कुरुक्षेत्र, 30 जुलाई 2026: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय वरिष्ठ माध्यमिक आदर्श विद्यालय के सभागार में आयोजित दो दिवसीय ‘नृत्य महोत्सव (कार्यशाला)’ का आज सफलतापूर्वक एवं गरिमामय माहौल में समापन हुआ। यह दो दिवसीय महोत्सव जयपुर घराने के सुप्रसिद्ध एवं कालजयी कथक गुरु स्वर्गीय पंडित कुंदन लाल गंगानी जी के जन्म शताब्दी समारोह को समर्पित था।कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग (हरियाणा), सांस्कृतिक संस्था ‘नृत्य धारा’ तथा नृत्य एवं संगीत विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र व युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने विश्वविद्यालय परिसर को शास्त्रीय कला, संगीत और नृत्य के रंग में सराबोर रखा।
गुरु पूर्णिमा के अत्यंत पावन अवसर पर शुरू हुए इस महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती ममता सचदेवा, विशिष्ट अतिथि प्रो. आशा पांडे, डॉ. जगमोहन शर्मा, संगीत एवं नृत्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक शर्मा, प्रो. शुचिस्मिता तथा अन्य गणमान्य प्रबुद्धजनों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया गया। उपस्थित विद्वानों एवं विद्यार्थियों ने स्व. पं. कुंदन लाल गंगानी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर गुरु-शिष्य परंपरा को नमन किया।प्रथम दिवस के प्रशिक्षण सत्र में विदुषी दीप्ति गुप्ता ने विद्यार्थियों को जयपुर घराने की बारीकियों, लयकारी, चक्करदार परणों एवं भाव पक्ष का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने ताल अष्टमंगल में कथक के तकनीकी पक्षों का प्रदर्शन किया तथा कथक एवं भरतनाट्यम के अद्भुत फ्यूजन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके उपरांत विदुषी वाणी माधव ने ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी और ओडिसी विधा की सूक्ष्म बारीकियों को साझा किया।
महोत्सव के दूसरे एवं अंतिम दिन प्रातःकालीन सत्र में आमंत्रित मुख्य अतिथि प्रोफेसर शुचिस्मिता व विशिष्ट अतिथि डॉ सुनीता दलाल व अतिथि श्री रवींद्र भट्ट जी ने मां भगवती के सम्मुख दीप जलाकर व माल्यार्पण कर सत्र आरंभ किया। ततपश्चात के.एस. निश्रेया वरलक्ष्मी (विशेषज्ञों) ने भरतनाट्यम में कई रचनाओं के माध्यम से नृत्याचार्यों एवं विषय ने कार्यशाला के प्रतिभागियों को भरतनाट्यम नृत्य के कठिन तकनीकी पक्षों, हस्तमुद्राओं, अभिनय तथा ताल-संगत का गहन अभ्यास कराया साथ ही शानदार प्रस्तुति दी। द्वितीय प्रस्तुति कत्थक की रही जिसमें डॉ. मानसी सक्सेना ने चारताल में वंदना व अंत मे ‘छैला रोके डागरिया ठुमरी” पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अंत मे संगीत एवं नृत्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार शर्मा ने सभी का धन्यवाद दिया और संगीत एवं नृत्य विभाग द्वारा भारत की सांस्कृतिक धरोहर के रुप मे संगीत तथा नृत्य की विविध शैलियों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की श्रृंखला को निरंतर जारी रखने का भरोसा दिया।समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रोफेसर शुचिस्मिता ने स्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा स्व. पंडित कुंदन लाल गंगानी जी के जीवन एवं उनकी सांगीतिक साधना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने न केवल कथक को नए आयाम दिए, बल्कि अपनी समृद्ध शिष्य परंपरा के माध्यम से देश-विदेश में भारतीय संस्कृति की अलख जगाई और कहा कि गुरु पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय कला के ऐसे महान मनीषी की स्मृति में यह आयोजन करना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और शास्त्रीय कलाओं को सहेजने का आह्वान किया।
संपूर्ण कार्यक्रम के सफल संयोजन में डॉ. मानसी सक्सेना की मुख्य भूमिका रही, जबकि मंच का कुशल संचालन डॉ. पुरुषोत्तम द्वारा किया गया।इस दो दिवसीय आयोजन में विश्वविद्यालय वरिष्ठ माध्यमिक आदर्श विद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुखविंदर सिंह, डॉ. मनीष कुकरेजा, डॉ. आरती श्योकंद, डॉ. हरविंदर सिंह, डॉ. दीपक, डॉ. अरूप चटर्जी,डॉ.पूजा चौधरी, संजना रानी, डॉ. सीमा जौहरी, डॉ. मुनीस, डॉ. अमरजीत सिंह, डॉ. ज्ञान सागर सिंह, श्री मनिंदर, डॉ.अमरजीत सिंह, श्री सतीश शर्मा, संदीप सैनी सहित विभाग के सभी शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।
