भारत के आध्यात्मिक ज्ञान एवं शक्ति को पूरा विश्व मानता है
कुरुक्षेत्र, 19 मई : भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान एवं शक्ति को पूरा विश्व मानता है और यही मानव समाज के लिए कल्याण का मार्ग है। मंगलवार को पंच कुंडीय अग्नि तपस्या में बैठने से पूर्व जग ज्योति दरबार में दूर दूर से आए श्रद्धालुओं के साथ महंत राजेंद्र पुरी ने सर्वकल्याण की भावना से हवन यज्ञ में आहुतियां दी। श्रद्धालुओं को महंत राजेंद्र पुरी ने बताया कि वेदों में मंत्रों की ऐसी शक्ति बताई गई है कि शस्त्र भी उनके समक्ष कुछ नहीं कर सकते हैं। मंत्रों में मनुष्य जीवन जीने के वास्तविक उपाय बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो मानव पवित्रता से जीवन व्यतीत करता है, वास्तव में उसका जीवन ही जीवन होता है। अन्य तो मात्र मांस का लोथड़ा बनकर केवल सांस ही लेते हैं। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि कल्याण का मार्ग पाने के लिए प्रत्येक प्राणी सदा लालायित रहता है किन्तु जीवन के स्वार्थ, मोह आदि बंधनों में बंधा होने के कारण वह कल्याण के मार्ग पर न चलकर सदा विनाश का मार्ग ही पकड़ता है और इस मार्ग पर चल कर अपने आप को नष्ट कर लेता है। भारतीय संतों और महापुरुषों ने अपनी तपस्या और साधना से समाज को नई दिशा दी है। अग्नि तपस्या के बीच महंत राजेंद्र पुरी ने श्रद्धालुओं के साथ भगवान श्री राम भक्त हनुमान के भजनों का गुणगान किया एवं मंगल कामना की। इस अवसर गुरविंदर गिल, सुरेंद्र सिंह, वीरभान, जागीर नीमवाला, सोमदत कपूर, जितेंद्र, सुनीता रानी, सतीश कुमार, विनोद कुमार, कमलेश, रामेश्वर सिंह, मीना कुमारी, सुदेश रानी, सुषमा, राजबाला, महिपाल, परमजीत, नंदनी, विभांशु, राहुल, हर्ष, विक्रम वर्मा,नरेंद्र, गुरमेल, जयकुमार,सतनाम सिंह, साहिब सिंह, गगनदीप सिंह, प्रवीण कुमार, राहुल, प्रदीप कुमार, रामेश्वर दास, रंजीत सिंह संधू, मंजीत कौर, राजविंदर कौर, बबली शर्मा, विजयंत गर्ग, उपासना, विजय अरोड़ा, ममता अरोड़ा, कुलवंत सिंह, रजवंत कौर, दिव्या, हरप्रीत सिंह, अजय राठी, विजय राठी, अक्षय राठी, मनप्रीत सिंह मौजूद रहे।
कुरुक्षेत्र, 19 मई : भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान एवं शक्ति को पूरा विश्व मानता है और यही मानव समाज के लिए कल्याण का मार्ग है। मंगलवार को पंच कुंडीय अग्नि तपस्या में बैठने से पूर्व जग ज्योति दरबार में दूर दूर से आए श्रद्धालुओं के साथ महंत राजेंद्र पुरी ने सर्वकल्याण की भावना से हवन यज्ञ में आहुतियां दी। श्रद्धालुओं को महंत राजेंद्र पुरी ने बताया कि वेदों में मंत्रों की ऐसी शक्ति बताई गई है कि शस्त्र भी उनके समक्ष कुछ नहीं कर सकते हैं। मंत्रों में मनुष्य जीवन जीने के वास्तविक उपाय बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो मानव पवित्रता से जीवन व्यतीत करता है, वास्तव में उसका जीवन ही जीवन होता है। अन्य तो मात्र मांस का लोथड़ा बनकर केवल सांस ही लेते हैं। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि कल्याण का मार्ग पाने के लिए प्रत्येक प्राणी सदा लालायित रहता है किन्तु जीवन के स्वार्थ, मोह आदि बंधनों में बंधा होने के कारण वह कल्याण के मार्ग पर न चलकर सदा विनाश का मार्ग ही पकड़ता है और इस मार्ग पर चल कर अपने आप को नष्ट कर लेता है। भारतीय संतों और महापुरुषों ने अपनी तपस्या और साधना से समाज को नई दिशा दी है। अग्नि तपस्या के बीच महंत राजेंद्र पुरी ने श्रद्धालुओं के साथ भगवान श्री राम भक्त हनुमान के भजनों का गुणगान किया एवं मंगल कामना की। इस अवसर गुरविंदर गिल, सुरेंद्र सिंह, वीरभान, जागीर नीमवाला, सोमदत कपूर, जितेंद्र, सुनीता रानी, सतीश कुमार, विनोद कुमार, कमलेश, रामेश्वर सिंह, मीना कुमारी, सुदेश रानी, सुषमा, राजबाला, महिपाल, परमजीत, नंदनी, विभांशु, राहुल, हर्ष, विक्रम वर्मा,नरेंद्र, गुरमेल, जयकुमार,सतनाम सिंह, साहिब सिंह, गगनदीप सिंह, प्रवीण कुमार, राहुल, प्रदीप कुमार, रामेश्वर दास, रंजीत सिंह संधू, मंजीत कौर, राजविंदर कौर, बबली शर्मा, विजयंत गर्ग, उपासना, विजय अरोड़ा, ममता अरोड़ा, कुलवंत सिंह, रजवंत कौर, दिव्या, हरप्रीत सिंह, अजय राठी, विजय राठी, अक्षय राठी, मनप्रीत सिंह मौजूद रहे।
फोटो परिचय : अग्नि तपस्या करते हुए महंत राजेंद्र पुरी।
