कुरुक्षेत्र, 18 जून। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हमें रोजगार मांगने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बनना होगा। सरकारी नौकरी के पीछे भागने की बजाय युवा नवाचार एवं उद्यमिता के माध्यम से अपना काम शुरू करें। यह विचार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो सोमनाथ सचदेवा ने गुरुवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय स्थित यूनिवर्सिटी सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल में उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित राज्य स्तरीय सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के समापन अवसर पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज के युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा ही नवाचार एवं उद्यमिता द्वारा ही विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है। नवाचार के माध्यम से नई तकनीकों, उत्पादों और सेवाओं का विकास कर युवा न केवल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान भी प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, सेवा भावना और सकारात्मक सोच ही सफलता का आधार हैं।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने स्वयंसेवकों को पंच परिवर्तन की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों के प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के सकारात्मक परिवर्तन से संभव होता है। उन्होंने बताया कि पंच परिवर्तन के अंतर्गत सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्यों के पालन पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति इन पांच क्षेत्रों में स्वयं को बदलने का प्रयास करे तो समाज और राष्ट्र में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है। स्कूल परिसर में पहुंचने पर कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा का स्कूल की वाइस चेयरमैन प्रो. सुनीता दलाल, प्रधानाचार्य डॉ. सुखविंद्र सिंह, एनएसएस के जिला कोऑर्डिनेटर डॉ. गिरधारी लाल शर्मा, प्रवीण शर्मा व डॉ. सुशील टाया ने स्वागत किया।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने उदाहरण देते हुए कहा कि जाति, वर्ग और भाषा के भेदभाव से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता को अपनाना, परिवार में संस्कारों और मूल्यों को सुदृढ़ करना, प्रकृति एवं पर्यावरण की रक्षा करना, अपनी संस्कृति और विरासत पर गर्व करना तथा अपने नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्रसेवा है। उन्होंने कहा कि एनएसएस स्वयंसेवकों को इन मूल्यों का वाहक बनकर समाज में जागरूकता फैलानी चाहिए। प्रो. सचदेवा ने कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है। यदि युवा अपने ज्ञान, कौशल और ऊर्जा का उपयोग समाजहित में करें तो राष्ट्र को नई दिशा मिल सकती है।
स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. सुखविंद्र सिंह ने मुख्य अतिथि प्रो. सोमनाथ सचदेवा का स्वागत करते हुए शिविर के बारे में विस्तार से बताया।
समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने शिविर के दौरान किए गए विभिन्न सामाजिक, पर्यावरणीय एवं जागरूकता संबंधी कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। स्कूल की वाइस चेयरमैन प्रो. सुनीता दलाल ने छात्रों को जीवन में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, सेवा भावना और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रहा। अंत में मुख्यातिथि ने शिविर के सफल आयोजन के लिए आयोजकों एवं स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। शिविर में भारतीय योग संस्थान की टीम को सम्मानित किया गया । इसके अतिरिक्त सभी एनएसएस अधिकारी, डॉ. सुशील टाया, पंकज शर्मा को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्कूल की वाइस चेयरमैन प्रो सुनीता दलाल, कुका के अध्यक्ष प्रो. अनिल मित्तल, प्रवीण शर्मा, अनिल अत्री, रामनिवास, मीनाक्षी, दिव्या रानी, प्रीतम कुमार, बंसी लाल, नरेश कुमार, नरेंद्र, कविता, डॉ. सुशील टाया, सतीश, सुनील, महेंद्र शर्मा, ईश्वर, राकेश कुमार, संदीप सहित एनएसएस अधिकारी, शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
