कालका (पंचकूला)। पहाड़ों की वादियों में पहुंचना अब आसान होगा। वर्ल्ड हेरीटेज में शामिल कालका-शिमला रेल मार्ग पर विस्टाडोम टाॅय ट्रेन में शताब्दी की तरह आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और यह ट्रेन अधिक स्पीड में पटरी पर दौड़ेगी। इससे कालका से शिमला पहुंचने का समय करीब एक घंटा कम हो जाएगा।

रेलवे के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। कालका बेडे में शामिल विस्टाडोम टाॅय ट्रेन का 28 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से ट्रायल सफल रहा। पिछले दिनों रेलवे के अनुसंधान डिजाइन मानक संगठन की टीम ने भी इसका ट्रायल लिया था।
टीम ने रिपोर्ट रेल मंत्रालय को भेजी है और हरी झंडी मिलते ही इस विशेष ट्रेन के शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा। रेलवे ने इस ट्रेन के पैनोरमिक डिब्बों को तैयार किया है। एसी और नॉन एसी को मिलाकर कुल 30 कोच कालका पहुंच चुके हैं। डिब्बों को दिलकश डिजाइन में शताब्दी की तरह शीशे की बड़ी खिड़किया के साथ बनाया गया है।

साढ़े चार घंटे में शिमला

फिलहाल चल रही टाॅय ट्रेन के कोच वैक्यूम ब्रेक सिस्टम से बने हैं और करीब 22 किमी प्रति घंटा की स्पीड के हिसाब से चलाई जाती हैं। टाॅय ट्रेन कालका से शिमला तक करीब साढ़े पांच घंटों में पहुंचती हैं। विस्टाडोम का स्पीड प्रोजेक्ट अगर सिरे चढ़ता है तो यह विशेष ट्रेन करीब साढ़े चार घंटे में शिमला पहुंचेगी। इस ट्रेन के डिब्बों को एयर ब्रेक से तैयार किया गया है।

शताब्दी जैसा महसूस होगा

कालका दौरे पर आए अंबाला मंडल के डीआरएम विनोद भाटिया ने अपग्रेड किए गए पैनोरमिक डिब्बों का निरीक्षण किया था और उन्होंने कहा था कि पैनोरमिक कोच को अपग्रेड करने का कार्य चल रहा है।

रेलवे यात्रियों को ज्यादा बेहतर सेवाएं देने के लिए हर संभव प्रयास करता आ रहा है। इस विशेष ट्रेन के शुरू होने से यात्रियों को सफर के दौरान शताब्दी जैसा महसूस होने लगेगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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