पंचकूला।  हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम एंव पंचकूला के विधायक चंद्रमोहन हरियाणा में लघु समाचार पत्रों के संपादकों व परिवारों के पक्ष में उतरें और उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी को पत्र लिखकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ प्रैस का सम्मान करते हुए लघु समाचार पत्रों के संपादकों की मान्यता व विज्ञापन बहाल करने की मांग की। चंद्रमोहन ने कहा अखबार छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि उसकी निष्पक्षता ही समाज व सरकार के लिए अहम होती है। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में पूर्व डिप्टी सीएम व पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बेटे चंद्रमोहन ने पत्र में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 1919 मे शुरू किए लघु समाचार पत्र यंग इंडिया का जिक्र किया जिस अखबार ने आजादी की लड़ाई लड़ी और आज भी देश में ऐसे ऐसे लघु समाचार पत्र हैं जो समाज में सरकार व प्रशासन में ब्रिज का काम कर रहे हैं। पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को लिखे पत्र में कहा कि 2005 से 2014 तक कांग्रेस सरकार ने लघु समाचार पत्रों के संपादकों की मान्यता व विज्ञापन जारी रखे और 2014 से  2024 तक भाजपा के ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी लघु समाचार पत्रों के संपादकों की मान्यता व विज्ञापनों से छेड़छाड़ नहीं की लेकिन मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पता नहीं किसकी सलाह पर लघु समाचार पत्रों के संपादकों की पुरानी मान्यता व सरकारी विज्ञापनों पर रोक लगाकर उनके परिवारों को भुखमरी के कगार पर खड़ा कर दिया जो एक पक्षपात है। मीडिया से जुड़े व्यक्ति की तुलना नहीं करनी चाहिए। चंद्रमोहन ने कहा जो लघु समाचार अखबार  जिनमें दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक व मासिक शामिल हैं अगर वह नहीं छप रहे तो उनकी मान्यता व विज्ञापन बंद करने का फैसला समझ आता है। हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम व पांचवी बार विधायक चंद्रमोहन ने कहा हैरानगी की बात है कि नायब सैनी ने अपनी ही सरकार के साढ़े नौ साल मुख्यमंत्री रहे मनोहर लाल खट्टर के फैसले को रद्द कर दिया। वहीं चंद्रमोहन ने नायब सैनी को लिखे पत्र में कहा कि कोई भी कानून या फैसला हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट सुनाता है या कोईनया कानून बनता है तो वह कानून पुराने केसों पर लागू नहीं होता लेकिन नायब सैनी सरकार ने पता नहीं किसकी सलाह पर जिन लघु समाचार पत्रों के संपादकों की वर्षों से मान्यता चल रही थी और वर्षों से उनको सरकारी विज्ञापन मिल रहे थे उन्हें नए कानून बनाकर उन विज्ञापनों को बंद करके लघु समाचार पत्रों के संपादकों पर कुठाराघात किया। इस फैसले को नायब सैनी वापिस लें और संपादकों की मान्यता जो रद्द की है उसी तारीख से बहाल की जाए और सरकारी विज्ञापन भी लघु समाचार पत्रों के संपादकों को देने शुरू किए जाएं।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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