चंडीगढ़, 13 जुलाई। काउंसिल ऑफ लॉयर्स के चेयरमैन एवं सुप्रीम कोर्ट व पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट वासु रंजन ने पंजाब सरकार से मांग की है कि जागृत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार विधेयक की तर्ज पर हिन्दू धर्म के पवित्र धार्मिक ग्रंथों एवं देवी-देवताओं के सम्मान की रक्षा के लिए भी एक प्रभावी एवं सख्त कानून बनाया जाए।
एडवोकेट वासु रंजन ने आज इस संबंध में पंजाब के राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान को विस्तृत पत्र भेजकर आग्रह किया है कि पंजाब विधानसभा में ऐसा व्यापक कानून लाया जाए, जिससे सभी धर्मों की आस्थाओं, पवित्र ग्रंथों एवं पूजनीय प्रतीकों का समान रूप से सम्मान और कानूनी संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि जिस प्रकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी रोकने के उद्देश्य से विशेष कानून लाने की पहल की गई है, उसी प्रकार श्रीरामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण, वेद, उपनिषद तथा अन्य पूजनीय हिन्दू धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी रोकने के लिए भी समान रूप से कठोर कानूनी प्रावधान किए जाने चाहिए।
वासु रंजन ने कहा कि हिन्दू देवी-देवताओं, धार्मिक प्रतीकों और पवित्र ग्रंथों का अपमान करोड़ों हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाता है। इसलिए राज्य सरकार का दायित्व है कि वह सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाते हुए ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी विधायी व्यवस्था करे।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने तथा धार्मिक आस्था का सम्मान प्राप्त करने का अधिकार देता है। ऐसे में सभी धर्मों की पवित्र आस्थाओं की समान सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे सामाजिक सौहार्द, धार्मिक सद्भाव और आपसी विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
एडवोकेट वासु रंजन ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से आग्रह किया कि पंजाब सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए आगामी विधानसभा सत्र में व्यापक कानून लाने की पहल करे, ताकि किसी भी धर्म के पवित्र ग्रंथों, देवी-देवताओं अथवा धार्मिक प्रतीकों के अपमान पर समान और प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि उन्होंने इस विषय पर औपचारिक रूप से राज्यपाल पंजाब एवं मुख्यमंत्री को पत्र भेज दिया है और उन्हें आशा है कि सरकार सभी धर्मों के सम्मान और सामाजिक सद्भाव को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगी और अगर जरूरत पड़ी तो वह इस मामले में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का रूख करेंगे ।
