हमारा मूल कार्य वैचारिक अधिष्ठान है : देशराज शर्मा
………………………
संस्कृति हमारे राष्ट्र की आत्मा है : देशराज शर्मा
………………………
अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की विशेषता : डाॅ. ममता सचदेवा

कुरुक्षेत्र, 24 मई। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के महामंत्री देशराज शर्मा ने कहा कि जब व्यक्ति विचार से जुड़ता है तो आंदोलित होता है। विद्या भारती का उद्देश्य समाज परिवर्तन है। हमारा मूल कार्य वैचारिक अधिष्ठान है। उस विचार का आधार हमारी संस्कृति बोध है। संस्कृति हमारे राष्ट्र की आत्मा है। देशराज शर्मा विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की प्रांत संयोजकों की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यगोष्ठी के समापन पर देशभर से आए प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। उनके साथ मंचासीन संस्थान की अध्यक्षा डाॅ. ममता सचदेवा, पूर्व अध्यक्ष डाॅ. ललित बिहारी गोस्वामी, संस्कृति बोध परियोजना के संयोजक दुर्ग सिंह राजपुरोहित भी रहे। इस अवसर पर संस्थान के सह-सचिव डाॅ. पंकज शर्मा, प्रबंधक सुधीर कुमार एवं सदस्य कृष्ण कुमार भंडारी भी थे।
देशराज शर्मा ने आगे कहा कि हम ध्येय के प्रति समर्पित हैं। जब हमारे सामने जीवन का लक्ष्य होता है तो व्यक्ति गौण बन जाता है। जिस संस्कृति के हम वाहक हैं और जब हम एक ही हैं तो नफरत, द्वेष, प्रताड़ना क्यों? मानवीय व्यवहार की दूसरी कठिनाइयां हैं, उनका रास्ता भी हम ही निकालने वाले हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृति ज्ञान केवल परीक्षा तक सीमित न रह जाए, उसे अपने जीवन व्यवहार में अवश्य लाएं। बिना लक्ष्य के व्यक्ति मझदार में फंसा रहता है। आज समय बहुत तेजी का है। सूचनाएं ऊपर से नीचे तक कितने समय में पहुंच जाती है, इस पर प्रतिभागियों ने अपने विचार दिए। उन्होंने विद्या भारती की नई शब्दावली संयोजक, प्रमुख और प्रभारी के बारे में बताते हुए कहा कि संयोजक हमारे तंत्र के बीच का व्यक्ति है। जो हमारे तंत्र से बाहर है अर्थात् विषय का विद्वान उसे प्रमुख और विद्यालय की प्रबंध समिति से इस विषय को देखने वाला प्रभारी। उन्होंने कहा कि संस्कृति बोध परियोजना महत्वपूर्ण विषय है जो लोगों को सीधा गले उतरता है। क्योंकि आज प्रत्येक परिवार को इस विषय की जरूरत है।
संस्थान की अध्यक्षा डाॅ. ममता सचदेवा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में देशभर से आए प्रांत संयोजकों का संस्थान में आने पर धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को भारत की गौरवशाली संस्कृति का बोध हो इसीलिए संस्कृति बोध परियोजना संस्कृति शिक्षा संस्थान के माध्यम से पूरे देश में चलाई गई है। संस्कृति का यह प्रवाह निरंतर बना रहे, इसकी आज अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की विशेषता है। शिक्षा में संस्कार, संवेदना, चरित्र का होना जरूरी है। इसके बिना हमारी शिक्षा अधूरी है। भारतीय सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने के कारण ही आज हमारी संस्कृति सुरक्षित और संरक्षित है। विश्व की अनेक संस्कृतियां नष्ट हो गईं लेकिन भारतीय संस्कृति का कल्प वृक्ष प्राचीन वैदिक काल से आज तक हमारे साथ है।
मुक्त चिंतन सत्र में प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए एवं संस्कृति बोध परियोजना को और प्रभावी बनाने के लिए महती सुझाव भी दिए। साथ ही प्रतिभागियों ने अपने-अपने प्रान्तों में सांगठनिक रचना का विवरण भी दिया। इस अवसर पर अपने से नीचे की टोली को कार्य निर्धारित करना और उसकी पूछताछ करते हुए माॅनीटरिंग करने की प्रक्रिया लगातार करना, पूर्व नियोजित बैठकें करना, बैठकों का क्रम निर्धारित करना जैसे अनेक महत्वपूर्ण टिप्स प्रतिभागियों को दिए गए। छोटी-छोटी बातों पर नया विचार करना और आगे बढ़ना, साथ ही प्रतिभागियों को शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करने वाली टोली का उत्तरदायित्व देने सरीखी अभिप्रेरणा देते हुए कार्यगोष्ठी का समापन हुआ।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *