महंगाई की मार, शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही और टूटते सपने — आखिर कब तक यूं बिखरता रहेगा देश का युवा?
“पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और शिक्षा प्रणाली की अव्यवस्था ने युवाओं को निराशा के अंधेरे में धकेला” — दिव्यांशु बुद्धि राजा
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी दिव्यांशु बुद्धि राजा ने देश में लगातार बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बेतहाशा कीमतों और शिक्षा व्यवस्था में सामने आ रही गंभीर लापरवाहियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज आम आदमी केवल आर्थिक संकट ही नहीं, बल्कि मानसिक पीड़ा से भी गुजर रहा है।
उन्होंने कहा कि मात्र दस दिनों के भीतर चौथी बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं, जो यह साबित करता है कि सरकार को आम जनता की परेशानियों और संघर्षों का कोई एहसास नहीं रह गया है। लगातार बढ़ते ईंधन के दामों ने हर वर्ग की कमर तोड़ दी है। एक तरफ गरीब और मध्यम वर्ग अपने घर का खर्च चलाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई ने लोगों की जिंदगी को बोझ बनाकर रख दिया है।
दिव्यांशु बुद्धि राजा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर केवल गाड़ियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा असर हर घर की रसोई पर पड़ता है। सब्जियां, राशन, दवाइयां, बच्चों की पढ़ाई, यात्रा और रोजमर्रा की हर जरूरत दिन-प्रतिदिन महंगी होती जा रही है। छोटे दुकानदार, किसान, मजदूर और नौकरीपेशा लोग आज सबसे ज्यादा परेशान हैं। व्यापार कमजोर हो रहा है, छोटे उद्योग टूट रहे हैं और युवाओं के रोजगार के अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दुख की बात यह है कि जिस युवा पीढ़ी के कंधों पर देश का भविष्य टिका है, वही आज सबसे ज्यादा निराश और मानसिक दबाव में है। नीट परीक्षा और सीबीएससी की उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
दिव्यांशु बुद्धि राजा ने कहा कि कई छात्रों ने री-चेकिंग और उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच के लिए आवेदन किया था। इस प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी दिखाई गई, लेकिन कई छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें उपलब्ध करवाई गई कॉपियां न तो स्पष्ट थीं और न ही उनका प्रिंट ठीक तरीके से दिखाई दे रहा था। विद्यार्थियों का कहना था कि कई पन्नों पर लिखावट धुंधली थी, जिससे उत्तरों को ठीक प्रकार से पढ़ पाना भी मुश्किल हो रहा था।
उन्होंने कहा कि कुछ छात्रों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें दिखाई गई उत्तर पुस्तिकाओं की लिखावट उनकी अपनी लिखावट से मेल नहीं खा रही थी। एक छात्र ने दर्द व्यक्त करते हुए कहा कि उसे भौतिक विज्ञान में 90 प्रतिशत से अधिक अंक आने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन परिणाम आने पर उसके आधे से भी कम अंक आए। छात्र का कहना था कि उत्तर पुस्तिका पर ऊपर उसका अनुक्रमांक और अन्य विवरण तो सही थे, लेकिन नीचे लिखे गए कई उत्तर उसकी लिखावट जैसे प्रतीत नहीं हो रहे थे। ऐसे मामलों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि यह केवल अंकों की गलती नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों और उनके आत्मविश्वास को तोड़ने वाली लापरवाही है। कई विद्यार्थी पूरे साल अपनी नींद, आराम और खुशियां त्यागकर केवल अपने भविष्य के लिए मेहनत करते हैं। उनके माता-पिता अपनी जरूरतें छोड़कर बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं, लेकिन जब परिणामों में इस प्रकार की गड़बड़ियां सामने आती हैं तो पूरा परिवार अंदर से टूट जाता है।
दिव्यांशु बुद्धि राजा ने कहा कि हाल ही में ऐसी दर्दनाक घटनाएं भी सामने आई हैं, जहां कुछ विद्यार्थियों ने मानसिक तनाव और निराशा के कारण अपनी जीवन लीला तक समाप्त कर ली। ताज़ा मामले में कर्नाटक की 18 वर्षीय छात्रा भाग्यश्री ने भी नीट परीक्षा रद्द होने और भविष्य को लेकर बढ़ती निराशा के कारण अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना पूरे देश को झकझोर देने वाली है। एक बेटी, जिसने अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की, वह व्यवस्था की अव्यवस्था और मानसिक दबाव के आगे हार गई। यह केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे समाज और शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद पीड़ादायक और चिंताजनक विषय है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि पुनः जांच प्रक्रिया में उन्हें न्याय मिलेगा, लेकिन बार-बार की अव्यवस्था, देरी और लापरवाही ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। यह केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि उन मासूम सपनों की हत्या है जो अपने माता-पिता की उम्मीदों को पूरा करना चाहते थे।
दिव्यांशु बुद्धि राजा ने कहा कि जिस देश का युवा रोने लगे, टूटने लगे और अपने भविष्य को लेकर डरने लगे, उस देश की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सरकार और संबंधित एजेंसियों को समझना होगा कि बच्चों का भविष्य केवल कागजों का खेल नहीं होता, बल्कि उससे लाखों परिवारों की उम्मीदें जुड़ी होती हैं।
उन्होंने मांग की कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों को तुरंत वापस लिया जाए तथा शिक्षा व्यवस्था में सामने आ रही शिकायतों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करवाई जाए। साथ ही जिन विद्यार्थियों के साथ अन्याय हुआ है, उन्हें शीघ्र न्याय दिलाया जाए ताकि देश का युवा दोबारा विश्वास और उम्मीद के साथ आगे बढ़ सके।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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