रासंगिक है और हर समस्या का सबसे सरल और शक्तिशाली समाधान है।
ग्रामीणों ने कलाकारों तथा उनकी टीम का गर्मजोशी से सम्मान किया और उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों की सराहना की। कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री नायब सैनी, कला एवं सांस्कृतिक विभाग के महानिदेशक के.एम. पांडुरंग और अतिरिक्त निदेशक विवेक कालिया का विशेष रूप से धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विभाग के सहयोग और पहल के कारण ही गांव में इतना भव्य और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध आयोजन संभव हो पाया।
इस मौके पर जयपाल नम्बरदार,करण देव,रमेश,पंकज शर्मा समेत अनेकों ग्रामीण उपस्थित थे ।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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