कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए गौरव, संकल्प और पवित्र भावनाओं का दिन है। महर्षि दधीचि ने लोक कल्याण और देवताओं की रक्षा के लिए अपने शरीर की अस्थियों का दान किया था। उसी महान परंपरा को जीवित रखने के उद्देश्य से देहदान, अंगदान और नेत्रदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।
वे शनिवार को महर्षि दधीचि देहदान समिति की प्रथम बैठक में संबोधित कर रहे थे। बैठक में आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, महर्षि दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष अशोक रोशा, एमके मोदगिल, रचना शरीर विभाग के अध्यक्ष प्रो. सतीश वत्स, प्रो. सचिन शर्मा, डॉ. आशीष नांदल समेत अन्य समाजसेवी विशेष रूप से उपस्थित रहें।
बैठक में निर्णय लिया गया कि आगामी 19 सितंबर 2026 को सन्निहित सरोवर पर महर्षि दधीचि जयंती मनाई जाएगी। कार्यक्रम के अनुसार सन्निहित सरोवर पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही पौध रोपण और रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। कुलपति प्रो. धीमान ने सुझाव दिया कि जो पौधे सरोवर पर लगाए जाएंगे, उनकी बच्चों की तरह देखभाल का जिम्मा भी उठाया जाए।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. धीमान ने कहा कि मृत्यु अटल सत्य है,लेकिन मृत्यु के बाद यदि हमारा शरीर किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में नई रोशनी ला सके, किसी को नई दृष्टि दे सके या चिकित्सा शिक्षा एवं शोध के काम आ सके, तो इससे बड़ा परोपकार शायद ही कोई हो। उन्होंने कहा कि महर्षि दधीचि के त्याग और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक हमारे देश के सर्वोच्च वीरता सम्मान से जुड़ा होना भारतीय संस्कृति और हमारी गौरवशाली परंपरा की महानता को दर्शाता है।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार रोशा ने महर्षि दधीचि के सर्वोच्च बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी त्याग और बलिदान की भावना केवल धार्मिक एवं पौराणिक संदर्भों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में राष्ट्र और समाज के लिए सर्वोच्च बलिदान की प्रेरणा देती है। उन्होंने बताया कि परमवीर चक्र के डिजाइन से जुड़े प्रसंग में भी महर्षि दधीचि के महान त्याग को प्रेरणा के रूप में देखा गया है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च बलिदान की अवधारणा को समझने के लिए विभिन्न स्रोतों और भारतीय धर्मग्रंथों का अध्ययन किया गया और महर्षि दधीचि की कथा ने विशेष रूप से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि महर्षि दधीचि की परंपरा को केवल स्मरण करने तक सीमित नहीं रखना है,बल्कि इसे जन-जन तक पहुंचाना है। इसके लिए समिति के सदस्य समाज के अधिक से अधिक लोगों को देहदान, अंगदान एवं नेत्रदान के लिए प्रेरित करें और सदस्यता अभियान को गति दें।
समिति की बैठक में नौ प्रमुख विषयों पर हुई चर्चा
बैठक में समिति के सदस्यों का औपचारिक पंजीकरण, समिति के कानूनी एवं प्रशासनिक स्वरूप,समिति के कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बैंक खाता खुलवाने का प्रस्ताव रखा गया। समिति के उद्देश्यों एवं कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। समाज में देहदान,अंगदान एवं नेत्रदान के प्रति जागरूकता अभियान चलाने की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के साथ सहयोग एवं समन्वय स्थापित करने समेत अन्य बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर रविंद्र अग्रवाल, कमलेश धीमान, अजय, जयप्रकाश, जितेंद्र मास्टर, चंद्र शेखर, रामपाल, रामचंद्र सिंह, महाबीर सिंह, विनोद, कैलाश गोयल, अशोक, राजेंद्र कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।