करनाल 14 जुलाई,          नगर निगम आयुक्त सलोनी शर्मा ने निगम के पैनल पर नियुक्त अधिवक्ताओं की समीक्षा बैठक लेकर न्यायालयों में चल रहे मामलों की पैरवी को और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने के निर्देश दिए। निगम कार्यालय में आयोजित इस बैठक में नगर निगम के पैनल पर नियुक्त सभी 33 अधिवक्ताओं ने भाग लिया। बैठक में उप निगम आयुक्त विनोद नेहरा, लीगल शाखा से रीडर सतीश शर्मा तथा लिपिक शिवानी माटा भी उपस्थित रही।
बैठक के प्रारंभ में निगमायुक्त ने सभी अधिवक्ताओं से परिचय प्राप्त किया तथा नगर निगम से संबंधित न्यायालय मामलों के संचालन, समन्वय और पैरवी को लेकर उनके सुझाव एवं अनुभव भी जाने। उन्होंने कहा कि नगर निगम की संपत्तियों एवं जनहित से जुड़े मामलों में प्रभावी कानूनी कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है, इसलिए सभी अधिवक्ता पूरी तैयारी एवं तथ्यों के साथ न्यायालय में निगम का पक्ष मजबूती से रखें।
अवैध कब्जे, अतिक्रमण और अनाधिकृत निर्माण के मामलों की मजबूत पैरवी करें।
निगमायुक्त ने कहा कि न्यायालयों में नगर निगम के अधिकांश मामले निगम भूमि पर अवैध कब्जों, अनाधिकृत निर्माण, अतिक्रमण तथा सम्पत्ति कर से संबंधित होते हैं। ऐसे मामलों में निगम का पक्ष पूरी मजबूती के साथ रखा जाए तथा प्रत्येक केस की तथ्यात्मक एवं कानूनी दृष्टि से गहन तैयारी की जाए।
उन्होंने कहा कि न्यायालय के समक्ष सभी आवश्यक दस्तावेज, साक्ष्य एवं तथ्य समय पर प्रस्तुत किए जाएं, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को अनावश्यक राहत या स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त न हो और मामलों का निर्णय नगर निगम के पक्ष में हो सके। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपेक्षा की कि प्रत्येक केस में प्रभावी एवं जिम्मेदार प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
जटिल मामलों में समयबद्ध कानूनी राय उपलब्ध कराएं।
बैठक में उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में कानूनी जटिलता उत्पन्न होती है तो संबंधित अधिवक्ता से तत्काल कानूनी राय प्राप्त की जाए। यह राय निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि तथ्यों एवं कानून के आधार पर मजबूत रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि समय पर कानूनी सलाह मिलने से निगम को न्यायालय में बेहतर रणनीति के साथ अपना पक्ष रखने में सहायता मिलेगी और अनावश्यक विलंब से भी बचा जा सकेगा।
हर माह होगी कानूनी मामलों की समीक्षा बैठक।
उन्होंने कहा कि भविष्य में नगर निगम के न्यायालय मामलों की नियमित समीक्षा के लिए प्रत्येक माह अधिवक्ताओं के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में लंबित मामलों की प्रगति, चुनौतियों तथा आवश्यक कानूनी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने अधिवक्ताओं से कहा कि यदि किसी भी केस से संबंधित कोई महत्वपूर्ण तथ्य, कानूनी बाधा अथवा अन्य मुद्दा सामने आता है तो उसे तत्काल निगम प्रशासन के संज्ञान में लाया जाए, ताकि समय रहते उसका समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
समय पर उपलब्ध कराएं केस से जुड़े दस्तावेज और तथ्य।
निगमायुक्त ने उप निगम आयुक्त को निर्देश दिए कि अधिवक्ताओं को प्रत्येक केस से संबंधित रिपोर्ट, दस्तावेज, साक्ष्य एवं अन्य आवश्यक तथ्य समय पर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि कई बार समय पर अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण न्यायालय में प्रभावी पैरवी प्रभावित होती है, इसलिए सभी शाखाएं इस विषय में विशेष गंभीरता बरतें।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि न्यायालय मामलों में समन्वय को मजबूत बनाने के लिए नगर निगम की प्रत्येक शाखा से एक अधिकारी अथवा कर्मचारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। संबंधित नोडल अधिकारी के पास अपनी शाखा के सभी मामलों की अद्यतन जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए तथा वह समय पर आवश्यक रिकॉर्ड एवं साक्ष्य अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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