कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि वर्तमान समय में आयुष क्षेत्र में करियर की अपार संभावनाएं हैं। विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, कौशल संवर्धन एवं उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुलपति प्रो. धीमान श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता विकास प्रकोष्ठ (आरआईईडीसी) द्वारा आयोजित “आयुष में करियर के अवसर : पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता आयुष लीगल एवं बिजनेस एडवाइजर, इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट एक्सपर्ट तथा आयुष पॉलिसी एवं कंप्लायंस विशेषज्ञ पुनीता के. शर्मा ने विद्यार्थियों को आयुष क्षेत्र में तेजी से बदलते परिदृश्य, स्टार्टअप एवं उद्यमिता, अनुसंधान, नियामकीय अनुपालन (रेगुलेटरी कंप्लायंस) तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध करियर अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से नवाचार की सोच विकसित करने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने, बहुआयामी कौशल विकसित करने तथा आयुष क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता विकास प्रकोष्ठ की समन्वयक डॉ. अनामिका, प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, प्रो. जितेश कुमार पंडा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
