कुरुक्षेत्र, 11 जून। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भू-भौतिकी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं अध्यक्ष तथा सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज इन अर्थक्वेक साइंसेज के समन्वयक प्रो. बी.एस. चौधरी को जर्मन अकादमिक एक्सचेंज सर्विसेज (डीएएडी) द्वारा आयोजित दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रीय कार्यशाला में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला 14 से 16 जून, 2026 तक बांग्लादेश के ढाका स्थित डैफोडिल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में आयोजित होगी, जिसमें दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के विशेषज्ञ, शोधकर्ता और डीएएडी एलुमनाई भाग लेंगे।
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस विषय पर केंद्रित इस कार्यशाला का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, वैज्ञानिक ज्ञान का आदान-प्रदान करना तथा इस वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए क्षमता निर्माण को मजबूत करना है। कार्यशाला के दौरान प्रो. चौधरी “राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जल गुणवत्ता संबंधी चिंताओं के एकीकरण हेतु भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग – हरियाणा राज्य के अनुभव” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। उनकी यह यात्रा पूर्ण रूप से डीएएडी, जर्मनी द्वारा प्रायोजित है।
प्रो. बी.एस. चौधरी ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन से विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहभागिता से न केवल शोधकर्ताओं को वैश्विक अनुभव प्राप्त होता है, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है।
इसके अतिरिक्त प्रो. चौधरी को पहली बार बांग्लादेश के यूनिवर्सिटी ऑफ चिटगांव के भूगोल एवं पर्यावरण अध्ययन विभाग स्थित लैब ऑफ जियोइंफॉर्मेटिक्स एंड अर्थ ऑब्जर्वेशन रिसर्च में विशिष्ट वक्ता के रूप में भी आमंत्रित किया गया है। वहां वे 18 और 19 जून, 2026 को “भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में नवीनतम विकास रू पृथ्वी अवलोकन परिप्रेक्ष्य” तथा “दक्षिण एशिया में जल संसाधन स्थिरता के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी” विषयों पर विशेष व्याख्यान देंगे।
प्रो. चौधरी को शिक्षण, अनुसंधान और शैक्षणिक प्रशासन का 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे प्राकृतिक संसाधनों के मानचित्रण एवं प्रबंधन, जल संसाधन, आपदा एवं पर्यावरण प्रबंधन, हाइड्रो जियोफिजिक्स तथा निकट-सतही भू-भौतिकी जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर चुके हैं। उनके 100 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं तथा सम्मेलनों में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने 14 पीएच.डी. शोधार्थियों तथा 45 से अधिक एम.टेक. शोध प्रबंधों का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया है। प्रो. चौधरी चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी के संस्थापक कुलसचिव तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वे इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ हाइड्रोजियोलॉजिस्ट्स के भारतीय राष्ट्रीय अध्याय के उपाध्यक्ष (2026-28) के रूप में कार्यरत हैं तथा वर्ष 2019 से इसकी ऑनलाइन पत्रिका ‘ई-जर्नल ऑफ जियोहाइड्रोलॉजी’ के कार्यकारी संपादक भी हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रो. चौधरी को यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रीबर्ग, जर्मनी में डीएएडी फेलोशिप प्राप्त हो चुकी है। उन्हें ऑस्ट्रिया के विएना में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार, वर्ष 2022 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का बेस्ट रिसर्चर (कोलैबोरेशन) अवार्ड तथा वर्ष 2024 में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के हाइड्रोजियोलॉजी में अनुप्रयोग के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक के उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया था। उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड्स, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड सहित अनेक देशों की शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक यात्राएं की हैं।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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