करनाल, 19 मई।  कृषि विज्ञान केंद्र उचानी के संयोजक डॉ. महा सिंह के निर्देशन में गांव रायसन में उर्वरकों के संतुलित उपयोग एवं डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव के विद्यार्थियों के सहयोग से सम्पन्न हुआ, जिनकी उस गांव में नियुक्ति की गई है। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक प्रयोग तथा जल संरक्षण आधारित आधुनिक खेती तकनीकों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र उचानी से डॉ. विजय कुमार कौशिक, डी ई एस (फार्म प्रबंधन) तथा डॉ. किरण कुमारी, डी ई एस (मृदा विज्ञान) ने किसानों को वैज्ञानिक खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। कृषि महाविद्यालय कौल से डॉ. परविंदर बालयान व मृदा वैज्ञानिक डॉ. विशाल गोयल भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
डॉ महा सिंह ने किसानों को धान की सीधी बिजाई में होने वाले फायदे एवं कुछ समस्याओं के निदान के तरीके बताए। उन्होंने खेत की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित करते हुए बताया कि बिना अधिक खर्च के भी हम गोबर की खाद, ढेंचा, मूंग आदि के प्रयोग से भी भूमि की उपजाऊ शक्ति को बढ़ा सकते हैं ।
डॉ. किरण कुमारी ने मृदा एवं जल परीक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने किसानों को खेत से मिट्टी का सही नमूना लेने की वैज्ञानिक विधि का प्रदर्शन करते हुए कहा कि बिना मृदा परीक्षण के उर्वरकों का प्रयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है तथा अनावश्यक खर्च बढ़ता है।
डॉ. विजय कुमार कौशिक ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित एवं आवश्यकता आधारित प्रयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार स्वस्थ माता स्वस्थ बच्चे को जन्म देती है, उसी प्रकार स्वस्थ मिट्टी ही उत्तम एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन दे सकती है। वर्तमान समय में किसान अधिक उत्पादन प्राप्त करने की आशा में रबी एवं खरीफ फसलों में आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है जबकि उत्पादन में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही। इसलिए किसानों को अनुशंसित मात्रा में ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए।
डॉ. कौशिक ने किसानों को कृषि से सम्बंधित स्वयं रोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा की किसान भाई अपनी आमदनी को सिर्फ दोगुना ही नहीं अपितु पांच से दस गुना तक बढ़ा सकते हैं, परन्तु उनको ये पारंपरिक खेती को छोडक़र सब्जियों की खेती, औषधीय पौधों की खेती तथा कृषि से सम्बंधित अन्य रोजगार जैसे डेयरी उद्योग, खुंभी की खेती इत्यादि को अपनाना होगा ।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. परविंदर बालयान ने सभी वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित किसानों का धन्यवाद किया। उन्होंने ग्राम रायसन के सरपंच एवं किसानों का विशेष आभार व्यक्त किया, जिन्होंने कार्यक्रम में भाग लेकर वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त की और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति रुचि दिखाई

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