कुरुक्षेत्र, 10 अप्रैल। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग ने स्वास्थ्य और फिटनेस के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए सत्र 2025-26 के लिए जिम और एरोबिक इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स के दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, यह 3 महीने की अवधि का एक प्रोफेशनल कोर्स है, जिसे सेल्फ-फाइनेंसिंग स्कीम के तहत शाम के सत्र में चलाया जाएगा।

लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि इस कोर्स में प्रवेश के लिए कुल 30 सीटें निर्धारित की गई हैं, जबकि विभिन्न श्रेणियों के लिए 17 सुपरन्यूमरेरी सीटें अतिरिक्त रखी गई हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी संकाय से 10+2 उत्तीर्ण छात्र, जिन्होंने न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों, इसके लिए पात्र होंगे। दाखिले की प्रक्रिया पूरी तरह से मेरिट पर आधारित होगी, जिसमें छात्र की योग्यता परीक्षा के अंकों के साथ विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार वेटेज भी जोड़ी जाएगी।
प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि इच्छुक उम्मीदवार विश्वविद्यालय के आधिकारिक एडमिशन पोर्टल https://iums.kuk.ac.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 से शुरू होगी और फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 3 मई 2026 (रात 11.59 बजे तक) तय की गई है। सामान्य श्रेणी के आवेदकों के लिए आवेदन शुल्क 1200 रुपये है, जबकि हरियाणा के अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह शुल्क 300 रुपये रखा गया है। पूरे कोर्स की कुल फीस 6,300 रुपये होगी।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, चयनित उम्मीदवारों की पहली मेरिट सूची 5 मई 2026 को सुबह 10.00 बजे पोर्टल पर जारी की जाएगी। सफल उम्मीदवारों को 5 और 6 मई को शारीरिक शिक्षा विभाग में अपने मूल दस्तावेजों का सत्यापन करवाना होगा और फीस जमा करनी होगी। यदि सीटें खाली रहती हैं, तो 7 मई को विभाग में व्यक्तिगत उपस्थिति के आधार पर अगली सूची जारी की जाएगी। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद, इस सत्र की नियमित कक्षाएं 11 मई 2026 से शुरू कर दी जाएंगी। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैंडबुक ऑफ इंफॉर्मेशन देख सकते हैं।

आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में तकनीकी दक्षता अनिवार्यः प्रो. सुनील ढींगरा
केयू यूआईईटी में अमेरिकन सोसायटी के छात्र अध्याय का समापन
कुरुक्षेत्र, 10 अप्रैल। 
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) में अमेरिकन सोसाइटी ऑफ हीटिंग, वेंटिलेशन एंड एयर कंडीशनिंग के छात्र अध्याय का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन यूआईईटी के एम.वी. सदन में किया गया, जिसमें छात्रों को एचवीएसी उद्योग से जुड़ी वैश्विक संभावनाओं और करियर अवसरों की जानकारी दी गई।

यूआईईटी के निदेशक एवं डीन इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी प्रो. सुनील ढींगरा ने विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए अपने विषय से संबंधित ज्ञान और प्रशिक्षण प्राप्त करना अत्यंत लाभदायक है। इससे उन्हें वैश्विक अवसरों और पेशेवर विकास के लिए बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा तथा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में युवाओं की भूमिका और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि संस्थान इस प्रकार की गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित करता है ताकि छात्रों में नवाचार और तकनीकी दक्षता को बढ़ावा मिल सके।

दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सुदीप टोकी, अमित शर्मा, मनी खन्ना, केतन कुमार भगिरथ तथा मल्लिकार्जुन ए. कंबल्याल ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। सुदीप टोकी ने अमेरिकन सोसाइटी ऑफ हीटिंग, वेंटिलेशन एंड एयर कंडीशनिंग की वैश्विक उपस्थिति और इससे जुड़े करियर अवसरों पर प्रकाश डाला तथा छात्रों को पेशेवर विकास के लिए मार्गदर्शन दिया। वहीं अमित शर्मा ने तकनीकी सोसाइटियों से जुड़ने के महत्व पर चर्चा की।
मैकेनिकल विभाग के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. विशाल अहलावत ने कहा कि यह आयोजन छात्रों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। इससे उन्हें एचवीएसी उद्योग की अपेक्षाओं तथा अंतरराष्ट्रीय तकनीकी संगठनों के माध्यम से उपलब्ध अवसरों की बेहतर समझ मिली।

इस अवसर पर डॉ. उपेंद्र ढुल, डॉ. अनुराधा परीणम, डॉ. सुनील, डॉ. मंजीत बोहत, डॉ. सुनील नैन सहित संस्थान के अनेक शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। इनमें विकास, पंकज, जसनदीप, रविंदर, मयंक, चेतना, नैंसी, आरव, प्रदीप और सूरज सहित कई छात्र शामिल थे।

 
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “कुरुक्षेत्रः थ्रू द एजेस” के दूसरे दिन क्लासिकल कूल बैंड की सांस्कृतिक संध्या ने बांधा समां
कुरुक्षेत्र, 10 अप्रैल। 
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “कुरुक्षेत्रः थ्रू द एजेस” के दूसरे दिन शाम को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर), श्रीमद्भगवद्गीता अध्ययन केंद्र, स्वदेशी शोध संस्थान, जीओ गीता तथा विजन कुरुक्षेत्र के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। सम्मेलन में देश-विदेश से आए विद्वान कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयामों पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।
सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या में क्लासिकल कूल बैंड की संयोजिका प्रभजोत और उनकी टीम ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। बैंड के 11 छात्र-छात्राओं ने शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य, देशभक्ति गीत, सूफी गायन तथा नए-पुराने लोकप्रिय गीतों की श्रृंखला प्रस्तुत कर सभागार में सांस्कृतिक समा बांध दिया। कलाकारों ने अपनी सधी हुई गायकी, भावपूर्ण नृत्य और संगीत के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक परंपराओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
देशभक्ति गीतों और सूफी गायन की प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में शास्त्रीयता और आधुनिकता का सुंदर संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। सांस्कृतिक कार्यक्रम ने न केवल सम्मेलन के शैक्षणिक वातावरण को जीवंत बनाया बल्कि भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि को भी प्रभावी ढंग से सामने रखा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों ने कलाकारों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को समृद्ध बनाते हैं तथा युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि “कुरुक्षेत्रः थ्रू द एजेस” जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के साथ इस प्रकार की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भारतीय इतिहास और संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम बनती हैं।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. आबिद अली और रितु ने प्रभावशाली ढंग से किया और विभिन्न प्रस्तुतियों का सुंदर परिचय देते हुए कार्यक्रम को रोचक बनाए रखा।
इस अवसर पर प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा, विजन कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष मदन मोहन छाबड़ा, प्रो. आर.के. देसवाल, प्रो. भगत सिंह, प्रो. अमित लुदरी, डॉ. सरिता आर्य, डॉ. रामचंद्र, डॉ. सी.डी.एस. कौशल, दर्शन कुमार, संजीव कुमार, रणदीप तथा सहित अनेक शिक्षाविद, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कविता से विकसित होती है संवेदनशीलता और सृजनात्मकता” — प्रो. सुनीता सिरोहा
कुरुक्षेत्र , 10 अप्रैल । 
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में साहित्यिक क्लब, अंग्रेज़ी विभाग के तत्वावधान में विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग के सेमिनार हॉल में अंतर-विभागीय काव्य-पाठ प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में कविता के प्रति रुचि विकसित करना तथा सार्वजनिक वक्तृत्व और साहित्यिक अभिव्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ाना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ  मुख्य अतिथि प्रो. सुनीता सिरोहा, डीन, कला एवं भाषा संकाय एवं आईसीसी की अध्यक्षा की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। डॉ. हरविंदर कौर, सहायक प्राध्यापक, अंग्रेज़ी विभाग ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कविता को भावनात्मक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया।
इस अवसर पर प्रो. सुनीता सिरोहा ने अपने संबोधन में कहा कि कविता विद्यार्थियों में कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और भाषाई सृजनात्मकता का विकास करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियाँ आत्मविश्वास, आलोचनात्मक सोच और सांस्कृतिक समझ को सुदृढ़ बनाती हैं तथा मानवीय मूल्यों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. ब्रजेश साहनी ने की। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के 09 विभागों से 30 प्रतिभागियों ने भाग लेकर हिंदी एवं अंग्रेज़ी में अपनी कविताओं का प्रभावशाली पाठ प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों का मूल्यांकन निर्णायक मंडल—डॉ. विक्रम खर्ब, डॉ. रमेश एवं डॉ. प्रिया गौतम—द्वारा उच्चारण, अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और समग्र प्रस्तुति के आधार पर किया गया।
प्रतियोगिता में बी.एससी. फिजिकल साइंस (चतुर्थ सेमेस्टर, आईआईएचएस) की छात्रा सुश्री परीक्षा ने प्रथम स्थान प्राप्त कर ₹1100 का नकद पुरस्कार जीता। एम.ए. अंग्रेज़ी की छात्रा सुश्री कल्पना ने द्वितीय स्थान (₹700) तथा सुश्री हुसनप्रीत कौर ने तृतीय स्थान (₹500) प्राप्त किया।
अंत में डॉ. विक्रम खर्ब ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, निर्णायक मंडल, प्राध्यापकों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन एम.ए. अंग्रेज़ी अंतिम वर्ष की छात्रा अंकिता ढांडा द्वारा किया गया।
काउंसलिंग कौशल का महत्व समय की जरूरतः प्रो. अनामिका गिरधर
केयू में ‘काउंसलिंग स्किल्स’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित

कुरुक्षेत्र, 10 अप्रैल। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा 9 व 10 अप्रैल 2026 को “काउंसलिंग स्किल्स” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को परामर्श से जुड़े व्यावहारिक कौशलों से परिचित कराना था, ताकि वे जीवन और व्यावसायिक क्षेत्रों में इन कौशलों का प्रभावी उपयोग कर सकें।

विभागाध्यक्ष प्रो. अनामिका गिरधर ने बताया कि आज के समय में काउंसलिंग कौशल का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल अकादमिक दृष्टि से बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी समस्याओं को समझने और समाधान खोजने में मदद करते हैं। कार्यशाला की मुख्य वक्ता एनआईटी, कुरुक्षेत्र की डॉ. अंजली तनेजा रहीं। उन्होंने प्रतिभागियों को काउंसलिंग की मूलभूत अवधारणाओं के साथ-साथ इसके व्यावहारिक पक्षों से भी अवगत कराया। अपने व्याख्यान में उन्होंने प्रभावी संवाद, सहानुभूतिपूर्ण श्रवण तथा सही प्रकार से प्रश्न पूछने की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की और प्रतिभागियों के लिए एक डेमो सत्र भी आयोजित किया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न गतिविधियों, संवाद सत्रों और अभ्यासों के माध्यम से यह समझाया गया कि काउंसलिंग स्किल्स किस प्रकार व्यक्ति के विचारों, भावनाओं और अनुभवों को बेहतर ढंग से समझने में सहायक होते हैं।

इस अवसर पर दर्शन विभाग के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अध्यापकों के साथ-साथ अन्य विभागों के प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

 
‘मन पंखी भइओ’ के माध्यम से गुरमत दर्शन को उपन्यास रूप में अभिव्यक्ति: डॉ. मनमोहन
 पंजाबी विभाग की ‘पंजाबी साहित्य सभा’ द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार 
कुरुक्षेत्र, 10 अप्रैल। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग की ‘पंजाबी साहित्य सभा’ द्वारा शुक्रवार को गणपति चंद्र गुप्त सेमिनार हॉल में ‘दर्शन का उपन्यासीकरण: मन पंखी भइओ’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रसिद्ध लेखक डॉ. मनमोहन के उपन्यास ‘मन पंखी भइओ’ के साहित्यिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक पक्षों पर विमर्श करना रहा।

सेमिनार का उद्घाटन करते हुए पंजाबी विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ‘मन पंखी भइओ’ डॉ. मनमोहन का अत्यंत महत्वपूर्ण उपन्यास है। उन्होंने कहा कि पंजाब की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक पहचान, राजनीतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा तथा दार्शनिक विविधता को समझने के लिए इस उपन्यास का दस्तावेजी महत्व है।

उद्घाटन सत्र में प्रो. मनिंदर सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपन्यास पाठक से सहजता और गहन संवेदनशीलता की अपेक्षा करता है। उन्होंने कहा कि उपन्यास को पढ़ते समय इसकी कथावस्तु किसी परी कथा की तरह प्रतीत होती है, लेकिन इसके भीतर गहरे दार्शनिक तत्व निहित हैं। उन्होंने कहा कि ‘मन पंखी भइओ’ पंजाबी साहित्य में गुरमत परंपरा पर आधारित पहला दार्शनिक उपन्यास है। उन्होंने यह भी बताया कि पंजाबी उपन्यासों में गुरमत दर्शन से संबंधित ऐतिहासिक कृतियों की परंपरा तो रही है, किंतु दार्शनिक उपन्यासों की संख्या बहुत कम है। डॉ. मनमोहन ने इस परंपरा को नए आयाम दिए हैं।

विशेष अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ. मनमोहन ने कहा कि मूल रूप से वे एक कवि हैं, किंतु सुधीर कक्कड़ के उपन्यास ‘द एस्थेटिक ऑफ डिज़ायर’ को पढ़ने के बाद उनके मन में उपन्यास लिखने की प्रेरणा उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि जहाँ कहानी एक घटना के इर्द-गिर्द घूमती है, वहीं उपन्यास का कथानक एक फिल्म की तरह बहुआयामी होता है। उन्होंने बताया कि ‘मन पंखी भइओ’ सच्ची घटनाओं से प्रेरित है और इसके पात्र समाज में मौजूद वास्तविक अनुभवों से जुड़े हुए हैं।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कला एवं भाषा संकाय के पूर्व डीन प्रो. नरविंदर सिंह कौशल ने कहा कि किसी भी पुस्तक को पढ़ते समय हमें निष्पक्ष दृष्टि अपनानी चाहिए। यदि हम किसी एक पक्ष के साथ खड़े हो जाते हैं तो कृति के वास्तविक अर्थ सामने नहीं आ पाते। उन्होंने कहा कि ‘मन पंखी भइओ’ में मनुष्य के अंतर्द्वंद्व और जीवन की जटिलताओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. राज कुमार हंस ने कहा कि कोई भी रचना तब तक लेखक की होती है, जब तक वह पाठकों तक नहीं पहुँचती; पाठकों के बीच पहुँचने के बाद वह समाज की सामूहिक धरोहर बन जाती है। उन्होंने कहा कि ‘मन पंखी भइओ’ डॉ. मनमोहन के अन्य उपन्यासों की तुलना में विशिष्ट है और इसमें पंजाब के इतिहास, संस्कृति तथा संगीत परंपराओं से जुड़े अनेक पहलुओं को समाहित किया गया है।

कार्यक्रम के तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. परवीन कुमार, सहायक प्रोफेसर, पंजाबी विभाग, सीडीओई, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ तथा डॉ. अमरजीत सिंह, जगत गुरु नानक देव पंजाब राज्य मुक्त विश्वविद्यालय, पटियाला ने की। इस सत्र में डॉ. हरजिंदर सिंह सिद्धू, डॉ. धर्मिंदर सिंह, डॉ. बीरबल सिंह, डॉ. गगनदीप कौर और जगमोहन सिंह ने अपने शोध पत्रों के माध्यम से ‘दर्शन का उपन्यासीकरण: मन पंखी भइओ’ विषय पर गंभीर विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. लता खेड़ा ने किया, जबकि अंत में डॉ. गुरप्रीत सिंह साहूवाला ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. पुष्पा रानी, प्रो. नीरा राघव, डॉ. जतिंदर शर्मा, कैप्टन परमजीत सिंह सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रोफेसर, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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