करनाल, 12 जून।  केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्ष के कार्यकाल के दौरान आमजन के कल्याणार्थ अनेक योजनाएं शुरू की गई हैं। जिनका सीधा लाभ जिले के पात्र लोगों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंच रहा है। वहीं हरियाणा सरकार द्वारा भी आमजन के जीवन को आसान बनाने के लिए अनेक कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा प्रो-एक्टिव व्यवस्था लागू की गई है जिससे पात्र नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। इस प्रणाली के तहत स्वत: सत्यापन के बाद पेंशन घर बैठे ही शुरू कर दी जाती है। वर्ष 2022 से अब तक 45 हजार 381 लोगों की घर बैठे ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन बनी है। उन्हें न तो योजना के लिए आवेदन करना पड़ा और न ही कार्यालयों के चक्कर काटने पड़े। वहीं सरकार ने पिछले 12 वर्षो के कार्यकाल में कई बार पेंशन की राशि को बढ़ाया है।

सरकार का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। इसी दिशा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को प्रो-एक्टिव मोड में लागू किया गया है, जिससे पात्र व्यक्तियों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। पीपीपी में दर्ज आंकड़ों के आधार पर पात्रता पूरी होने पर विभाग स्वयं कार्रवाई कर लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ता है। सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। दिव्यांग पेंशन के लिए दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा को 70 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही दिव्यांगता की श्रेणियों की संख्या 7 से बढ़ाकर 21 कर दी गई है, जिससे अधिक से अधिक दिव्यांगजन योजनाओं का लाभ उठा सकें।

जिला समाज कल्याण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में जिले में 2 लाख 90 हजार से अधिक लाभार्थी विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन एवं वित्तीय सहायता योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। जिले में 1 लाख 34 हजार 84 वृद्धजन वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना के तहत प्रतिमाह 3,200 रुपये प्राप्त कर रहे हैं, जबकि 61 हजार 857 विधवा एवं निराश्रित महिलाओं को भी प्रतिमाह 3,200 रुपये की सहायता दी जा रही है। इसी प्रकार 53 हजार 464 महिलाओं को दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत प्रतिमाह 2,100 रुपये का लाभ मिल रहा है।

इसी प्रकार 15 हजार 189 निराश्रित बच्चों को वित्तीय सहायता, 9 हजार 930 दिव्यांगजनों को दिव्यांग पेंशन, 5 हजार 307 विधुर एवं अविवाहित व्यक्तियों को वित्तीय सहायता तथा 2 हजार 51 महिलाओं को लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ता प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा 673 मंदबुद्धि बच्चों, 461 कैंसर रोगियों तथा 8 बौना एवं 1 किन्नर लाभार्थी को भी सरकार द्वारा नियमित आर्थिक सहायता दी जा रही है। एसिड अटैक पीड़ितों को उनकी दिव्यांगता के प्रतिशत के अनुसार 8 हजार रुपये से 14 हजार 400 रुपये तक मासिक सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।

सरकार द्वारा दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब 1.80 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले उन परिवारों की महिलाओं को भी योजना में शामिल किया गया है जिनके बच्चे कुपोषण से बाहर आए हैं, जिन्होंने सरकारी विद्यालयों में अध्ययन करते हुए 10वीं अथवा 12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं या निपुण भारत मिशन के अंतर्गत निर्धारित ग्रेड हासिल किए हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा 17,491 निराश्रित बच्चों को प्रतिमाह  4,600 रुपये तक (2,300 रुपये प्रति बच्चा) की आर्थिक सहायता सरल पोर्टल के माध्यम से  दी जा रही है। इसी प्रकार विदुर एवं अविवाहित वित्तीय सहायता सरकार द्वारा शुरू की गई इस नई श्रेणी में जिले के 4,097 विदुर व अविवाहित व्यक्तियों को 3,200 रुपये मासिक सहायता दी जा रही है। इसी प्रकार लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ता के तहत 3,469 लाभार्थी, कैंसर पीडि़तों के लिए 360 लाभार्थी, तथा स्कूल न जाने वाले मंदबुद्धि बच्चों के लिए 892 लाभार्थियों को मासिक पेंशन दी जा रही है। समाज कल्याण विभाग का मुख्य लक्ष्य मुख्यमंत्री के अंत्योदय विजन को धरातल पर उतारना है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को बिना किसी बिचौलिए या परेशानी के उसका हक सीधे उसके बैंक खाते में मिल सके।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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