नीलोखेड़ी/करनाल 22 मई – वी बी जीरामजी के अंतर्गत श्रमिकों को उनकी क्षमता एवं कार्यकुशलता के अनुरूप कार्य उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़े और योजनाओं का प्रभाव भी अधिक दिखाई दे। यह बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे आज एक माह से संचालित सामाजिक अंकेक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जनसुनवाई कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण के दौरान पांच गांवों का अध्ययन किया गया है, जो व्यापक स्तर पर योजना के क्रियान्वयन का एक प्रतिनिधि नमूना है। अध्ययन के दौरान प्राप्त निष्कर्षों से सीख लेते हुए जिन कार्यों या गतिविधियों को पूर्व में मनरेगा के अंतर्गत पूर्ण रूप से नहीं किया जा सका, उन्हें अब वीबी जीरामजी के नए स्वरूप में और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण तथा परिणामोन्मुख तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए निरंतर निगरानी, जनभागीदारी और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है, जिससे ग्रामीण विकास को नई गति मिल सके।उन्होंने कहा कि जनसुनवाई लोगों को अपनी बात रखने का अवसर प्रदान करती है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार और सुशासन को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का उपयोग ग्रामीण विकास एवं समाजहित के कार्यों में करने का आह्वान किया।
डॉ. चौहान ने कहा कि वी बी जीरामजी सहित विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक पात्र श्रमिक को जॉब कार्ड उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जॉब कार्ड केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों का महत्वपूर्ण माध्यम है। जॉब कार्ड में श्रमिक द्वारा किए गए कार्य, कार्य दिवसों की संख्या, भुगतान संबंधी विवरण तथा अन्य आवश्यक जानकारियां समय-समय पर दर्ज की जानी चाहिए, ताकि श्रमिक अपने रोजगार एवं भुगतान से संबंधित जानकारी स्वयं सत्यापित कर सकें। उन्होंने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण का उद्देश्य भी यही है कि योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ पहुंचे।
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान, हैदराबाद से लीड कोर्स कॉर्डिनेटर विश्वनाथ ने कहा कि विकास कार्यों की वास्तविक सफलता भवनों और आंकड़ों से नहीं, बल्कि जनता की संतुष्टि से मापी जाती है। सामाजिक अंकेक्षण यह सुनिश्चित करता है कि योजनाओं का प्रत्येक संसाधन सही व्यक्ति तक पहुंचे और जनता स्वयं विकास प्रक्रिया की सहभागी बने। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, जनभागीदारी और जवाबदेही सुशासन के तीन प्रमुख स्तंभ हैं तथा सामाजिक अंकेक्षण इन तीनों को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
इस अवसर पर हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान से सहायक आचार्य एवं कोर्स कॉर्डिनेटर वजीर सिंह, संस्थान के सहायक आचार्य सुशील मेहता एवं कमलदीप सांगवान, बीडीपीओ शाहाबाद कृष्ण कुमार, ग्राम पंचायत गुढ़ा के सरपंच सुरजीत सिंह, रामनिवास, जेई मनरेगा कुरुक्षेत्र, ग्राम सचिव खेड़ी शिशग्रान रिया, एबीपीओ लाडवा संजय, कनिष्ठ अभियंता नरेंद्र कुमार, पीओ मनरेगा मनोज कुमार, पंचायत समिति सदस्य सुमित कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *