रुक्षेत्र, 12 जून 2026 – गुजरात के माननीय राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी ने वीरवार को सार्वदेशिक आर्यवीर एवं वीरांगना दल द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शिविरों का प्रातःकालीन सत्र में निरीक्षण किया। शिविर में देश के कोने-कोने से आए युवाओं और युवतियों के अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और शौर्य को देखकर राज्यपाल महोदय अत्यंत प्रभावित हुए। इस दौरान सभी आर्यवीर एवं आर्य वीरांगनाओं को अनुभवी प्रशिक्षक सर्वांग सुन्दर व्यायाम, सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार, योगासन सहित आत्म-सुरक्षा हेतु लाठी, तलवारबाजी, जूडो-कराटे आदि का सघन प्रशिक्षण दे रहे थे। वहीं कुछ टोलियों में आर्य वीरांगनाएं डम्बल, लेजियम का बहुत सुन्दर अभ्यास कर रही थीं। आचार्यश्री ने सभी युवाओं को प्रोत्साहित किया।
निरीक्षण के दौरान सबसे आकर्षण का केंद्र रहीं नन्हीं आर्य वीरांगनाएँ। छोटी-छोटी बालिकाओं द्वारा आत्मरक्षा, लाठी संचालन, तलवारबाजी और कड़े शारीरिक अभ्यासों का ऐसा हैरतअंगेज प्रदर्शन किया गया कि महामहिम राज्यपाल भी आश्चर्य और गौरव से भर उठे। नन्हीं वीरांगनाओं के इस अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प को देखकर उन्होंने खुले मन से उनकी सराहना की।
इस अवसर पर सार्वदेशिक आर्यवीर दल न्यास के अध्यक्ष स्वामी देवव्रत जी सरस्वती ने शाखा स्थल पर पहुंचने पर राज्यपालश्री का अभिवादन किया, तत्पश्चात सार्वदेशिक आर्यवीर दल के प्रधान संचालक आचार्य नन्दकिशोर जी ने आचार्यश्री को शिविर में प्रशिक्षण ले रहे युवाओं की एक-एक टोली से मिलाया। इस अवसर पर गुरुकुल के व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, मुख्य संरक्षक संजीव आर्य, महाश्य जयपाल आर्य, जसविन्द्र आर्य, सोममुनि जी, आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के वेद प्रचार अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानन्द जी, रोहताश आर्य, मा. कृष्णपाल आर्य, मुख्य व्यायाम शिक्षक प्रवीण आर्य, वरिष्ठ व्यायाम शिक्षक संदीप आर्य सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। वहीं सार्वदेशिक आर्य वीरांगना दल प्रधान संचालिका श्रीमती व्रतिका आर्या जी श्रीमती मीरा आर्या, श्रीमती विद्योत्मा आर्या, आचार्या दुर्गेश आर्या, व्यायाम शिक्षिका सुश्री दिव्या आर्या, सुश्री खुशबू आर्या, सुश्री कविता आर्या, सुश्री राखी आर्या भी उपस्थित रहीं।
देश भर के आर्यवीरों को ओजस्वी शब्दों में प्रेरित करते हुए राज्यपालश्री आचार्य देवव्रत जी ने कहा, यह शिविर केवल शारीरिक प्रशिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति की जीती-जागती पाठशाला हैं। आज देश के आर्यवीरों को राष्ट्र की रक्षा, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और सनातन संस्कृति के उत्थान के लिए तत्पर रहना होगा। आपकी लाठी और आपका कौशल केवल प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की रक्षा और राष्ट्र सेवा के लिए है। उन्होंने आगे कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती जी के विचारों को आत्मसात कर तैयार हो रहे ये आर्यवीर और वीरांगनाएँ हमारे समाज का सुरक्षित भविष्य हैं। माननीय राज्यपाल जी ने सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा और दल के संयोजकों को ऐसे संस्कारवान और राष्ट्रहित समर्पित शिविरों के सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई दी।
शिविर में भाग ले रहे सभी आर्यवीरों के भोजन, आवास एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था गुरुकुल कुरुक्षेत्र प्रबंधक समिति द्वारा की गई है। गुरुकुल के प्रधान राजकुमार गर्ग सहित समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शिविर के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
