कुरुक्षेत्र, 15 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एवं यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार सप्ताह के फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम के 11वें दिन सभी चारों शैक्षणिक सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुए।
प्रथम एवं द्वितीय सत्र में एमडीआई गुरुग्राम के पूर्व निदेशक एवं मार्केटिंग प्रोफेसर डॉ. मुकुल गुप्ता ने शैक्षणिक नेतृत्व के महत्व विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने 20वीं शताब्दी से वर्तमान तक नेतृत्व की विभिन्न शैलियों के विकास का उल्लेख करते हुए वितरित शैक्षणिक नेतृत्व की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने उच्च शिक्षा प्रणाली में हो रहे परिवर्तनों, बहुविषयक शिक्षा की आवश्यकता तथा प्रभावी शैक्षणिक नेतृत्व की भूमिका पर विशेष बल दिया।
दोपहर बाद आयोजित तृतीय सत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. सी. आर. ड्रोलिया ने 21वीं सदी में सामाजिक विज्ञान अनुसंधान, चिंता के विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने व्यवस्थित अनुसंधान योजना, सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में नई तकनीकों की भूमिका तथा डिजिटल परिवर्तन, बिग डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सामुदायिक सहभागिता आधारित अनुसंधान जैसे उभरते शोध रुझानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनुसंधान में नवाचार के साथ नैतिकता, समावेशिता और पारदर्शिता का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
चतुर्थ सत्र में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली के वरिष्ठ संकाय सदस्य (वित्त एवं ऑपरेशन्स रिसर्च) डॉ. पवन कुमार तनेजा ने व्यक्तिगत भावनात्मक विकास विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने आत्म-जागरूकता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता तथा चिंतनशील नेतृत्व की आदतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक विकास के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति ने सभी रिसोर्स पर्सन्स एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सफल संचालन में एफआईपी समन्वयक प्रो. अनिल कुमार मित्तल तथा सह-समन्वयक डॉ. भंवर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
