कुरुक्षेत्र, 11 जून : जग ज्योति दरबार में वीरवार को महंत राजेंद्र पुरी की प्रेरणा से भारी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं मस्ती से भरा भजन संकीर्तन किया। श्रद्धालुओं ने बताया कि हर वर्ष की भांति अग्नि तपस्या समापन उपरांत पड़ने वीरवार को विशेष तौर पर जग ज्योति दरबार में महंत राजेंद्र पुरी से आशीर्वाद लेने तथा सत्संग में शामिल होने के लिए विभिन्न राज्यों से पहुंचते हैं।
इस मौके पर हवन यज्ञ भी हुआ जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ आहुतियां डाली। इस के उपरांत सत्संग में महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल शरीर तक सीमित नहीं है। उसमें आत्मा का एक अदृश्य महत्व भी होता है।
इसी आत्मिक यात्रा में दो सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं भक्ति और श्रद्धा। उन्होंने कहा कि ये दोनों शब्दों में सरल लगते हैं लेकिन इनका भाव एवं महत्व अत्यंत गहरा है। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि भक्ति का अर्थ है पूर्ण समर्पण और प्रेमपूर्वक भगवान या गुरु की ओर झुकाव। यह कर्मों की नहीं भावनाओं की यात्रा है। उन्होंने कहा कि जब मन, वचन और कर्म तीनों भगवान की ओर केंद्रित हो जाते हैं तब भक्ति की उत्पत्ति होती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मीरा बाई की भक्ति श्रीकृष्ण के प्रति ऐसी थी कि उन्होंने संसार की परवाह किए बिना अपना जीवन उन्हीं के नाम कर दिया।
महंत राजेंद्र पुरी ने बताया कि इसी प्रकार श्रद्धा का अर्थ है अदृश्य पर विश्वास। वह शक्ति जो बिना देखे, बिना समझे, बिना प्रमाण के भी हमें आगे बढ़ने का साहस देती है। श्रद्धा आत्मा की वह आंख है जिससे हम उस सत्ता को पहचानते हैं जो हमारी इंद्रियों से परे है। जिस प्रकार भगवान श्रीराम के प्रति वीर हनुमान की श्रद्धा इतनी प्रबल थी कि उन्होंने अपने अस्तित्व को रामनाम में ही विलीन कर दिया। इस अवसर पर भजनों में मस्ती में श्रद्धालु खूब झूमे।
इस मौके पर केवल चंद शास्त्री, भाग चंद, सतविंदर सिंह, नसीब सिंह, फतेह चंद, गुरदीप कुमार, प्रदीप कुमार, विजय राठी, अजय राठी, अक्षय राठी एवं कन्हैया लाल इत्यादि मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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