केयू यूआईईटी संस्थान में अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल कमीशन के नामित विशेषज्ञ ने बिजली गुणवत्ता पर दिया विशेष व्याख्यान
कुरुक्षेत्र, 23 दिसम्बर। 
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूआईईटी संस्थान में ‘आधुनिक और भविष्य के ऊर्जा ग्रिडों में हार्मोनिक्स और बिजली की गुणवत्ता द्वारा उत्पन्न चुनौतियों’ विषय पर आधारित विशेष व्याख्यान में डेनमार्क से आए अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल कमीशन के नामित विशेषज्ञ डॉ. दिनेश कुमार ने कहा कि विकसित भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र को उन्नत करने की जरूरत है। इसके लिए मौजूदा और भविष्य के ग्रिडों में बिजली की गुणवत्ता की चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य के ग्रिड को ऐसे मानकों की आवश्यकता है जो उससे जुड़ी प्रौद्योगिकियों की तरह ही तेजी से विकसित हों। गौरतलब है कि डॉ. दिनेश कुमार डेनमार्क की रिसर्च लैब में बतौर इंजीनियरिंग विशेषज्ञ कार्यरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में फ्रिक्वेंसी लेवल अलग है जिस पर निरंतर कार्य चल रहा है।
डॉ. कुमार ने बताया कि हम किस प्रकार हार्मोनिक्स औद्योगिक उपकरणों और वितरण ट्रांसफार्मर में कैपेसिटर जैसे प्रमुख घटकों तथा अक्षय ऊर्जा प्रवेश वाली साइटों, जैसे कि सौर फार्म और पवन-आधारित माइक्रोग्रिड, उपयोगिताओं ने कैपेसिटर विफलता और ट्रांसफार्मर ओवरहीटिंग की समस्या को कैसे दूर कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए उन्होंने नई शमन तकनीकों की एक श्रृंखला विकसित की है। उनके समाधान, दो स्वीकृत पेटेंट और कई प्रकाशनों द्वारा समर्थित, लागत प्रभावी और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं जिन्हें नए और मौजूदा दोनों प्रणालियों में एकीकृत किया जा सकता है। पेटेंट किए गए तरीकों में से एक में कनवर्टर का एक नया डिज़ाइन शामिल है जो ग्रिड स्थितियों के लिए गतिशील रूप से अनुकूल होता है तथा ओवरहीटिंग की समस्या को कम करता है। यह विशिष्ट व्याख्यान इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स व इंडस्ट्री एप्लीकेशन सोसायटी, दिल्ली चैप्टर द्वारा प्रायोजित किया गया था। इस अवसर पर केयू यूआईईटी संस्थान के शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद थे।
कुवि के वाणिज्य विभाग का विद्यार्थियों ने किया शैक्षणिक भ्रमण
कुरुक्षेत्र, 23 दिसम्बर।
 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में जी.एस.एस.एस. किठाना के विद्यार्थियों ने स्कूल के अध्यापकों रेनू व नरेंद्र के साथ शैक्षणिक भ्रमण किया।
इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने व्यावसायिक विषय बैंकिंग व इंश्योरेंस पर वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. महावीर नरवाल के साथ  चर्चा की। उन्होंने बताया कि आज के समय में बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर बहुत तेजी से विकास कर रहे है। इन क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के बारे में भी विद्यार्थियों को अवगत कराया । उसके बाद विभाग की शोधकर्ता प्रीति गिल व कवलजीत कौर ने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की।  उन्होंने संचार कौशल, व्यक्तिगत विकास, विषय ज्ञान, आंतरिक व बाहरी प्रेरणा पर विद्यार्थियों के साथ चर्चा की। अंत में प्रश्न उत्तर सत्र में विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान करके उन्हें प्रेरित किया गया व उनके सुखद भविष्य की कामना की गई। इस कार्यक्रम में 50 से ज्यादा विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
 
केयू यूजीसी एमएमटीटीसी अभिविन्यास सत्र में दी नैक मूल्यांकन एवं एनईपी 2020 की जानकारी
कुरुक्षेत्र, 23 दिसम्बर। 
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूजीसी मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में आयोजित दूसरे सत्र में उच्च शिक्षा नीति के प्रमुख विशेषज्ञ केयू डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. दिनेश कुमार ने नैक मूल्यांकन और मान्यता ढांचाः एनईपी 2020 के अनुसार बाइनरी मान्यता विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में शैक्षिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं, शिक्षण विधियों, बुनियादी ढांचे, और छात्र समर्थन सेवाओं का मूल्यांकन किया जाता है, और नैक की मान्यता पाठ्यक्रम डिज़ाइन, शिक्षण-सीखने की प्रक्रियाओं, अनुसंधान आउटपुट और शासन जैसी मानदंडों पर आधारित होती है। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 का उद्देश्य गुणवत्ता आश्वासन को बेहतर बनाना है, जिससे संस्थानों के लिए स्पष्ट, सरल और अधिक सुलभ मानदंड तैयार किए जा सकें। बाइनरी मान्यता ऐसी स्थिति में उभर सकती है, जहां संस्थान यह निर्धारित करते हैं कि वे कुछ आवश्यक मानकों को पूरा करते हैं या नहीं।
वहीं पहले सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल, उत्तराखंड के प्लेसमेंट सेल की निदेशक प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी ने स्कूल पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल-निर्माण पाठ्यक्रमों को जल्दी शुरू करने बात पर जोर दिया जिसमें व्यावसायिक और सॉफ्ट स्किल्स भी शामिल हो। उन्होंने यह भी बताया कि व्यावसायिक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा तैयार किया जा रहा है, जो कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों के विकास और कार्यान्वयन का मार्गदर्शन करेगा। प्रभावी कौशल विकास के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में व्यावसायिक कौशल सिखाने और कौशल-आधारित कार्यक्रमों का प्रबंधन करने के लिए अच्छी तरह से प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता है।
कोर्स समन्वयक डॉ. सुमन बाला ने दोनों सम्मानित वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया और केयू यूजीसी मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की निदेशक प्रो. प्रीति जैन के मार्गदर्शन और समर्थन के लिए भी आभार व्यक्त किया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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