मंगलवार को सुनहरी खालसा और आलमपुर गांवों में आयोजित शिविरों में ग्रामीण महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा अपने और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए। कार्यक्रम के माध्यम से 150 से अधिक महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य अपनाकर आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. तारविंदर जीत कौर ने जंक फूड के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वाद बदलने के लिए कभी-कभार जंक फूड का सेवन किया जा सकता है, लेकिन नियमित रूप से इसके सेवन से शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि भोजन शरीर को ऊर्जा प्रदान करने, बीमारियों से बचाने और शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संतुलित आहार व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में सहायक होता है। उन्होंने महिलाओं को दैनिक भोजन में पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करने तथा भोजन तैयार करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया।
महिला अध्ययन शोध केंद्र की निदेशिका प्रो. वनिता ढींगरा ने कहा कि स्वस्थ महिला ही सशक्त समाज की आधारशिला होती है। उन्होंने संतुलित आहार के महत्व पर जोर देते हुए महिलाओं को अपने दैनिक भोजन में सब्जियां, दालें, फल तथा दूध से बने खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह दी। साथ ही गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए बेल, तरबूज, खरबूजा और गोंद कतीरा जैसे शरीर को शीतलता प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन के प्रति भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे ऐसे जागरूकता अभियान महिला सशक्तिकरण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जो महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छ जीवनशैली के प्रति जागरूक बनाकर उन्हें आत्मविश्वासी और सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस अवसर पर प्रो. अनीता दुआ, डॉ. वंदना दवे, डॉ. मीनाक्षी सुहाग तथा रविंदर भी उपस्थित रहे।
