चंडीगढ़ – क्या बाहरी राज्यों की अनुसूचित जाति ( एस.सी.- S.C.) महिलाओं को हरियाणा के नगर निकाय चुनाव में आरक्षण का लाभ मिलने पर दोहरे मापदंड हैं ?

ऐसा पढ़ने और सुनने में बेशक आश्चर्यजनक प्रतीत‌ हो, परंतु हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा गत 23 अप्रैल को प्रदेश के 12 जिलों अर्थात जहाँ विभिन्न नगर निकायों के आम चुनाव / उपचुनाव कराने की प्रकिया जारी है नामत: अम्बाला, पंचकूला, सोनीपत, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, करनाल, झज्जर, महेंद्रगढ़ (नारनौल), रेवाड़ी, रोहतक और यमुनानगर  के उपायुक्तों (डी.सी.) को   एक  पत्र मार्फ़त जारी हिदायतों को पढ़कर ऐसा ही  प्रतीत होता है.

23 अप्रैल को जारी  उक्त पत्र हरियाणा के बाहरी   राज्यों में अनुसूचित जाति (एस.सी.), पिछड़ा वर्ग-बी.सी. (ए) और पिछड़ा वर्ग- बी.सी. (बी) से सम्बन्ध रखने वाले  व्यक्तियों के  हरियाणा के नगर निकाय चुनाव में उस जाति-वार्ड विशेष के लिए  आरक्षित सीटों/ वार्डों पर चुनाव लड़ने संबधी स्पष्टीकरण करने हेतू जारी किया गया है.

बहरहाल,  पंजाब एवं हरियाणा  हाईकोर्ट में एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून जानकार  हेमंत कुमार (9416887788) ने राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी  उपरोक्त पत्र का गहन  अध्ययन करने के बाद   बताया कि वास्तव में मूल रूप से गत वर्ष फरवरी, 2025 में आयोग द्वारा जारी पत्र को ही  प्रदेश के 12 जिलों  के उपायुक्तों  को भेजा गया है जिसमें इसे पत्र में दी गयी हिदायतों को  आगामी नगर निकाय चुनाव के लिए पदांकित सभी रिटर्निंग  अधिकारियों (आर.ओ.) और सहायक  रिटर्निंग  अधिकारियों(ए.आर.ओ.) के संज्ञान में लाने और उनकी सख्त अनुपालना करने  का भी उल्लेख किया गया है.

बहरहाल,  हेमंत ने बताया कि हरियाणा राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी उपरोक्त पत्र में चार बिन्दुओं  पर स्पष्टीकरण दिया गया है.

पहला बिंदु यह कि अगर कोई व्यक्ति जो अनुसूचित जाति (एस.सी.) से है और उन्हें हरियाणा से बाहर किसी अन्य राज्य से एस.सी.  का सर्टिफिकेट जारी हुआ हो  परन्तु अब वह व्यक्ति माइग्रेट (स्थानांतरित) होकर हरियाणा में आ गया हो, तो क्या उसे हरियाणा के नगर निकाय चुनाव में एस.सी. आरक्षण का लाभ मिलेगा, इस बारे में स्पष्ट किया गया है कि उस व्यक्ति को एस.सी. आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा.

हेमंत ने बताया कि चूंकि उक्त बिंदु में पर्सन अर्थात व्यक्ति का  उल्लेख किया गया है जिसका अर्थ पुरुष और महिला दोनों होता है अत: सरल भाषा में उपरोक्त स्पष्टीकरण का  अर्थ तो यही निकलता  है कि

एस.सी. वर्ग से सम्बंधित महिलाएं, जो मूल रूप से दूसरे राज्यों से हैं  एवं उन्हें उसी राज्य से एस.सी.  सर्टिफिकेट जारी हो  रखा है, वह अगर हरियाणा में विवाह होने कारण प्रदेश में बहू/ वधू बनती है, तो उन्हें नगर निकाय चुनाव  में  एस.सी. या एस.सी. (महिला ) के लिए आरक्षित सीटों/वार्डों  पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा अर्थात वह महिलाएं एस.सी.  और एस.सी. (महिला) के लिए आरक्षित  वार्डों से चुनाव नहीं लड़  सकती.

दूसरे  बिंदु में हालांकि यह ऐसा स्पष्ट किया गया है कि अगर हरियाणा में एस.सी. वर्ग  के अलावा किसी अन्य आरक्षित वर्ग जैसे  पिछड़ा वर्ग ( बी.सी. अर्थात बी.सी.-ए और बी.सी.-बी )  या अनारक्षित/ सामान्य वर्ग का पुरुष, जिसे हम नॉन-एस.सी. पुरुष  कह सकते हैं,  किसी अन्य राज्य की एस.सी. महिला से विवाह करता है और उस महिला की एस.सी. जाति, जो   हरियाणा में भी एस.सी. सूची   में पड़ती हो, क्या वह दूसरे राज्य की एस.सी. महिला जो हरियाणा के नॉन-एस.सी. पुरुष से विवाह कर हरियाणा में बहू/ वधू बन‌‌‌ कर आई हो, वह  नगर निकाय चुनाव में एस.सी. आरक्षण का लाभ ले सकती है,  इस बारे में स्पष्ट किया गया है कि उस महिला  को  एस.सी. आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा.

हेमंत ने बताया कि उपरोक्त बिंदु नंबर को पढ़ने  के बाद तो

यही निष्कर्ष निकलता है अगर हरियाणा में हालांकि एस.सी. वर्ग  का पुरुष  किसी अन्य राज्य की एस.सी. महिला से विवाह करता है और उस महिला की एस.सी. जाति, जो  हरियाणा में भी एस.सी. सूची  में पड़ती हो, तो  उस दूसरे राज्य की एस.सी. महिला को तो हरियाणा के नगर निकाय चुनाव में एस.सी. आरक्षण का लाभ मिलेगा  बेशक  इस सम्बन्ध  में  ऐसा स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया जो निश्चित तौर पर किया जाना चाहिए जिससे किसी प्रकार का भ्रम उत्पन्न न हो.

हालांकि अगर ऐसा स्पष्ट उल्लेख  किया जाता है, तो एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी खड़ा होगा कि दूसरे राज्यों की एस.सी. वर्ग की  महिलाओं को केवल हरियाणा के एस.सी. वर्ग के पुरुष से विवाह करने पर ही  हरियाणा के नगर निकाय चुनाव में एस.सी. सीट /वार्ड पर आरक्षण का लाभ क्यों मिले, हरियाणा के  नॉन –एस.सी. पुरुष अर्थात पिछड़ा वर्ग ( बी.सी. अर्थात बी.सी.-ए और बी.सी.-बी )  या अनारक्षित/ सामान्य वर्ग के पुरुष

से विवाह करने पर क्यों नहीं ?

बहरहाल, हेमंत‌ ने उपरोक्त विषय पर पूर्ण स्पष्टीकरण के लिए शुक्रवार 24 अप्रैल को देवेन्द्र सिंह कल्याण, राज्य निर्वाचन आयुक्त, हरियाणा, प्रदेश के शहरी निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीणा, विभाग के निदेशक और आला अधिकारियों एवं प्रदेश की विधि एवं विधायी विभाग की प्रशासकीय सचिव अर्थात विधि

By Dr. Rajesh Wadhwa

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